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शेयर बाजार में तीसरे दिन भी मायूसी! सेंसेक्स 460 अंक लुढ़का, निफ्टी 22,700 के नीचे; आखिर क्यों घबराए निवेशक?

Stock Market Today, 22 October 2026: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक गिरकर 73,249.39 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 123.70 अंक टूटकर 22,687.65 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और बड़ी कंपनियों के साथ मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली रही।

शेयर बाजार में तीसरे दिन भी मायूसी! सेंसेक्स 460 अंक लुढ़का, निफ्टी 22,700 के नीचे; आखिर क्यों घबराए निवेशक?
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: PTI , HDFC SKY, reuters.

सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी आई गिरावट?

गुरुवार, 22 अक्टूबर को शेयर बाजार की शुरुआत ही कमजोर रही। सुबह से निवेशकों का रुझान सतर्क दिखाई दिया और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते रहे।

दिन के दौरान सेंसेक्स एक समय 704.58 अंक गिरकर 73,005.11 के निचले स्तर तक पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी भी 22,554.85 तक फिसल गया। हालांकि, निचले स्तरों से कुछ शेयरों में खरीदारी के कारण बाजार ने आंशिक सुधार किया, लेकिन दिन के अंत तक गिरावट बरकरार रही।

सेंसेक्स में 0.62 प्रतिशत और निफ्टी में 0.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इससे पहले बुधवार, 21 अक्टूबर को भी सेंसेक्स 143.21 अंक गिरकर 73,709.69 और निफ्टी 77.60 अंक टूटकर 22,811.35 पर बंद हुआ था। लगातार कमजोर प्रदर्शन से स्पष्ट है कि निवेशक फिलहाल नए जोखिम लेने में सावधानी बरत रहे हैं।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बनीं सबसे बड़ी चिंता

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का एक प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। सऊदी अरब में नए हमलों की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता और बढ़ा दी। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा परिवहन, विमानन, पेंट, रसायन और अन्य उद्योगों की लागत पर भी असर पड़ सकता है। कंपनियों की लागत बढ़ने से उनके मुनाफे पर दबाव आने की आशंका रहती है। यही कारण है कि निवेशक तेल की कीमतों में तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण जोखिम मान रहे हैं।

वैश्विक तनाव ने बढ़ाई निवेशकों की बेचैनी

पश्चिम एशिया में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। गुरुवार को एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 3.52 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 3.03 प्रतिशत और जापान का निक्केई 2.40 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। चीन के शंघाई कंपोजिट सूचकांक में भी गिरावट रही। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस कमजोरी ने भारतीय निवेशकों की धारणा प्रभावित की। वैश्विक अनिश्चितता के समय निवेशक अक्सर जोखिम वाले निवेश को कम करने और अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं।

इन बड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा दबाव

गुरुवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े शेयरों में गिरावट ने सेंसेक्स और निफ्टी को नीचे खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर लगभग 2 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक का शेयर करीब 1.8 प्रतिशत गिरा। इनके अलावा नेस्ले इंडिया, एटरनल, ट्रेंट, पावर ग्रिड, एशियन पेंट्स और आईटीसी समेत कई कंपनियों के शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई।

हालांकि, बाजार की गिरावट के बीच सभी शेयरों में बिकवाली नहीं हुई। बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और सन फार्मास्युटिकल्स जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। कुछ चुनिंदा शेयरों में आई तेजी ने प्रमुख सूचकांकों को दिन के सबसे निचले स्तर से संभलने में मदद की।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली

बाजार की कमजोरी केवल सेंसेक्स और निफ्टी की बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं थी। रॉयटर्स के अनुसार, निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक लगभग 1.1 प्रतिशत और मिडकैप सूचकांक करीब 0.9 प्रतिशत गिरा। प्रमुख 16 सेक्टोरल सूचकांकों में से 13 नुकसान में रहे। विशेष रूप से आईटी, ऊर्जा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर दबाव दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप में अपेक्षाकृत ज्यादा गिरावट यह दर्शाती है कि छोटे तथा मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करने वाले बाजार प्रतिभागी भी सतर्क हो गए हैं।

महंगाई और ब्याज दरों को लेकर भी बढ़ी चिंता

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से देश में महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है। अगर ऊर्जा लागत लंबे समय तक अधिक रहती है, तो वस्तुओं की ढुलाई और उत्पादन खर्च भी बढ़ सकते हैं। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की हालिया बैठक के विवरण में महंगाई नियंत्रित करने के लिए आगे ब्याज दर बढ़ाने की संभावनाओं का संकेत मिला है। हालांकि, तेज मौद्रिक सख्ती से आर्थिक वृद्धि पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई गई। ब्याज दरें बढ़ने की स्थिति में कंपनियों के लिए कर्ज महंगा हो सकता है और उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता पर दबाव पड़ सकता है। इन संभावनाओं ने बाजार की अनिश्चितता को और बढ़ाया है।

विदेशी और घरेलू निवेशकों का क्या रहा रुख?

बाजार में लगातार गिरावट के बावजूद संस्थागत निवेशकों के आंकड़ों में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। एक्सचेंज के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 1,022.32 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी। इसी दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी 1,614.32 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।

इससे स्पष्ट होता है कि बाजार में कमजोरी के बीच संस्थागत निवेशकों की रुचि पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। हालांकि, इन आंकड़ों का संबंध बुधवार के कारोबार से है, इसलिए इन्हें गुरुवार की अंतिम निवेश प्रवाह स्थिति नहीं माना जाना चाहिए।

अब शेयर बाजार में आगे क्या होगा?

आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर कर सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव घटता है या बढ़ता है। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों का रुख और महंगाई से संबंधित संकेत भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया गिरावट के पीछे केवल वैश्विक जोखिम ही नहीं, बल्कि पिछले सप्ताह की तेजी के बाद मुनाफावसूली भी एक कारण हो सकती है।

22 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर यह दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और भू-राजनीतिक घटनाओं का घरेलू निवेशकों पर कितना गहरा प्रभाव पड़ सकता है। सेंसेक्स का 460 अंक टूटना और निफ्टी का 22,700 के नीचे बंद होना बाजार में बढ़ती सतर्कता का संकेत है। फिलहाल निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक तनाव और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर बनी रहेगी।

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