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SHANTI Act के ड्राफ्ट नियमों से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर, NTPC से लेकर Tata Power, Adani Power, L&T और BHEL तक को मिल सकता है फायदा

भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी निवेश के लिए अधिक व्यापक रूप से खोलने की दिशा में SHANTI Act के ड्राफ्ट नियम अहम कदम बन सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था से NTPC, Tata Power और Adani Power जैसी बिजली कंपनियों की Small Modular Reactor (SMR) योजनाओं को अवसर मिल सकता है, जबकि L&T, BHEL, Power Mech, MTAR Technologies और Walchandnagar Industries जैसी इंजीनियरिंग तथा उपकरण कंपनियों के लिए भी नया कारोबारी बाजार तैयार होने की संभावना है।

SHANTI Act के ड्राफ्ट नियमों से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर, NTPC से लेकर Tata Power, Adani Power, L&T और BHEL तक को मिल सकता है फायदा
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Business Today

क्या है नया घटनाक्रम?

भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। SHANTI Act, 2025 के तहत तैयार किए गए ड्राफ्ट नियम और रेगुलेशन सामने आने के बाद निजी कंपनियों की संभावित भूमिका को लेकर निवेशकों और ऊर्जा उद्योग की दिलचस्पी बढ़ गई है।

SHANTI Act निजी क्षेत्र को केंद्र सरकार से लाइसेंस और नियामक सुरक्षा मंजूरी हासिल करने के बाद परमाणु सुविधाएं स्थापित करने तथा परमाणु ऊर्जा से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देता है। सरकार ने इससे पहले भी स्पष्ट किया था कि कानून का उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के विकास और उसके सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना है।

ड्राफ्ट व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता प्रस्तावित सिंगल कम्पोजिट लाइसेंस है, जो परमाणु संयंत्र के निर्माण और संचालन से लेकर अंततः उसके डीकमीशनिंग तक के जीवनचक्र को कवर कर सकता है।

NTPC, Tata Power और Adani Power पर क्यों नजर?

ब्रोकरेज Elara के आकलन के अनुसार, नए नियमों से NTPC, Tata Power और Adani Power की प्रस्तावित SMR महत्वाकांक्षाओं को समर्थन मिल सकता है। Small Modular Reactors पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्रों की तुलना में छोटे आकार के रिएक्टर होते हैं और भविष्य की परमाणु क्षमता बढ़ाने की रणनीति में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है।

भारत की व्यापक ऊर्जा नीति भी उन्नत परमाणु तकनीकों, मॉड्यूलर रिएक्टरों और छोटे रिएक्टरों को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 GW तक पहुंचाना है।

ऐसे में जिन बिजली उत्पादक कंपनियों के पास बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट विकसित करने, पूंजी जुटाने और लंबे समय तक इंफ्रास्ट्रक्चर संचालित करने का अनुभव है, उनके लिए परमाणु ऊर्जा एक नया विकास क्षेत्र बन सकता है।

L&T, BHEL और Power Mech के लिए EPC अवसर

इस बदलाव का फायदा केवल बिजली उत्पादक कंपनियों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है।

Elara के मुताबिक प्रस्तावित ढांचा Larsen & Toubro (L&T), BHEL, Power Mech, MTAR Technologies और Walchandnagar Industries जैसी कंपनियों के लिए EPC, इंजीनियरिंग और उपकरण से जुड़े महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर सकता है।

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भारी इंजीनियरिंग, विशेष उपकरण, निर्माण, इंस्टॉलेशन और दीर्घकालिक रखरखाव की आवश्यकता होती है। इसलिए यदि भारत में परमाणु परियोजनाओं की संख्या तेजी से बढ़ती है, तो पूरी घरेलू सप्लाई चेन के लिए इसका असर महत्वपूर्ण हो सकता है।

