सात दिनों की गिरावट के बाद बाजार में लौटी खरीदारी
भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को पिछले कई कारोबारी सत्रों से जारी दबाव से उबरने की कोशिश की। सेंसेक्स में इंट्राडे कारोबार के दौरान करीब 650 अंकों की तेजी दर्ज की गई और निफ्टी 24,250 के पार निकल गया। यह तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि इससे पहले निफ्टी लगातार सात सत्रों तक गिरा था। बुधवार को निफ्टी 24,078.30 और सेंसेक्स 76,909.68 पर बंद हुआ था।
हालांकि बाजार की तेजी को केवल एक दिन की बड़ी बढ़त के रूप में देखने के बजाय हाल की कमजोरी के संदर्भ में समझना जरूरी है। पिछले सात सत्रों में निफ्टी करीब 2.1% गिर चुका था, जबकि सेंसेक्स भी इसी अवधि में लगभग इतनी ही कमजोरी दर्ज कर चुका था। ऐसे में गुरुवार की तेजी में नई खरीदारी के साथ निचले स्तरों से तकनीकी रिकवरी की भूमिका भी रही।
बाजार में तेजी के प्रमुख कारण
1. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी
वैश्विक बॉन्ड बाजार में स्थिरता ने जोखिम वाली संपत्तियों के प्रति निवेशकों की धारणा को बेहतर किया। अमेरिकी ट्रेजरी की लंबी अवधि के सरकारी कर्ज की बायबैक गतिविधि बढ़ाने की घोषणा के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी देखने को मिली। इससे एशियाई शेयर बाजारों को भी सहारा मिला।
2. आईटी और वित्तीय शेयरों में खरीदारी
भारतीय बाजार की रिकवरी में आईटी और वित्तीय सेक्टर की अहम भूमिका रही। शुरुआती कारोबार में आईटी इंडेक्स करीब 1.4% मजबूत हुआ, जबकि वित्तीय शेयरों में भी लगभग 0.7% की बढ़त दर्ज की गई। कुल 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से 13 बढ़त में थे, जिससे तेजी का दायरा अपेक्षाकृत व्यापक दिखाई दिया।
3. रुपये और विदेशी निवेश से जुड़ी धारणा
बाजार की तेजी को भारतीय रुपये में मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से खरीदारी की बेहतर उम्मीदों से भी समर्थन मिला। इसके अलावा हाल की लगातार गिरावट के बाद शॉर्ट कवरिंग ने तेजी की रफ्तार बढ़ाने में योगदान दिया।
इससे पहले बाजार पर क्यों था दबाव?
भारतीय बाजार की हालिया गिरावट के पीछे घरेलू कारणों के साथ कई अंतरराष्ट्रीय चिंताएं थीं। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया था। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकता है।
19 अगस्त को निफ्टी ने लगातार सातवां गिरावट वाला सत्र दर्ज किया था, जो करीब 11 महीनों की सबसे लंबी लगातार गिरावट थी। इसलिए 20 अगस्त की रिकवरी बाजार के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।
निवेशकों के लिए इस तेजी का क्या मतलब है?
गुरुवार की तेजी से संकेत मिलता है कि लगातार बिकवाली के बाद निचले स्तरों पर खरीदार फिर सक्रिय हो रहे हैं। खासतौर पर आईटी और वित्तीय शेयरों में मजबूती से बेंचमार्क इंडेक्स को सहारा मिला।
फिर भी एक मजबूत कारोबारी सत्र को लंबी अवधि के नए तेजी वाले रुझान की पुष्टि नहीं माना जा सकता। कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों का रुख आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
संतुलित विश्लेषण
बाजार के लिए सकारात्मक पक्ष यह है कि कई सेक्टरों में एक साथ खरीदारी लौटी है और वैश्विक बॉन्ड बाजार से तत्काल दबाव कुछ कम हुआ है। लगातार गिरावट के बाद यह निवेशकों के भरोसे में सुधार का शुरुआती संकेत हो सकता है।
दूसरी ओर, वैश्विक जोखिम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। भारतीय बाजार के सामने ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और विदेशी पूंजी प्रवाह जैसे कारक बने हुए हैं। बाजार की मध्यम अवधि की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि मौजूदा रिकवरी आने वाले कारोबारी सत्रों में टिकती है या नहीं।
