पूरे मामले पर आरबीआई का क्या कहना है? और आरबीआई ने यह फैसला कब लिया?
7 ऑक्टोबर को आरबीआई ने प्रमुख रेपो रेट मे 0.25% की बढ़ोतरी करते हुए रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50 % कर दिया है। ऐसा 4 साल मे पहली बार हुआ है की repo rate दर मे वृद्धि की गई हो। आरबीआई द्वारा अपनी बेंचमार्क नीतिगत दर बढ़ाने के कुछ घंटों बाद, पंजाब नैशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बडौदा (BOB), इंडियन बैंक सहित सभी लोन देने वाली बैंक ने अपने ब्याज दर मे वृद्धि करने की घोषणा की है। जिससे ब्याज पर पैसे लेने वाले देश के नागरिकों के लिए ब्याज देना और भी महंगा हो जाएगा।
केन्द्रीय बैंक (RBI) ने बुधवार को repo rate बढ़ाते हुए यह भी संकेत दिया है कि, बढ़ती मुद्रास्फीति और घरेलू मुद्रा के अवमूल्यन के कारण नीतिगत रुख मे बदलाव के कारण आगे भी रेपो रेट दर मे बढ़ोतरी की जा सकती है।
बुधवार को यह फैसला 6 सदस्ययी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के द्वारा लिया गया है। december 2024 मे भारतीय रिजर्व बैंक के छब्बीसवे गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पद संभालने के बाद रेपोरते दर मे पहली बार वृद्धि की गई है। हालांकि लोगों को पहले से ही रेपो रेट दर मे वृद्धि की उम्मीद थी । लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी पॉलिसी स्टैन्स को संतुलित सख्ती मे बदलकर supervisors / observers को आश्चर्य मे डाल दिया है। जिससे भविष्य मे दर कटोंटी की संभावना खतम हो गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक के repo rate बढ़ाने के बाद बॅंकों पर इसका क्या असर पड़ा?
आरबीआई के reporate दर बढ़ाने के बाद, पंजाब नैशनल बैंक ने एक regulatory filing मे बताया कि केन्द्रीय बैंक के इस कदम के बाद उन्होंने अपनी रेपो लिंक्ड लेडिंग रेट को 8.10% (ओ.35% बीएसपी सहित) से बढ़ाकर 8.35% कर दिया है। जो 8 ऑक्टोबर गुरुवार से लागू की गई है। हालांकि पंजाब नैशनल बैंक ने यह बताया की, उनकी मार्जिनल कास्ट ऑफ फंड्स बेस्ट लेडिंग रेट और बेस्ट रेट unalterable है।
वही बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी RBLR मे 0.25 % की वृद्धि की है जिससे RBLR बढ़कर 7.90 % से 8.15% पर आ गया है। चेन्नई मे स्थित इंडियन बैंक ने इसी प्रकार अपनी RBLR को 7.95% से बढ़ाकर 8.20% कर दिया है। रेपो रेट बढ़ने के बाद यह सभी बदलाव 8 ऑक्टोबर से लागू किए गए है। बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीस बैंक दोनों ने अपने RBLR को बढ़ाकर 8.35% कर दिया है।
इसी मुद्दे पर बैंक ऑफ इंडिया ने एक regulatory फाइलिंग मे कहा की, यह बदलाव आरबीआई द्वारा रेपो रेट दर मे बढ़ोतरी करने के बाद हुआ है। बता दे की, आरबीआई के ऐसा करने का मुख्य उद्देश्य संतुलित सख्ती की नीति को अपनाना है।
रेपो रेट बढ़ने के कारण देश पर होने वाले प्रभाव?
ईरान मे हो रहे युद्ध के कारण तेल की कीमतों मे लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है इसका सीधा प्रभाव मुद्रास्फीति पर पड़ रहा है। जब आयात बढ़ेगा तो पैसों की कीमत मे गिरवाट होना लजमी है। इसी कारण बाजार से वस्तुए खरीदने की शक्ति कम हो रही है, और भारतीय मुद्रा पर प्रभाव पड रहा है। इसी कारण भारत ने भी अन्य केन्द्रीय बैंक के साथ मिलकर ब्याज दरों मे वृद्धि कर दी है। repo rate बढ़ने के कारण बैंकों ने अपने ब्याज दरों मे वृद्धि करना शुरू कर दिया है, इसका सीधा प्रभाव भारत की आम जनता पर पड़ने वाला है, होम लोन, car लोन, ईएमआई सभी के ब्याज दर बढ़ने वाले है।
वास्तविकता मे, 6 सदस्यीय ब्याज दर समिति ने सर्व समिति से ब्याज दर मे वृद्दि के पक्ष मे वोट किया था। और reuters के एक सर्वे के मुताबिक ब्याज दर के मामले मे लगभग 60% ईकानमिस्ट ने रेपो रेट मे 0.25% बीएसपी की आशंका पहले ही जताई थी।
REPO RATE की वृद्धि पर आरबीआई के 26 वे गवर्नर संजय मल्होत्रा ने क्या कहा?
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि , आने वाली तिमाही मे उपभोगता मुद्रास्फीति का औसत लगभग 5.8% रहने की आशंका है। इस समय बैंक की नीतिगत दर मे बदलाव करना बहुत जरूरी है। उन्होंने आगे बताया कि , देश मे महँगाई बढ़ने की आशंका और समान की कीमतों पर आर्थिक दबाव पड़ने के संकेत दिखाई दे रहे है, बीते साल की तुलना मे इस साल महंगाई की परिस्थिति उतनी कोन्टरोल मे नहीं दिखाई दे रही है।
reporate बढ़ने के बाद हुई प्रेस कोन्फ़्रेंके मे मल्होत्रा ने , कैलिब्रेटड टाइटनिंग का मतलब बताते हुए कहा की, यह थोड़ी सख्त नीति है। इसका सीधा मतलब है की आरबीआई आगे के फैसले पहले से तय नहीं करेगा। बल्कि महंगाई , देश की अर्थव्यवस्था , और बाजारों के आंकड़ों को देखकर ही अर्थव्यवस्था से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।
