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Stock Market Crash: Sensex 700 अंक से ज्यादा टूटा, Nifty 23,300 के नीचे; ₹5 लाख करोड़ का Market Value साफ

भारतीय शेयर बाजार में 11 सितंबर को तेज बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में Sensex 700 अंक से ज्यादा टूट गया और Nifty 23,300 के नीचे पहुंच गया। बढ़ते crude oil prices, पश्चिम एशिया में तनाव, ऊंची bond yields, कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।

Stock Market Crash: Sensex 700 अंक से ज्यादा टूटा, Nifty 23,300 के नीचे; ₹5 लाख करोड़ का Market Value साफ
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को निवेशकों को बड़ा झटका लगा। कमजोर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच Sensex और Nifty दोनों करीब 1% तक टूट गए।

शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 708.56 अंक यानी 0.95% गिरकर 74,194.03 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 50 करीब 234.10 अंक यानी 1% टूटकर 23,243.70 पर आ गया।

बिकवाली इतनी व्यापक थी कि शुरुआती गिरावट में BSE-listed कंपनियों के कुल market capitalisation से करीब ₹5 लाख करोड़ कम हो गए। दिन में बाजार के और नीचे जाने के साथ कुछ रिपोर्टों में नुकसान का आंकड़ा करीब ₹6 लाख करोड़ तक पहुंचने की बात कही गई।

तीन महीने के निचले स्तर तक पहुंचे Benchmark Indices

कारोबार आगे बढ़ने के साथ दबाव बना रहा। सुबह करीब 9:35 बजे Nifty 50 0.92% गिरकर 23,261.70 और Sensex 0.84% कमजोर होकर 74,272.61 पर कारोबार कर रहे थे।

दोनों benchmark indices ने 11 जून के बाद अपना सबसे निचला स्तर छुआ।

गिरावट केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। 16 प्रमुख sectoral indices में से 15 लाल निशान में थे। Mid-cap index करीब 1.4% और small-cap index लगभग 1.2% नीचे था।

सबसे बड़ा दबाव Crude Oil से

भारतीय बाजार की चिंता का सबसे बड़ा कारण crude oil की कीमतों में तेज उछाल रहा।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महत्वपूर्ण shipping routes पर खतरे के बीच Brent crude $108 प्रति barrel के ऊपर पहुंच गया।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर imported crude पर निर्भर है। इसलिए तेल महंगा होने पर import bill, inflation, rupee और corporate costs पर दबाव बढ़ने का जोखिम रहता है।

यही वजह है कि crude में तेज तेजी भारतीय equities के लिए विशेष रूप से नकारात्मक मानी जाती है।

पश्चिम एशिया के तनाव ने बढ़ाई चिंता

बाजार की गिरावट के पीछे geopolitical uncertainty भी प्रमुख कारण रही।

Reuters के मुताबिक, Iran-aligned Houthi forces ने Yemen के port city Mocha पर नियंत्रण किया और Red Sea coast के रणनीतिक क्षेत्रों की ओर बढ़े। इसके साथ Strait of Hormuz के आसपास tanker attacks को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

इन घटनाक्रमों ने global oil supply और shipping routes को लेकर निवेशकों की आशंका बढ़ा दी।

Bond Yields ने Equity Investors पर बढ़ाया दबाव

तेल के साथ global bond yields की तेजी भी शेयर बाजार के लिए चुनौती बनी।

भारत के benchmark 10-year government bond की yield 7% के ऊपर पहुंच गई, जो तीन महीने से अधिक का उच्च स्तर था।

अमेरिकी 10-year Treasury yield भी 5% के करीब पहुंचने से global risk assets पर दबाव बढ़ा।

जब bond yields बढ़ती हैं, तो fixed-income assets तुलनात्मक रूप से अधिक आकर्षक हो सकते हैं। साथ ही कंपनियों के लिए borrowing cost बढ़ने की आशंका भी equity valuations को प्रभावित करती है।

Rupee भी हुआ कमजोर

शेयर बाजार के साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव दिखाई दिया।

रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 38 पैसे कमजोर होकर ₹95.46 तक पहुंचा।

Crude oil की ऊंची कीमतें और मजबूत डॉलर भारत जैसी oil-importing economy के लिए दोहरी चुनौती पैदा कर सकते हैं। महंगा डॉलर crude imports की रुपये में लागत और बढ़ा सकता है।

FII Selling भी बनी चिंता

विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी sentiment को कमजोर किया।

उपलब्ध provisional data के मुताबिक, FIIs ने पिछले कारोबारी सत्र में ₹438.24 करोड़ की भारतीय equities बेची थीं। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने ₹1,025.85 करोड़ की खरीदारी की।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली emerging markets पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है, खासकर जब global yields बढ़ रही हों।

Financial, Metal और Auto Stocks पर ज्यादा मार

Sell-off लगभग पूरे बाजार में फैला था, लेकिन कुछ sectors में गिरावट अधिक रही।

Financial stocks करीब 1.4%, auto stocks लगभग 1.3% और metal index करीब 2.8% नीचे था।

शुरुआती कारोबार में IndiGo, Tata Steel और Mahindra & Mahindra जैसे शेयर प्रमुख कमजोर stocks में शामिल रहे।

दूसरी तरफ, crude oil की तेजी से upstream oil producers को फायदा मिलने की उम्मीद के कारण ONGC और Oil India ने बाजार की गिरावट के विपरीत बढ़त दिखाई।

Asian Markets में भी बिकवाली

भारतीय बाजार की गिरावट अकेली घरेलू घटना नहीं थी। एशिया के कई प्रमुख बाजार भी दबाव में रहे।

Reuters के अनुसार, Japan को छोड़कर MSCI का व्यापक Asia-Pacific index करीब 1.8% गिरा।

इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की चिंता केवल भारतीय fundamentals तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया का संघर्ष, महंगा crude और बढ़ती global interest rates की आशंका international markets में risk appetite को प्रभावित कर रही है।

लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट की ओर बाजार

मौजूदा कमजोरी एक दिन की गिरावट तक सीमित नहीं है।

शुक्रवार सुबह के स्तर के आधार पर Nifty सप्ताह में करीब 2.7% और Sensex लगभग 2.9% नीचे थे। दोनों indices लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट दर्ज करने की दिशा में थे।

यह trend बताता है कि बाजार पहले से दबाव में था और crude तथा geopolitical tensions ने मौजूदा कमजोरी को और बढ़ा दिया।

निवेशकों को अब किन चीजों पर नजर रखनी चाहिए?

आगे बाजार की दिशा में तीन घटनाक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण होंगे—पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति, Brent crude की चाल और global bond yields।

इसके अलावा रुपये की दिशा तथा FII flows घरेलू बाजार के sentiment को प्रभावित कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹5 लाख करोड़ का नुकसान किसी एक निवेशक या वास्तविक नकद राशि के गायब होने का आंकड़ा नहीं है। यह BSE-listed कंपनियों के कुल market capitalisation में आई गिरावट को दर्शाता है। बाजार की कीमतें बदलने के साथ यह आंकड़ा लगातार बदल सकता है।


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