विज्ञापन - शीर्ष बैनर
Read in English —JantaScope English
वित्त

Sensex 900 अंक से ज्यादा टूटा, Nifty 22,900 के नीचे; आखिर आज बाजार में इतनी तेज गिरावट क्यों?

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 28 सितंबर को शुरुआती कारोबार में तेज बिकवाली देखने को मिली। Sensex 900 अंक से अधिक नीचे चला गया, जबकि Nifty 22,900 के स्तर के नीचे कारोबार करता दिखा। कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा तेजी, अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कमजोर रुपये ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।

Sensex 900 अंक से ज्यादा टूटा, Nifty 22,900 के नीचे; आखिर आज बाजार में इतनी तेज गिरावट क्यों?
विज्ञापन

द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Moneycontrol, Business Standard, Times of India

शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को सप्ताह की शुरुआत तेज गिरावट के साथ की। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 851.82 अंक यानी 1.15% गिरकर 73,043.92 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 50 277.55 अंक यानी 1.20% गिरकर 22,863.05 पर कारोबार कर रहा था।

दिन आगे बढ़ने के साथ Sensex में गिरावट 900 अंक से अधिक हो गई। Moneycontrol की सुबह 10:07 बजे प्रकाशित रिपोर्ट में भी Sensex की गिरावट करीब 900 अंक और Nifty को 22,850 के आसपास बताया गया।

लेकिन बाजार की कमजोरी के पीछे कोई एक कारण नहीं है। तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक बॉन्ड बाजार और विदेशी निवेशकों की बिकवाली तक कई दबाव एक साथ काम कर रहे हैं।

1. कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल

भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा तात्कालिक दबाव कच्चे तेल की कीमतों में फिर आई तेजी है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच तेल की कीमतों में सोमवार को दोबारा तेजी आई। Business Standard के अनुसार शुरुआती अंतरराष्ट्रीय कारोबार में Brent crude $1.32 यानी 1.27% बढ़कर $105.64 प्रति बैरल और WTI crude $93.11 प्रति बैरल पर था।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। इसलिए लंबे समय तक महंगा तेल देश के आयात बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकता है। यही वजह है कि crude में तेज बदलाव को भारतीय इक्विटी बाजार बारीकी से देखता है।

2. अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई अनिश्चितता

तेल की तेजी के पीछे भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण है।

सोमवार की बाजार रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध तथा Strait of Hormuz को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद तेल की कीमतों में फिर तेजी देखी गई।

भारतीय बाजार के लिए यह मुद्दा केवल geopolitical risk तक सीमित नहीं है। Hormuz से जुड़े घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के बाजार पर अधिक संवेदनशील हो सकता है।

3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

Foreign Portfolio Investors यानी FPIs की बिकवाली भी बाजार पर दबाव बनाए हुए है।

25 सितंबर के provisional आंकड़ों के अनुसार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में ₹3,693.93 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, जबकि Domestic Institutional Investors ने लगभग ₹2,838.17 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की।

यह केवल एक दिन की कहानी नहीं है। Business Standard द्वारा उद्धृत NSDL आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय equities से लगभग $1.23 billion निकाल चुके थे। पिछले 12 महीनों में यह निकासी करीब $26.7 billion तक पहुंच गई थी।

लगातार विदेशी बिकवाली बाजार में उपलब्ध घरेलू institutional support के बावजूद प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बनाए रख सकती है।

4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने equities के लिए मुकाबला कठिन किया

भारतीय बाजार की कमजोरी का एक और महत्वपूर्ण कारण अमेरिका में ऊंची Treasury yields हैं।

शुक्रवार तक US 10-year Treasury yield करीब 5.17% पहुंच गई थी। Business Standard के अनुसार यह सितंबर 2025 के अंत के लगभग 4.15% स्तर से 102 basis points अधिक थी।

ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड emerging markets के लिए चुनौती पैदा करती है। जब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर अपेक्षाकृत अधिक रिटर्न मिलने लगता है, तो वैश्विक निवेशकों के लिए भारतीय equities जैसे risk assets में निवेश का relative attraction कम हो सकता है।

