शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: Sensex 600 अंक से ज्यादा फिसला, Nifty 23,500 के नीचे; IT Index 3% टूटा
परिचय
भारतीय शेयर बाजार पर महंगे कच्चे तेल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का दबाव बुधवार को और गहरा गया। 9 सितंबर के शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 600 अंक से अधिक गिर गया, जबकि NSE Nifty 50 ने 23,500 का स्तर गंवा दिया।
सुबह करीब 10:01 बजे Sensex 0.83% गिरकर 74,954.33 पर था, जबकि Nifty 50 0.67% की गिरावट के साथ 23,474.4 पर कारोबार कर रहा था। बाजार की कमजोरी व्यापक रही और 16 प्रमुख sectoral indices में से 12 लाल निशान में थे। सबसे ज्यादा दबाव IT शेयरों पर दिखाई दिया, जहां Nifty IT करीब 3% गिर गया।
Brent Crude $99.5 के करीब, भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
बाजार की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा बाहरी कारण crude oil की कीमतों में फिर आई तेजी रही।
Brent crude futures करीब 1.5% चढ़कर $99.5 प्रति बैरल तक पहुंच गए। तेल की कीमतों में यह तेजी पश्चिम एशिया में संघर्ष के नए घटनाक्रमों और संभावित supply disruption की चिंताओं के बीच आई है।
भारत के लिए $100 के करीब crude विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश दुनिया के सबसे बड़े crude importers में शामिल है। लंबे समय तक महंगा तेल रहने पर import bill और trade deficit बढ़ने, inflation पर दबाव आने और कंपनियों की input costs बढ़ने का जोखिम रहता है।
इसका असर currency market पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में रुपया 14 पैसे कमजोर होकर ₹94.88 प्रति डॉलर तक पहुंच गया।
IT Stocks बने बाजार के सबसे बड़े Drag
बुधवार की गिरावट केवल crude oil तक सीमित नहीं रही। Technology stocks में तेज बिकवाली ने benchmark indices को अतिरिक्त दबाव में डाल दिया।
Nifty IT index करीब 3% गिरा। Sensex में शामिल प्रमुख IT कंपनियों में HCL Technologies लगभग 3.18%, Tech Mahindra 2.92% और Infosys 2.78% नीचे थे। TCS में भी करीब 1.83% की कमजोरी दर्ज की गई।
IT sector में सबसे तेज गिरावटों में से एक Coforge में रही। शेयर करीब 6% टूट गया। यह गिरावट कंपनी के Chairman Om Prakash Bhatt के इस्तीफे के बाद आई। Reuters के मुताबिक उनका इस्तीफा board evaluation process को लेकर internal audit में उठी चिंताओं के बाद हुआ।
Sensex 600 अंक से ज्यादा नीचे कैसे पहुंचा?
बाजार ने दिन की शुरुआत ही कमजोरी के साथ की थी।
Sensex 584.21 अंक यानी 0.77% गिरकर 74,993.37 पर खुला। Nifty 50 147.25 अंक या 0.62% गिरकर 23,487.85 पर खुला। इसके बाद बिकवाली बढ़ी और Sensex की गिरावट 600 अंक के पार चली गई।
Intraday कारोबार में Sensex ने करीब 609 अंकों की गिरावट दर्ज की, जबकि Nifty 50 ने 23,477 का निचला स्तर छुआ। Infosys, Reliance Industries, HDFC Bank, ICICI Bank, TCS, Bharti Airtel और HCL Technologies जैसे index heavyweights पर दबाव ने गिरावट को बढ़ाया।
Midcap और Smallcap भी नहीं बचे
कमजोरी केवल large-cap शेयरों तक सीमित नहीं रही।
Reuters के मुताबिक broader small-cap index करीब 0.6% और mid-cap index लगभग 0.7% गिरा। इससे संकेत मिला कि निवेशकों की risk appetite पूरे बाजार में कमजोर हुई।
हालांकि हर शेयर में बिकवाली नहीं थी। शुरुआती कारोबार में Sun Pharma, Larsen & Toubro और Kotak Mahindra Bank जैसे कुछ Sensex stocks हरे निशान में थे।
Crude Oil बढ़ने पर भारतीय बाजार क्यों होता है परेशान?
