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Silver Price: अगस्त में चांदी करीब 20% उछली, $70 के करीब पहुंची कीमत; आखिर क्यों आई इतनी बड़ी तेजी?

अगस्त 2026 में चांदी की कीमतों में करीब 20% की जबरदस्त तेजी आई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Silver $70 प्रति औंस के करीब पहुंच गई। जानिए डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड बाजार, industrial demand और supply से जुड़े कौन से कारण इस rally को चला रहे हैं।

Silver Price: अगस्त में चांदी करीब 20% उछली, $70 के करीब पहुंची कीमत; आखिर क्यों आई इतनी बड़ी तेजी?
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Moneycontrol

नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026: वैश्विक कमोडिटी बाजार में चांदी (Silver) ने अगस्त में जोरदार वापसी की है। महीने के दौरान कीमतों में करीब 20% की तेजी देखने को मिली और 21 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी लगभग $70 प्रति औंस तक पहुंच गई। 26 अगस्त की शुरुआती COMEX ट्रेडिंग में भी कीमत करीब $69.71 प्रति औंस तक पहुंची, जो जून के मध्य के बाद का उच्च स्तर था।

इस तेजी ने चांदी को एक बार फिर precious-metals market के केंद्र में ला दिया है। कमजोर अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड बाजार में बदलाव, अमेरिकी ट्रेजरी की लंबी अवधि के बॉन्ड की buyback गतिविधियों, सुरक्षित निवेश की मांग और चांदी की औद्योगिक उपयोगिता से जुड़े supply-demand factors ने कीमतों को समर्थन दिया है।

अगस्त में करीब 20% कैसे चढ़ी चांदी?

जुलाई के अंत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब $57.59 प्रति औंस के आसपास थी। अगस्त के तीसरे सप्ताह तक कीमत $70 के स्तर को छू गई। इस तरह कुछ ही हफ्तों में चांदी ने लगभग पांचवां हिस्सा मूल्य बढ़ा लिया।

21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में COMEX silver futures ने करीब 6.89% की साप्ताहिक बढ़त दर्ज की थी। तीन सप्ताह की अवधि में बढ़त 20% से अधिक रही। हालांकि इस मजबूत rebound के बावजूद कीमत जनवरी 2026 में बने असाधारण उच्च स्तर से काफी नीचे बनी हुई है।

यानी मौजूदा तेजी को संदर्भ में देखना जरूरी है—Silver ने अगस्त में जबरदस्त प्रदर्शन किया है, लेकिन 2026 में इसकी यात्रा एकतरफा नहीं रही है।

अमेरिकी Treasury के फैसले ने क्यों बदला माहौल?

हालिया तेजी के महत्वपूर्ण triggers में अमेरिकी Treasury market की गतिविधियां शामिल हैं।

अमेरिकी Treasury की लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की buyback गतिविधियों को बढ़ाने से financial markets में liquidity और अमेरिकी fiscal outlook को लेकर नई चर्चा शुरू हुई। इसके बाद डॉलर पर दबाव और precious metals जैसे hard assets में दिलचस्पी बढ़ी।

सोना और चांदी दोनों को इस बदलाव का फायदा मिला, लेकिन silver ने अधिक तेज प्रतिक्रिया दिखाई।

यह चांदी की एक पुरानी विशेषता भी है—इसका बाजार सोने की तुलना में छोटा होने के कारण demand में अचानक बदलाव कीमतों में अपेक्षाकृत बड़ी हलचल पैदा कर सकता है।

कमजोर डॉलर भी बना Silver Rally का सहारा

चांदी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर में तय होती है। इसलिए डॉलर कमजोर होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए precious metals तुलनात्मक रूप से आकर्षक हो सकते हैं।

अगस्त में डॉलर की कमजोरी और अमेरिकी bond yields में आई नरमी ने bullion market को समर्थन दिया। इसी माहौल में सोना भी मजबूत हुआ और silver ने उससे भी अधिक आक्रामक तेजी दिखाई।

लेकिन यही संबंध उल्टी दिशा में भी काम कर सकता है। यदि डॉलर दोबारा मजबूत होता है या real yields तेजी से बढ़ते हैं, तो चांदी की तेजी पर दबाव आ सकता है।

चांदी सिर्फ कीमती धातु नहीं, Industrial Metal भी

Silver की कहानी सोने से अलग है।

सोना मुख्य रूप से investment, jewellery और central-bank reserves से जुड़ा होता है, जबकि चांदी का बड़ा उपयोग उद्योगों में भी होता है। Solar energy, electronics, electrical equipment और कई advanced technologies में silver की जरूरत पड़ती है।

यही दोहरी भूमिका चांदी को खास बनाती है।

आर्थिक और geopolitical uncertainty बढ़ने पर इसे precious metal के रूप में investment demand मिल सकती है, जबकि technology और renewable-energy industries के विस्तार से industrial demand का सहारा मिल सकता है।

मौजूदा rally के पीछे industrial demand और physical-market supply की स्थिति को भी महत्वपूर्ण factors के रूप में देखा जा रहा है।

भारत में चांदी की कीमतों पर क्या असर?

