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Rupee फिर ₹96/$ के करीब: RBI ने संभाला मोर्चा, Crude Oil और US Yields ने बढ़ाया दबाव

भारतीय रुपया शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95.7925 तक पहुंच गया और ₹96 के स्तर के बेहद करीब आ गया। विदेशी मुद्रा बाजार के ट्रेडर्स के मुताबिक, सरकारी बैंकों को डॉलर बेचते देखा गया, जिसे RBI की ओर से संभावित हस्तक्षेप माना गया। Brent crude के करीब $110 प्रति बैरल तक चढ़ने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से रुपये पर दबाव बढ़ा है।

Rupee फिर ₹96/$ के करीब: RBI ने संभाला मोर्चा, Crude Oil और US Yields ने बढ़ाया दबाव
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

भारतीय रुपये पर एक बार फिर वैश्विक बाजार की उथल-पुथल का दबाव बढ़ गया है। शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.4% गिरकर 95.7925 तक पहुंच गया। हालांकि इसके बाद कुछ सुधार आया और Reuters की रिपोर्ट के समय यह लगभग 95.71 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था।

बाजार के तीन बैंक FX traders और एक brokerage trader ने Reuters को बताया कि सरकारी बैंकों को डॉलर बेचते देखा गया। उनका मानना है कि यह बिक्री संभवतः Reserve Bank of India की ओर से की गई, ताकि रुपये में तेज गिरावट को सीमित किया जा सके। RBI ने स्वयं इस विशेष intervention की तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी, इसलिए इसे बाजार सहभागियों के आकलन के रूप में देखना जरूरी है।

रुपये की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिकी Treasury yields में बढ़ोतरी है।

₹95.7925 तक गिरा Rupee

शुक्रवार के कारोबार में रुपया 95.7925 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार की तुलना में यह करीब 0.4% की गिरावट थी।

इससे भारतीय मुद्रा एक बार फिर मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण ₹96 प्रति डॉलर के स्तर के करीब पहुंच गई।

हालांकि ₹96 अपने आप में कोई आधिकारिक RBI target नहीं है। बाजार के लिए इसका महत्व मुख्य रूप से psychological level के तौर पर है।

रुपया लगातार चौथे कारोबारी दिन कमजोर हुआ और शुक्रवार को एक समय लगभग 95.70 पर था। मौजूदा परिस्थितियों में मुद्रा सप्ताह के दौरान 1% से ज्यादा गिरावट की ओर बढ़ रही थी।

क्या RBI ने Dollar बेचकर Rupee को संभाला?

Reuters से बात करने वाले FX traders के अनुसार, state-run banks को बाजार में डॉलर offer करते देखा गया। ट्रेडर्स ने इसे RBI की ओर से संभावित intervention माना।

ऐसी स्थिति में डॉलर की अतिरिक्त supply रुपये की गिरावट की गति कम करने में मदद कर सकती है।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है: RBI intervention की जानकारी traders के हवाले से आई है, न कि इस specific operation पर RBI की औपचारिक घोषणा से।

इसलिए यह कहना ज्यादा सटीक होगा कि RBI ने संभावित रूप से हस्तक्षेप किया, बजाय इसे केंद्रीय बैंक द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित कार्रवाई बताने के।

RBI ने तीसरे दिन भी किए FX Swaps

Spot market में संभावित intervention के अलावा RBI ने शुक्रवार को लगातार तीसरे सत्र में dollar-rupee sell/buy swaps भी किए होने की बात सामने आई।

मुंबई स्थित एक बैंक के trader ने Reuters को बताया कि ये swaps आकार में सीमित थे और मुख्य रूप से छह महीने तक की maturity में केंद्रित थे। इन operations का एक उद्देश्य banking system से अतिरिक्त rupee liquidity को निकालना था।

एक दिन पहले भी RBI के FX swaps की जानकारी सामने आई थी। Reuters के मुताबिक गुरुवार को इनका अनुमानित आकार करीब $600-700 million था, जबकि बुधवार को लगभग $1 billion का operation हुआ था।

इन swaps का रुपये को अप्रत्यक्ष फायदा भी मिल सकता है। Higher forward premiums रुपये के खिलाफ speculative positions और dollar liabilities की hedging को महंगा कर सकते हैं।

Crude Oil बना Rupee की सबसे बड़ी मुश्किल

रुपये पर मौजूदा दबाव की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल शामिल है।

