विज्ञापन - शीर्ष बैनर
Read in English —JantaScope English
वित्त

सिर्फ ₹3,100 करोड़ जुटाने निकले 9 IPO, मिली ₹1.4 लाख करोड़ की Bids; निवेशकों में जबरदस्त होड़

भारत के primary market में निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी देखने को मिली है। एक ही सप्ताह में बंद हुए नौ IPO—छह mainboard और तीन SME issues—को कुल मिलाकर करीब ₹1.4 लाख करोड़ की bids मिलीं, जबकि कंपनियों का संयुक्त fundraising target लगभग ₹3,100 करोड़ था। यह अंतर बताता है कि चुनिंदा नए शेयरों के लिए investor demand कितनी तेज रही।

सिर्फ ₹3,100 करोड़ जुटाने निकले 9 IPO, मिली ₹1.4 लाख करोड़ की Bids; निवेशकों में जबरदस्त होड़
विज्ञापन

द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

भारतीय IPO market में निवेशकों की भूख ने एक बार फिर बड़ा संकेत दिया है।

शुक्रवार को समाप्त हुए नौ initial public offerings को कुल मिलाकर करीब ₹1.4 लाख करोड़ की bids मिलीं। इसके मुकाबले इन कंपनियों का संयुक्त रूप से बाजार से लगभग ₹3,100 करोड़ जुटाने का लक्ष्य था।

इन नौ offerings में छह mainboard IPO और तीन SME IPO शामिल थे।

NSE और BSE से उपलब्ध subscription data पर आधारित रिपोर्टिंग के अनुसार, कई issues में उपलब्ध shares की तुलना में कहीं अधिक applications और bids आईं।

Headline में ₹1.4 लाख करोड़ का आंकड़ा बड़ा जरूर है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कंपनियों ने इतनी रकम जुटा ली है। यह कुल bid value है। वास्तविक fundraising IPO के निर्धारित issue size तक ही सीमित रहती है।

₹3,100 करोड़ के Issues, Bids करीब ₹1.4 लाख करोड़

सप्ताह में बंद हुए सभी नौ IPO का combined fundraising target करीब ₹3,100 करोड़ था।

इसके मुकाबले investors की तरफ से करीब ₹1.4 लाख करोड़ की bids दर्ज की गईं।

सरल तुलना में bid value combined fundraising target की लगभग 45 गुना बैठती है।

हालांकि इसे सभी IPO का 45 गुना subscription ratio नहीं माना जाना चाहिए। प्रत्येक IPO का issue size, price band, investor category और subscription अलग-अलग होता है।

फिर भी aggregate figures primary market में मजबूत demand का स्पष्ट संकेत देते हैं।

छह Mainboard और तीन SME IPO रहे मैदान में

इस सप्ताह IPO activity केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही।

कुल नौ offerings में:

  • 6 Mainboard IPO

  • 3 SME IPO

शामिल थे।

Mainboard और SME issues में एक साथ मजबूत bidding दिखना महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों segments का investor profile, liquidity और risk characteristics अलग हो सकते हैं।

इसलिए ₹1.4 लाख करोड़ के aggregate figure को देखते समय केवल headline number नहीं, बल्कि individual IPO subscription और investor-category participation को भी समझना जरूरी है।

किन IPO ने खींचा सबसे ज्यादा ध्यान?

सप्ताह की primary-market activity में कुछ issues विशेष रूप से चर्चा में रहे।

बाजार रिपोर्टिंग में Rentomojo, Karamtara और LCC Projects जैसे नामों को मजबूत investor response वाले offerings में शामिल किया गया।

इन issues में aggressive bidding ने सप्ताह की कुल subscription value बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लेकिन किसी IPO का बहुत अधिक oversubscribed होना अपने आप में listing gain या लंबी अवधि के अच्छे return की गारंटी नहीं होता।

Listing के बाद share price valuation, earnings, business growth, market sentiment और broader equity-market conditions पर निर्भर करता है।

₹1.4 लाख करोड़ का मतलब कंपनियों ने इतनी रकम जुटाई?

