Rupee vs Dollar: महंगे तेल के बीच RBI के संभावित हस्तक्षेप से रुपये को सहारा, ₹94.4 के आसपास पहुंची भारतीय मुद्रा
तेल महंगा, फिर भी रुपया मजबूत
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय रुपया सोमवार, 7 सितंबर को डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।
रुपया शुरुआती कारोबार में लगभग ₹94.39 प्रति डॉलर पर पहुंचा, जबकि पिछला बंद स्तर करीब ₹94.49 था। बाद में यह ₹94.4 के आसपास बना रहा।
यह मजबूती ऐसे समय आई जब Brent crude करीब $97 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। सामान्य तौर पर महंगा कच्चा तेल भारत जैसी बड़ी oil-importing economy की मुद्रा पर दबाव बढ़ा सकता है।
लेकिन इस बार बाजार में एक दूसरी ताकत भी काम करती दिखाई दी—Reserve Bank of India की संभावित dollar selling.
क्या RBI ने Forex Market में हस्तक्षेप किया?
Reuters ने traders के हवाले से बताया कि RBI ने रुपये को सहारा देने के लिए forex market में संभावित रूप से हस्तक्षेप किया।
एक अन्य Reuters रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने सरकारी बैंकों के जरिए बाजार खुलने से पहले डॉलर बेचने का निर्देश दिया। इस तरह की dollar supply रुपये पर अचानक बढ़ने वाले depreciation pressure को सीमित कर सकती है।
हालांकि यहां महत्वपूर्ण अंतर है: RBI ने सोमवार की इन specific dollar sales की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है।
इसलिए इसे RBI का officially confirmed intervention कहने के बजाय traders द्वारा रिपोर्ट किया गया संभावित हस्तक्षेप कहना अधिक सटीक है।
पिछले दो सप्ताह से बढ़ी RBI की सक्रियता
सोमवार की गतिविधि अचानक सामने आई घटना नहीं है।
Market participants के मुताबिक पिछले दो सप्ताह से RBI forex market में अधिक सक्रिय दिखाई दे रहा है। इसी समर्थन और foreign-currency inflows ने रुपये को हाल के निचले स्तरों से उबरने में मदद की है।
पिछले सप्ताह रुपया लगभग 0.9% मजबूत हुआ, जो पांच सप्ताह में उसका सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन था।
3 सितंबर को रुपया ₹94.49 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो उस समय 25 जून के बाद सबसे मजबूत closing level था।
Brent crude $97 के करीब क्यों पहुंचा?
रुपये के लिए सबसे बड़ा बाहरी जोखिम फिलहाल crude oil है।
सोमवार को Brent crude में 1% से अधिक की तेजी के साथ कीमत लगभग $97.4 प्रति बैरल तक पहुंची। इसकी बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव और Strait of Hormuz के आसपास shipping तथा oil supply को लेकर चिंता है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा crude oil imports से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने पर भारतीय importers को अधिक डॉलर की जरूरत पड़ सकती है।
डॉलर की मांग बढ़ने पर, बाकी परिस्थितियां समान रहने पर, रुपये पर depreciation pressure बढ़ सकता है।
महंगा तेल रुपये के लिए क्यों है समस्या?
Crude oil और रुपये का संबंध केवल petrol-diesel की कीमतों तक सीमित नहीं है।
तेल महंगा होने पर भारत का import bill बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऊंची कीमतें trade और current-account dynamics को प्रभावित कर सकती हैं। Importers की dollar demand बढ़ने से foreign-exchange market में भी दबाव बन सकता है।
वित्त मंत्रालय ने भी इस वर्ष अपने आर्थिक आकलन में कहा था कि भारत की crude-import dependence के कारण West Asia में तनाव और shipping disruptions से बढ़ी oil prices trade balance तथा रुपये पर depreciation pressure डाल सकती हैं।
इसलिए RBI के लिए चुनौती केवल किसी एक exchange-rate level को बचाने की नहीं है, बल्कि geopolitical shocks के कारण currency market में पैदा होने वाली तेज volatility को नियंत्रित करने की भी है।
RBI के पास अब बड़ा Forex Reserve Buffer
इस बार केंद्रीय बैंक के पास intervention के लिए मजबूत reserve buffer भी मौजूद है।
RBI के आंकड़ों के मुताबिक 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का foreign-exchange reserve $11.475 billion बढ़कर रिकॉर्ड $740.803 billion पहुंच गया।
Foreign Currency Assets लगभग $600.67 billion और gold reserves करीब $116.409 billion रहे।
बड़े reserves RBI को जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर उपलब्ध कराने की क्षमता देते हैं।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि केंद्रीय बैंक लगातार किसी एक exchange rate को बनाए रखने के लिए unlimited dollars खर्च करेगा। Intervention की मात्रा और timing पर RBI आम तौर पर सार्वजनिक real-time commentary नहीं करता।
FCNR(B) inflows ने भी बढ़ाई ताकत
रुपये को केवल RBI की spot-market dollar sales से समर्थन नहीं मिल रहा।
Foreign Currency Non-Resident Bank यानी FCNR(B) deposits से आए बड़े foreign-currency inflows ने भी स्थिति बदली है।
Business Standard के मुताबिक RBI के special swap measures से 31 अगस्त तक $136.4 billion की foreign-currency inflows जुटाई गई थीं।
इस अतिरिक्त dollar liquidity ने RBI को ऐसे समय अधिक flexibility दी है जब crude oil और global bond yields भारतीय मुद्रा पर दबाव पैदा कर रहे हैं।
क्या RBI किसी खास Dollar-Rupee Level को बचा रहा है?
