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RBI Repo Rate 6% तक पहुंचने का अनुमान: Union Bank की रिपोर्ट में महंगे कर्ज और G-Sec Yield पर दबाव की आशंका

भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दरों को लेकर एक नया अनुमान सामने आया है। Union Bank of India की रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई के जोखिम, ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के बीच RBI FY27 में repo rate को मौजूदा 5.25% से बढ़ाकर 5.75%–6% तक ले जा सकता है। रिपोर्ट अक्टूबर में 25 basis points की संभावित बढ़ोतरी का अनुमान भी लगाती है। हालांकि, यह बैंक का पूर्वानुमान है और RBI ने ऐसी बढ़ोतरी की घोषणा नहीं की है।

RBI Repo Rate 6% तक पहुंचने का अनुमान: Union Bank की रिपोर्ट में महंगे कर्ज और G-Sec Yield पर दबाव की आशंका
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Union Bank of India report via ANI/Economic Times.

Union Bank ने Repo Rate को लेकर क्या अनुमान लगाया?

Union Bank of India की रिपोर्ट के अनुसार, RBI अक्टूबर में repo rate में 25 basis points यानी 0.25 percentage point की बढ़ोतरी कर सकता है।

इसके बाद FY27 के शेष हिस्से में एक या दो अतिरिक्त rate hikes की संभावना जताई गई है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो repo rate 5.75% से 6% के दायरे तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट में आगे की monetary policy के लिए महंगाई पर लगातार नजर रखने वाले सख्त रुख की संभावना भी जताई गई है।

Repo Rate अभी कितनी है?

वर्तमान repo rate 5.25% है। RBI ने 2025 के दौरान कुल 125 basis points की कटौती की थी और उसके बाद कई policy reviews में दर को स्थिर रखा गया।

इसलिए 6% तक पहुंचने का अर्थ मौजूदा स्तर से अधिकतम 75 basis points की वृद्धि होगी।

यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है—6% की दर अभी लागू नहीं हुई है। यह Union Bank की research report में दिया गया संभावित policy trajectory है।

RBI पर ब्याज दर बढ़ाने का दबाव क्यों बन सकता है?

Union Bank की रिपोर्ट ने लगातार बने inflation risks को प्रमुख कारणों में रखा है। इसके अलावा ऊंची crude oil prices और बढ़ती global bond yields भी भारतीय वित्तीय बाजारों पर दबाव डाल रही हैं।

भारत बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा रहने से घरेलू कीमतों और रुपये पर दबाव बढ़ने का जोखिम रहता है।

ऐसे माहौल में RBI को आर्थिक विकास को समर्थन देने और महंगाई नियंत्रित रखने के बीच संतुलन बनाना पड़ सकता है।

सरकारी बॉन्ड पर भी बढ़ सकता है दबाव

रिपोर्ट केवल repo rate तक सीमित नहीं है। इसमें सरकारी प्रतिभूतियों यानी G-Secs की yields पर भी अतिरिक्त दबाव की आशंका जताई गई है।

सितंबर में ऊंचे crude prices, बढ़ती global yields और rate-hike expectations ने भारतीय सरकारी बॉन्ड को दबाव में रखा। इसके साथ RBI की OMO sales और लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की अधिक आपूर्ति ने भी yields को ऊंचा रखने में भूमिका निभाई।

Union Bank का अनुमान है कि यदि monetary tightening के साथ crude prices और global yields भी ऊंची रहती हैं, तो 10-year G-Sec yield पर आगे भी upward pressure रह सकता है।

RBI ने Liquidity घटाने के लिए क्या किया?

Union Bank की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने सितंबर की तीन OMO auctions में कुल ₹1 लाख करोड़ की securities बेचीं।

इससे banking system में liquidity surplus 6 सितंबर के ₹11.16 लाख करोड़ से घटकर 30 सितंबर तक ₹4.85 लाख करोड़ रह गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि RBI Variable Rate Reverse Repo (VRRR), OMO sales और foreign-exchange swaps जैसे उपायों से अतिरिक्त liquidity को absorb कर रहा है।

Home Loan और EMI पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर RBI वास्तव में repo rate बढ़ाता है, तो इसका असर धीरे-धीरे borrowers तक पहुंच सकता है।

Repo-linked या अन्य floating-rate loans की ब्याज दरें बढ़ने की स्थिति में home loan, personal loan और कुछ अन्य कर्ज महंगे हो सकते हैं। Borrowers के लिए इसका मतलब EMI बढ़ना या loan tenure लंबा होना हो सकता है।

हालांकि, बैंक कितनी और कितनी जल्दी बढ़ोतरी ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, यह उनके lending benchmarks और pricing decisions पर निर्भर करेगा।

इसलिए Union Bank की भविष्यवाणी के आधार पर यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सभी borrowers की EMI निश्चित रूप से बढ़ने वाली है।

FD निवेशकों के लिए तस्वीर अलग हो सकती है

ऊंची ब्याज दरों का असर केवल borrowers पर नकारात्मक नहीं होता।

अगर banking system में deposit rates भी ऊपर जाती हैं, तो Fixed Deposit निवेशकों को बेहतर ब्याज दरें मिल सकती हैं। पहले से ही deposit mobilisation और liquidity जैसे कारक बैंकों की FD pricing को प्रभावित कर रहे हैं।

लेकिन repo rate और FD rates के बीच सीधा और तत्काल one-to-one संबंध नहीं होता।

क्या 6% Repo Rate तय है?

नहीं।

Union Bank का 5.75%–6% अनुमान एक economic forecast है, RBI का policy announcement नहीं।

दूसरे economists की राय भी एक जैसी नहीं रही है। उदाहरण के लिए, पहले के Reuters poll में कई economists ने 2026 के अंत तक repo rate 5.25% पर बने रहने की उम्मीद जताई थी।

यानी monetary-policy outlook पर बाजार में अलग-अलग विचार मौजूद हैं।

अंतिम फैसला RBI की Monetary Policy Committee महंगाई, growth, crude prices, currency movements, liquidity और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों जैसे कई संकेतकों का आकलन करने के बाद करेगी।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है?

Repo rate भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण policy rates में से एक है। इसमें बदलाव का असर borrowing costs से लेकर housing demand, corporate investment, bank deposits और bond market तक पहुंच सकता है।

यदि FY27 में दर वास्तव में 6% के करीब पहुंचती है, तो यह हाल के easing cycle के बाद monetary policy में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत होगा।

लेकिन फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि rate hike एक संभावना है, फैसला नहीं।

Union Bank की रिपोर्ट बढ़ते inflation और financial-market risks की ओर इशारा करती है, जबकि RBI का वास्तविक रास्ता आने वाले आर्थिक आंकड़ों और MPC के फैसलों से तय होगा।

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