नई दिल्ली/मुंबई, 24 अगस्त 2026: भारतीय शेयर बाजार सोमवार को शुरुआती बढ़त कायम नहीं रख सका और कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। BSE Sensex 171.72 अंक यानी 0.22% गिरकर 77,369.11 पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 50 में 32.95 अंक यानी 0.14% की गिरावट आई और यह 24,219.05 पर बंद हुआ।
बाजार पर वित्तीय शेयरों की कमजोरी, वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता और ईरान से जुड़े नए अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर निवेशकों की सतर्कता का असर दिखाई दिया। हालांकि IT और मेटल शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों की गिरावट को कुछ हद तक सीमित रखा।
शुरुआती तेजी के बाद क्यों फिसला बाजार?
कारोबार की शुरुआत अपेक्षाकृत सकारात्मक रही, लेकिन दिन बढ़ने के साथ खरीदारी का उत्साह कमजोर पड़ा। निवेशकों का ध्यान अमेरिका की ओर से ईरान पर संभावित नए प्रतिबंधों और उनके वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले असर पर रहा। भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई हैं।
Nifty दिन के दौरान 24,144.30 तक नीचे गया था, लेकिन बाद में कुछ खरीदारी लौटने से सूचकांक 24,200 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।
बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों ने बढ़ाया दबाव
सोमवार के कारोबार में वित्तीय शेयर बाजार के प्रमुख कमजोर हिस्सों में रहे। Bajaj Finance, State Bank of India और अन्य चुनिंदा वित्तीय कंपनियों में गिरावट ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बनाया। Nifty Bank भी 236 अंक गिरकर लगभग 57,526 पर बंद हुआ।
वित्तीय कंपनियों का Nifty और Sensex में बड़ा भार होने के कारण इस सेक्टर की कमजोरी अक्सर पूरे बाजार की दिशा को प्रभावित करती है।
मेटल और IT शेयरों ने दिया सहारा
बाजार की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही। मेटल और IT सेक्टर के कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। Hindalco और JSW Steel जैसे मेटल शेयरों ने मजबूती दिखाई, जबकि HCL Technologies सहित कुछ IT शेयरों ने भी बाजार को सहारा दिया।
ब्रॉडर मार्केट में प्रदर्शन मिला-जुला रहा। अलग-अलग सूचकांकों में मिडकैप शेयर अपेक्षाकृत बेहतर टिके, जबकि स्मॉलकैप सेगमेंट में कमजोरी दिखाई दी।
कच्चे तेल की कीमतें भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहने पर देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम के कारण तेल आपूर्ति और खाड़ी क्षेत्र से होने वाले ऊर्जा व्यापार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी वजह से भारतीय शेयर बाजार के निवेशक कच्चे तेल की चाल पर करीबी नजर रख रहे हैं।
वैश्विक संकेत भी रहेंगे अहम
भारतीय बाजार के लिए आने वाले सत्रों में केवल घरेलू संकेत ही नहीं, बल्कि वैश्विक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे। निवेशक अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े संकेत, US Treasury yields, ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के विवरण और वैश्विक बाजारों की प्रतिक्रिया पर नजर रखेंगे।
इसके साथ NSE की मासिक F&O expiry के कारण भी बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
Nifty के लिए 24,200 का स्तर क्यों चर्चा में?
Nifty का 24,219 पर बंद होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बाजार विश्लेषकों की नजर 24,200–24,000 क्षेत्र पर संभावित निकट अवधि के सपोर्ट जोन के रूप में है। दूसरी तरफ लगभग 24,350 का स्तर तत्काल प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है। ये तकनीकी स्तर निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं और बाजार की दिशा वैश्विक तथा घरेलू घटनाओं के साथ बदल सकती है।
बाजार की गिरावट का निवेशकों के लिए क्या मतलब है?
172 अंकों की Sensex गिरावट प्रतिशत के लिहाज से सीमित थी। इसलिए इसे अपने आप में बड़े बाजार संकट का संकेत मानना उचित नहीं होगा। अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि बाजार शुरुआती तेजी को बनाए नहीं रख सका और वित्तीय शेयरों में बिकवाली दिखाई दी।
दूसरी ओर, मेटल और IT जैसे चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी बताती है कि निवेशक पूरी तरह जोखिम से बाहर नहीं निकल रहे हैं, बल्कि सेक्टर और कंपनियों के आधार पर निवेश का चयन कर रहे हैं।
आगे बाजार की दिशा पर कच्चे तेल, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, विदेशी बाजारों और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का असर पड़ सकता है। इसलिए अल्पावधि में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