विदेशी तकनीक के लिए भी तय होंगी शर्तें

ड्राफ्ट नियमों में विदेशी रिएक्टर तकनीक के इस्तेमाल को भी नियामकीय शर्तों से जोड़ा गया है। प्रस्तावित व्यवस्था में विदेशी रिएक्टरों के लिए मूल देश या स्वीकार्य देश से जरूरी प्रमाणन जैसी आवश्यकताएं शामिल हैं।

इससे संकेत मिलता है कि सरकार निजी और विदेशी भागीदारी को बढ़ाने के साथ-साथ तकनीकी विश्वसनीयता और परमाणु सुरक्षा से जुड़े मानकों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।

बीमा और वित्तीय सुरक्षा भी होगी अहम

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों की एंट्री के साथ सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक दुर्घटना की स्थिति में वित्तीय जिम्मेदारी है।

प्रस्तावित नियमों के तहत परमाणु संयंत्र संचालकों को परमाणु क्षति से जुड़ी देनदारी के लिए बीमा, वित्तीय सुरक्षा या दोनों का संयोजन बनाए रखना होगा। ऑपरेटर की देनदारी सीमा की समय-समय पर समीक्षा की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

SHANTI Act में अलग-अलग प्रकार की परमाणु सुविधाओं के लिए ऑपरेटर की देनदारी को श्रेणीबद्ध करने का प्रावधान पहले से मौजूद है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

भारत में बिजली की मांग आने वाले दशकों में तेजी से बढ़ने की संभावना है। औद्योगिक विस्तार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डेटा सेंटर और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्र लगातार अधिक बिजली की मांग पैदा कर रहे हैं।

सौर और पवन ऊर्जा देश के ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, लेकिन परमाणु ऊर्जा लगातार बिजली उपलब्ध कराने वाला कम-कार्बन स्रोत प्रदान कर सकती है। इसी वजह से सरकार 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता के लक्ष्य पर काम कर रही है।

निजी पूंजी और घरेलू इंजीनियरिंग क्षमताओं का इस्तेमाल इस विस्तार को तेज करने में मदद कर सकता है।

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?

शेयर बाजार के नजरिए से SHANTI Act का प्रभाव दो अलग हिस्सों में देखा जा सकता है।

पहला, NTPC, Tata Power और Adani Power जैसी कंपनियों को भविष्य में परमाणु बिजली उत्पादन के नए प्रोजेक्ट विकसित करने के अवसर मिल सकते हैं। दूसरा, L&T, BHEL, Power Mech और अन्य इंजीनियरिंग कंपनियों को परियोजनाओं के निर्माण तथा उपकरण आपूर्ति से ऑर्डर मिलने की संभावना बन सकती है।

हालांकि संभावित लाभ और वास्तविक कमाई के बीच अंतर रखना जरूरी है। ड्राफ्ट नियमों का अंतिम स्वरूप, परियोजनाओं की मंजूरी, वित्तपोषण, तकनीक, निर्माण अवधि और वास्तविक ऑर्डर आवंटन तय करेंगे कि किस कंपनी को कितना फायदा मिलता है।

संतुलित विश्लेषण

SHANTI Act भारत के परमाणु ऊर्जा उद्योग के लिए एक संरचनात्मक बदलाव साबित हो सकता है। निजी क्षेत्र की भागीदारी से पूंजी, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और परियोजना निष्पादन क्षमता बढ़ सकती है। इसके साथ घरेलू परमाणु सप्लाई चेन विकसित होने की संभावना भी मजबूत होती है।

दूसरी तरफ, परमाणु परियोजनाएं अत्यधिक पूंजी-प्रधान होती हैं और इनमें सुरक्षा, रेडियोधर्मी कचरा प्रबंधन, बीमा, वित्तीय देनदारी और लंबी निर्माण अवधि जैसी जटिलताएं रहती हैं। कानून की परमाणु दुर्घटना संबंधी देनदारी व्यवस्था कानूनी जांच का विषय भी रही है।

इसलिए कंपनियों को संभावित लाभार्थी कहना अभी भविष्य की कारोबारी संभावनाओं का आकलन है, निश्चित आय या ऑर्डर की गारंटी नहीं।


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