Middle East में बढ़ते तनाव और महत्वपूर्ण shipping routes पर disruption की आशंकाओं के बीच Brent crude शुक्रवार को एशियाई कारोबार में करीब $110 प्रति बैरल तक पहुंच गया।

भारत के लिए महंगा crude विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल आयात का भुगतान बड़े पैमाने पर डॉलर में होता है। तेल की कीमत बढ़ने पर importers की dollar demand बढ़ सकती है, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

महंगा तेल घरेलू inflation के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है, खासकर यदि ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक बनी रहें।

US Bond Yields ने बढ़ाया दूसरा दबाव

समस्या केवल crude oil तक सीमित नहीं है।

अमेरिकी Treasury yields में तेज बढ़ोतरी ने भी emerging-market assets पर दबाव बढ़ाया है। शुक्रवार को 10-year U.S. Treasury yield करीब 4.957% तक पहुंच गई थी।

ऊंची अमेरिकी yields global capital के लिए dollar-denominated assets को अधिक आकर्षक बना सकती हैं। इसके साथ safe-haven demand ने भी डॉलर को समर्थन दिया है।

इस combination—महंगा crude + मजबूत dollar + ऊंची U.S. yields—ने रुपये के लिए मुश्किल परिस्थितियां पैदा की हैं।

₹94.30 से ₹95.79 तक कैसे पहुंचा Rupee?

सितंबर की शुरुआत में तस्वीर काफी अलग थी।

Reuters के अनुसार, महीने की शुरुआत में रुपया मजबूत होकर करीब 94.30 प्रति डॉलर के दो महीने के उच्च स्तर तक पहुंच गया था। लेकिन global pressures ने उस तेजी का बड़ा हिस्सा खत्म कर दिया।

अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या ₹96 के आसपास RBI की मौजूदगी और मजबूत होगी या global oil तथा bond-market pressure रुपये को आगे भी कमजोर रखेगा।

क्या Rupee ₹96 के पार जा सकता है?

इसका निश्चित पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है, लेकिन currency-market analysts कुछ महत्वपूर्ण levels पर नजर रख रहे हैं।

CR Forex के managing director Amit Pabari ने Reuters को बताया कि immediate support zone 95.10-95.20 के आसपास है। उनके अनुसार 95.50-95.80 से ऊपर लगातार बने रहने पर आने वाले sessions में 96.00-96.20 का रास्ता खुल सकता है।

यह analyst forecast है, निश्चित परिणाम नहीं। Crude prices, dollar strength, foreign capital flows और RBI की intervention strategy आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

Stock Market और Bonds पर भी दबाव

Currency market की कमजोरी अकेली नहीं थी।

शुक्रवार सुबह Nifty 50 करीब 0.92% गिरकर 23,261.7 और Sensex 0.84% गिरकर 74,272.61 पर पहुंच गया था। दोनों indices जून 11 के बाद अपने सबसे निचले स्तर तक पहुंचे।

भारतीय 10-year government bond yield भी 7% के ऊपर चली गई, जो तीन महीने से अधिक का उच्च स्तर था।

इससे साफ है कि Middle East तनाव और तेल की तेजी का असर केवल currency तक सीमित नहीं है—equities, bonds और inflation expectations भी इसकी चपेट में हैं।

RBI के सामने अब क्या चुनौती है?

RBI के लिए चुनौती केवल रुपये को किसी खास संख्या पर रोकना नहीं, बल्कि currency market में अत्यधिक volatility को नियंत्रित करना है।

तेल की कीमतों में तेजी अगर लंबे समय तक रहती है तो import-related dollar demand मजबूत रह सकती है। दूसरी तरफ ऊंची U.S. yields और मजबूत dollar global capital flows को प्रभावित कर सकते हैं।

ऐसी परिस्थिति में RBI spot dollar sales, forward market operations और liquidity-management tools का इस्तेमाल कर सकता है। हाल के FX swaps दिखाते हैं कि केंद्रीय बैंक के पास intervention के एक से अधिक रास्ते हैं।

फिलहाल ₹96 का स्तर बाजार की नजर में है। लेकिन रुपये की अगली दिशा केवल RBI की कार्रवाई से तय नहीं होगी। Crude oil, Middle East conflict, U.S. interest-rate expectations और global risk sentiment आने वाले दिनों में उतने ही महत्वपूर्ण रहेंगे।

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