अंतरराष्ट्रीय बाजार की तेजी का असर भारतीय bullion market पर भी दिखाई दे रहा है।

26 अगस्त को भारत में चांदी की कीमतों में मजबूती दर्ज की गई। MCX पर silver में करीब ₹2,000 प्रति किलोग्राम की rebound देखने को मिली, जबकि निवेशक अमेरिकी inflation data और आगे की monetary-policy दिशा पर नजर बनाए हुए थे।

भारतीय कीमतों को केवल global silver price निर्धारित नहीं करती। रुपया-डॉलर exchange rate, import costs, taxes और स्थानीय physical demand भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।

इसलिए अंतरराष्ट्रीय चांदी स्थिर रहने के बावजूद रुपये में कमजोरी होने पर भारत में कीमत ऊंची रह सकती है।

निवेशकों के बीच Silver फिर क्यों चर्चा में?

करीब 20% की मासिक तेजी किसी भी प्रमुख commodity के लिए बड़ा movement है। यही वजह है कि silver में momentum-oriented investors की दिलचस्पी बढ़ी है।

लेकिन चांदी में तेजी जितनी आकर्षक दिखाई देती है, इसकी volatility भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

2026 इसका स्पष्ट उदाहरण है। जनवरी में COMEX silver ने $115 प्रति औंस से ऊपर का रिकॉर्ड स्तर देखा था, लेकिन बाद में कीमतों में भारी गिरावट आई। 25 अगस्त तक silver उस रिकॉर्ड से लगभग 40% नीचे थी, भले ही पिछले 52 सप्ताह के निचले स्तर से करीब 78% ऊपर आ चुकी थी।

इसलिए केवल अगस्त की तेजी देखकर यह मान लेना कि कीमत अब लगातार ऊपर ही जाएगी, जोखिमपूर्ण हो सकता है।

क्या Silver $100 तक जा सकती है?

$70 के आसपास पहुंचने के बाद बाजार में अगला बड़ा मनोवैज्ञानिक सवाल $100 प्रति औंस का है।

इस स्तर तक पहुंचने के लिए मौजूदा कीमत से एक और बड़ी तेजी की जरूरत होगी। इसका रास्ता अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, bond yields, global industrial demand, physical silver supply और geopolitical uncertainty जैसे कई factors पर निर्भर करेगा।

तेजी का momentum मजबूत है, लेकिन commodity markets में short-term forecasts बेहद अनिश्चित होते हैं। इसलिए $100 को निश्चित लक्ष्य की जगह एक संभावित scenario के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

तेजी जारी रहने के पक्ष में क्या हैं संकेत?

Silver के bullish case में कई factors दिखाई देते हैं। कमजोर डॉलर precious metals को समर्थन दे सकता है, fiscal और debt concerns hard assets की मांग बढ़ा सकते हैं और industrial applications दीर्घकालिक physical demand बनाए रख सकती हैं।

इसके अलावा यदि interest-rate expectations नरम होती हैं और real yields नीचे आते हैं तो बिना ब्याज देने वाली assets जैसे gold और silver अधिक आकर्षक हो सकती हैं।

अगस्त में इन्हीं macroeconomic factors के संयोजन ने precious metals को मजबूत समर्थन दिया है।

लेकिन गिरावट का जोखिम भी बड़ा

Silver की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी high volatility है।

तेज rally के बाद profit booking आ सकती है। अमेरिकी inflation अपेक्षा से ज्यादा रहने पर interest-rate expectations बदल सकती हैं। डॉलर मजबूत हो सकता है और industrial slowdown की स्थिति में physical demand पर भी असर पड़ सकता है।

इसके अलावा ऊंची कीमत खुद demand को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि manufacturers silver usage कम करने या alternative materials तलाशने की कोशिश कर सकते हैं।

इसलिए मौजूदा rally के बावजूद correction की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

भारत के निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है तेजी?

भारतीय निवेशकों के लिए silver अब केवल jewellery या physical bars तक सीमित asset नहीं है। Commodity futures और silver ETFs जैसे विकल्पों ने इसकी financial-market accessibility बढ़ाई है।

लेकिन निवेश का तरीका चाहे कोई भी हो, हालिया 20% rally के बाद risk management महत्वपूर्ण हो जाता है।

तेजी के दौरान केवल पिछले returns देखकर निवेश करना और volatility को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। निवेशकों के लिए अपनी risk capacity, investment horizon और portfolio allocation के आधार पर फैसला करना अधिक उचित है।

संतुलित विश्लेषण: Silver Rally मजबूत, लेकिन सावधानी जरूरी

अगस्त 2026 की silver rally के पीछे केवल speculative enthusiasm नहीं है। डॉलर, bond market, fiscal concerns, precious-metal demand और industrial fundamentals जैसे कई factors एक साथ काम कर रहे हैं।

यही कारण है कि मौजूदा तेजी को नजरअंदाज करना मुश्किल है।

फिर भी silver का 2026 का उतार-चढ़ाव यह भी दिखाता है कि यह asset कितनी तेजी से दिशा बदल सकती है। जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से बड़ी गिरावट और उसके बाद अगस्त की करीब 20% rally इसका स्पष्ट उदाहरण है।

इसलिए आगे का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि “Silver कितनी तेजी से बढ़ी?”, बल्कि यह है कि क्या macroeconomic और industrial fundamentals इस तेजी को लंबे समय तक बनाए रख पाएंगे?


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