यही कारण है कि तेल के साथ-साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी fund flows भारतीय बाजार की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण संकेतक बने हुए हैं।

5. रुपया भी दबाव में

शेयर बाजार की गिरावट के साथ भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ।

Business Standard के अनुसार सोमवार के शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.89 पर खुला और गिरकर 95.95 तक पहुंच गया।

कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के sentiment को प्रभावित कर सकता है और आयात की लागत बढ़ा सकता है। जब कमजोर currency, महंगा crude और FPI outflows एक साथ दिखाई देते हैं, तो बाजार के लिए macroeconomic pressure बढ़ सकता है।

6. बाजार पहले से ही कमजोर दौर से गुजर रहा था

सोमवार की गिरावट को केवल एक दिन की घटना के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता।

पिछले शुक्रवार तक Nifty लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ था, जो 2020 के Covid crash के दौरान देखी गई सात सप्ताह की losing streak के बराबर है। शुक्रवार को Nifty 23,140.50 पर बंद हुआ और सप्ताह के दौरान लगभग 0.9% नीचे रहा।

हालांकि शुक्रवार को Sensex 315.2 अंक और Nifty 77.4 अंक चढ़े थे, वह तेजी पिछली तेज गिरावट के बाद value buying के बीच आई थी।

इसलिए सोमवार की बिकवाली ऐसे समय आई है जब बाजार का broader sentiment पहले से कमजोर और volatile बना हुआ था।

बाजार में किन सेक्टर्स पर दबाव?

शुरुआती कारोबार में कमजोरी केवल benchmark indices तक सीमित नहीं रही।

Business Standard की शुरुआती बाजार रिपोर्ट के मुताबिक NSE के सभी sectoral indices लाल निशान में थे, जबकि realty, metal और PSU bank शेयरों में अपेक्षाकृत अधिक कमजोरी देखने को मिली।

Broad-based selling यह संकेत देती है कि शुरुआती कमजोरी कुछ चुनिंदा heavyweight stocks तक सीमित नहीं थी।

निवेशकों को अब किन चीजों पर नजर रखनी चाहिए?

आने वाले कारोबार में बाजार की दिशा के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत Brent crude की चाल, अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, US Treasury yields, FPI flows और रुपये की स्थिति रहेंगे। बाजार विशेषज्ञों ने भी इस सप्ताह geopolitical developments, crude oil और bond yields को प्रमुख drivers के रूप में चिन्हित किया है।

इसके अलावा अमेरिकी employment और inflation data पर भी नजर रहेगी, क्योंकि इनसे Federal Reserve की आगे की interest-rate policy को लेकर बाजार की उम्मीदें प्रभावित हो सकती हैं।

निष्कर्ष

28 सितंबर की सुबह भारतीय शेयर बाजार की तेज गिरावट के पीछे किसी एक कंपनी या घरेलू घटना की बजाय कई global और macroeconomic दबावों का मेल दिखाई देता है।

कच्चे तेल में दोबारा उछाल और अमेरिका-ईरान तनाव सबसे तत्काल कारणों में हैं। इसके साथ ऊंची अमेरिकी Treasury yields, लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर रुपया पहले से दबाव में चल रहे भारतीय बाजार के sentiment को और कमजोर कर रहे हैं।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि Sensex की 900 अंक से अधिक गिरावट intraday movement है। बाजार बंद होने तक benchmark indices के स्तर और प्रतिशत बदलाव अलग हो सकते हैं।

स्रोत

इस रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए बाजार आंकड़े और संदर्भ Moneycontrol, Business Standard, Times of India तथा उपलब्ध institutional-flow data पर आधारित हैं। प्रमुख आंकड़ों को एक से अधिक वर्तमान बाजार रिपोर्टों से cross-check किया गया है।

साझा करें
विज्ञापन - मध्य लेख
विज्ञापन - नीचे