उपलब्ध जानकारी से ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि RBI ₹94, ₹95 या किसी अन्य निश्चित स्तर को आधिकारिक तौर पर defend कर रहा है।
Central bank की intervention strategy को market participants आम तौर पर excessive volatility रोकने के संदर्भ में देखते हैं।
BNP Paribas के FX strategist Chandresh Jain ने पिछले महीने Bloomberg को बताया था कि RBI का मुख्य उद्देश्य किसी दिशा में exchange-rate trajectory को मूल रूप से बदलने के बजाय movements की volatility और speed को कम करना है।
यही अंतर महत्वपूर्ण है।
रुपये को किसी निश्चित कीमत पर रखना और disorderly market movement को रोकना दो अलग-अलग नीतिगत लक्ष्य हैं।
अमेरिका की ब्याज दरें भी बन सकती हैं अगली चुनौती
Oil अकेला external risk नहीं है।
मजबूत अमेरिकी economic data के बाद Federal Reserve द्वारा interest rate बढ़ाने की संभावना भी बाजार की नजर में वापस आई है।
7 सितंबर की सुबह उपलब्ध market pricing के अनुसार Fed की 15-17 सितंबर की बैठक में rate hike की संभावना लगभग 58% मानी जा रही थी।
अगर अमेरिकी rates और yields ऊंचे रहते हैं, तो dollar assets अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इससे emerging-market currencies पर दबाव बढ़ने का जोखिम रहता है।
इस सप्ताह आने वाला U.S. inflation data इसलिए रुपये की अगली दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
आगे रुपये के लिए तीन चीजें महत्वपूर्ण
आने वाले दिनों में रुपये की दिशा मुख्य रूप से crude oil, RBI की market presence और U.S. monetary-policy expectations पर निर्भर रहने की संभावना है।
CR Forex Advisors के Managing Director Amit Pabari के मुताबिक रुपये ने सप्ताह की शुरुआत मजबूत स्थिति से की है और heavy FCNR-related dollar inflows उसे समर्थन दे रहे हैं। उनके आकलन में ₹94.00-₹94.20 महत्वपूर्ण support zone है, जबकि global headwinds बढ़ने पर USD/INR फिर ₹95 की ओर जा सकता है।
यह market forecast है, निश्चित exchange-rate prediction नहीं।
रुपये की मजबूती के पीछे सिर्फ RBI नहीं
सोमवार की कहानी को केवल “RBI ने डॉलर बेचा और रुपया मजबूत हो गया” तक सीमित करना अधूरा होगा।
वास्तविक तस्वीर में कई ताकतें एक साथ काम कर रही हैं।
एक तरफ लगभग $97 का Brent crude और संभावित Fed rate hike रुपये के खिलाफ दबाव बना रहे हैं। दूसरी तरफ FCNR(B) inflows, रिकॉर्ड forex reserves और RBI की संभावित intervention भारतीय मुद्रा को सहारा दे रहे हैं।
अभी तक RBI का defence प्रभावी दिखाई दे रहा है: तेल की तेज कीमतों के बावजूद रुपया ₹94.4 के आसपास बना हुआ है।
लेकिन यदि crude लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है या global dollar और मजबूत होता है, तो केंद्रीय बैंक के सामने संतुलन कठिन हो सकता है—उसे रुपये में तेज गिरावट को रोकने के साथ अपने विशाल लेकिन सीमित forex reserves का भी सावधानी से इस्तेमाल करना होगा।