भारत अपनी crude oil जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए international oil prices में तेज बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों पर एक साथ असर डाल सकती है।
पहला असर import bill पर पड़ता है। ज्यादा डॉलर में तेल खरीदने से trade deficit पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरा जोखिम inflation का है, क्योंकि fuel और transportation costs अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों तक पहुंच सकती हैं।
तीसरा असर रुपये पर पड़ सकता है। Oil importers की dollar demand बढ़ने और foreign investment flows कमजोर होने की स्थिति में currency पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है।
इसीलिए $100 के आसपास पहुंचता Brent crude भारतीय equities के लिए केवल energy-market development नहीं, बल्कि inflation, currency, interest rates और corporate margins से जुड़ा व्यापक macroeconomic risk बन जाता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बढ़ाया दबाव
Foreign Institutional Investors यानी FIIs का रुख भी बाजार के लिए सहायक नहीं रहा।
8 सितंबर को FIIs ने भारतीय equities में करीब ₹123 करोड़ की net selling की। इसके विपरीत Domestic Institutional Investors यानी DIIs ने करीब ₹1,350 करोड़ की net buying की।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ऐसे समय में हो रही है जब crude oil और rupee पहले से market sentiment को प्रभावित कर रहे हैं।
IPO और QIP में जा रही Liquidity भी बनी Factor
बाजार में एक और दिलचस्प दबाव primary market से आ रहा है।
Abakkus AMC के Head of Equities-Alternates Aman Chowhan ने Reuters से कहा कि IPO और QIP गतिविधियों के कारण secondary market से भी flows divert हो रहे हैं, जिससे दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि crude का $100 की ओर बढ़ना domestic equities के sentiment को खराब करता है।
इसका अर्थ यह है कि बुधवार की गिरावट को किसी एक trigger से समझना अधूरा होगा। महंगा crude सबसे बड़ा macro concern है, लेकिन IT selling, foreign fund flows, rupee weakness और primary-market liquidity demand एक साथ काम कर रहे हैं।
Graphite India और Adani Enterprises ने गिरते बाजार में दिखाई मजबूती
व्यापक बिकवाली के बावजूद कुछ शेयरों ने बाजार की दिशा के उलट प्रदर्शन किया।
Graphite India का शेयर 13% से अधिक चढ़कर करीब आठ साल के उच्च स्तर तक पहुंचा। यह तेजी GrafTech International द्वारा minimum prices में 30% की बढ़ोतरी की घोषणा के बाद आई।
वहीं Adani Enterprises करीब 3.6% मजबूत हुआ। कंपनी ने अपनी airport unit में 5.54% तक हिस्सेदारी बेचकर करीब $1 billion जुटाने का समझौता किया है। निवेशकों के समूह में Temasek, BlackRock, Premji Invest और Alpha Wave शामिल हैं।
पिछले Session में भी गिरा था बाजार
बुधवार की कमजोरी अचानक शुरू नहीं हुई।
8 सितंबर को Sensex 555.23 अंक या 0.73% गिरकर 75,577.58 पर बंद हुआ था। Nifty 50 भी 144.05 अंक या 0.61% गिरकर 23,635.10 पर बंद हुआ।
इस तरह बुधवार की शुरुआती गिरावट ने बाजार पर पहले से मौजूद दबाव को और बढ़ाया।
अब बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण Trigger क्या है?
निकट अवधि में crude oil की दिशा भारतीय बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण variables में से एक रहेगी। Brent अगर $100 के आसपास बना रहता है या इससे ऊपर निकलता है, तो बाजार को inflation, rupee और corporate input costs से जुड़े जोखिमों को फिर से price-in करना पड़ सकता है।
साथ ही निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों के flows, अमेरिकी bond yields और IT sector में जारी बिकवाली पर रहेगी।
बुधवार की शुरुआती गिरावट का संदेश साफ है: भारतीय बाजार के लिए इस समय crude oil सिर्फ commodity price नहीं, बल्कि sentiment और macroeconomic risk दोनों का प्रमुख संकेतक बन गया है।