नहीं।

IPO data में यह फर्क समझना महत्वपूर्ण है।

₹1.4 लाख करोड़ = Investors द्वारा लगाई गई कुल bids का मूल्य

जबकि:

करीब ₹3,100 करोड़ = इन नौ IPO के जरिए कंपनियों/बेचने वाले shareholders द्वारा जुटाई जाने वाली संयुक्त रकम

Oversubscription की स्थिति में एक ही उपलब्ध share के लिए कई investors bids लगा सकते हैं। इसी वजह से total bid value issue size से कई गुना ज्यादा हो सकती है।

अंततः allotment उपलब्ध shares के आधार पर ही होता है।

इतनी बड़ी Bidding क्या संकेत देती है?

इस तरह की subscription activity कम-से-कम तीन संकेत देती है।

पहला, primary market में investor participation मजबूत बनी हुई है।

दूसरा, investors नए listings में opportunities तलाश रहे हैं और आकर्षक माने जा रहे issues में बड़ी मात्रा में capital deploy करने को तैयार हैं।

तीसरा, strong demand आने वाली कंपनियों के लिए IPO route को आकर्षक बनाए रख सकती है।

लेकिन मजबूत aggregate bidding का अर्थ यह नहीं है कि बाजार में आने वाला हर IPO समान quality या valuation प्रदान करता है।

Retail Investors के लिए Oversubscription का क्या मतलब?

किसी IPO में बहुत ज्यादा subscription आने पर retail investors के लिए allotment मिलने की संभावना कम हो सकती है।

विशेष रूप से जब retail category में applications उपलब्ध lots से काफी ज्यादा हो जाती हैं, तब सभी applicants को shares मिलना संभव नहीं होता।

इसलिए investor के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि IPO कितनी बार subscribe हुआ।

Company की financial performance, valuation, debt, cash flow, promoters, industry outlook और IPO proceeds का उपयोग भी महत्वपूर्ण है।

SME IPO में अतिरिक्त सावधानी क्यों जरूरी?

SME IPO में मजबूत subscription headlines आकर्षक लग सकती हैं, लेकिन इस segment में liquidity और volatility का जोखिम mainboard stocks से अलग हो सकता है।

छोटी कंपनियों में relatively limited public float होने के कारण listing के बाद price movements तेज हो सकते हैं।

इसलिए केवल subscription numbers या market buzz के आधार पर investment decision लेना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

निवेशक को prospectus और company-specific fundamentals को प्राथमिकता देनी चाहिए।

भारतीय IPO Market में Momentum

यह सप्ताह भारत के primary market की व्यापक सक्रियता के बीच आया है।

IPO pipeline में कई कंपनियां मौजूद हैं और बड़े issues भी बाजार की ओर बढ़ रहे हैं। इसी समय National Stock Exchange यानी NSE का बहुप्रतीक्षित IPO भी चर्चा में है।

NSE ने अपना Updated Draft Red Herring Prospectus दाखिल किया है और उसका प्रस्ताव पूरी तरह Offer for Sale structure पर आधारित है।

इस तरह छोटे, मध्यम और संभावित mega issues की मौजूदगी से आने वाले दिनों में primary market पर निवेशकों की नजर बनी रहने की संभावना है।

Investors को अब किन चीजों पर नजर रखनी चाहिए?

₹1.4 लाख करोड़ की bidding headline भारतीय IPO market में उत्साह दिखाती है, लेकिन अगले महत्वपूर्ण संकेत इन कंपनियों के allotment और listing performance से आएंगे।

यदि heavily subscribed IPO listing के बाद मजबूत performance देते हैं, तो primary-market sentiment को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।

इसके विपरीत, कमजोर listings यह याद दिला सकती हैं कि subscription demand और secondary-market valuation दो अलग चीजें हैं।

इसलिए किसी IPO को केवल उसके oversubscription के आधार पर सफल investment मानना जल्दबाजी होगी।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि लगभग ₹3,100 करोड़ के संयुक्त issues के लिए करीब ₹1.4 लाख करोड़ की bids आना भारतीय primary market में मौजूद मजबूत investor appetite का उल्लेखनीय संकेत है।


साझा करें
विज्ञापन - मध्य लेख
विज्ञापन - नीचे