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UPI पर MDR लगने से क्या फिर Cash की ओर लौटेंगे लोग? RBI Deputy Governor ने दिया जवाब

UPI के कुछ बड़े merchant transactions पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने से क्या लोग दोबारा cash की ओर लौट सकते हैं? RBI Deputy Governor S. C. Murmu ने इस आशंका को शुरुआती चिंता बताते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि नए MDR framework से cash usage में कोई बड़ा बदलाव आएगा। नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।

UPI पर MDR लगने से क्या फिर Cash की ओर लौटेंगे लोग? RBI Deputy Governor ने दिया जवाब
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: JantaScope

नई दिल्ली/मुंबई:

भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI में होने जा रहे अहम बदलाव के बीच यह सवाल चर्चा में है कि कुछ merchant payments पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होने के बाद क्या दुकानदार और ग्राहक फिर से cash transactions को प्राथमिकता देने लगेंगे?

Reserve Bank of India के Deputy Governor S. C. Murmu का मानना है कि ऐसी आशंका के सच होने की संभावना कम है। उन्होंने कहा कि MDR के कारण cash usage बढ़ने की चिंता शुरुआती प्रतिक्रिया हो सकती है, क्योंकि यह digital payment ecosystem में लागत की भरपाई के तरीके में एक बड़ा बदलाव है।

Murmu ने कहा, “I don't think that apprehension will come true. It will be just initial apprehension.”

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि UPI पर MDR लागू होने से cash के इस्तेमाल पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।

15 अक्टूबर से बदलेंगे UPI के कुछ नियम

नया MDR framework 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।

सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के निर्धारित person-to-merchant (P2M) UPI transactions पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। ₹75,000 या उससे अधिक के transaction पर MDR अधिकतम ₹300 होगा।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI transaction पर charge लगने जा रहा है।

सरकार के मुताबिक:

  • सभी person-to-person (P2P) UPI transfers पूरी तरह free रहेंगे।

  • merchants को किए गए ₹2,000 तक के UPI payments पर MDR नहीं लगेगा।

  • P2PM category के तहत UPI QR से महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे merchants पर zero-MDR व्यवस्था जारी रहेगी।

  • सरकार का अनुमान है कि करीब 96% P2M transactions MDR से प्रभावित नहीं होंगे

  • customers से MDR वसूलने का प्रावधान नहीं है; यह merchant-payment ecosystem के भीतर लगने वाला शुल्क है।

ग्राहक नहीं, Merchant Ecosystem पर है MDR

इस बदलाव को समझने के लिए MDR और consumer fee के बीच अंतर महत्वपूर्ण है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई ऐसा transaction charge नहीं है जिसे UPI से भुगतान करने वाले व्यक्ति को देना होगा। यह merchant payment ecosystem में लगाया जाने वाला शुल्क है और इसे banks, payment service providers तथा UPI application providers सहित ecosystem participants के बीच बांटा जाएगा।

Banks को यह सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई है कि merchants MDR का बोझ customers पर न डालें। UPI app providers को platform fee या hidden charges लगाने की अनुमति नहीं है।

इसके बावजूद बाजार में एक चिंता यह है कि कुछ merchants अप्रत्यक्ष रूप से इस लागत को कीमतों में शामिल कर सकते हैं या बड़े payments के लिए cash को प्राथमिकता दे सकते हैं। यही वह आशंका है जिस पर RBI Deputy Governor ने प्रतिक्रिया दी है।

RBI Deputy Governor क्यों नहीं मानते कि Cash की बड़ी वापसी होगी?

Murmu के अनुसार, MDR व्यवस्था में बदलाव payment ecosystem की लागत recover करने से जुड़ा है।

उनका तर्क है कि digital payments ने transactions के लिए cash की भूमिका को काफी हद तक कम किया है, लेकिन cash का एक दूसरा उपयोग भी है—store of value, यानी संपत्ति या मूल्य को नकदी के रूप में रखने का माध्यम।

इसी वजह से बढ़ते digital transactions और circulation में मौजूद cash को सीधे विरोधाभासी रुझान मानना सही नहीं होगा।

UPI तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन Cash भी खत्म नहीं हुआ

भारत में UPI का scale इस बहस को और महत्वपूर्ण बनाता है।

अगस्त 2026 में UPI ने करीब 24.5 अरब transactions process किए, जिनकी कुल value लगभग ₹29.8 trillion रही। UPI की भारत के digital payments volume में हिस्सेदारी करीब 84% थी।

दूसरी ओर, RBI के आंकड़ों का हवाला देते हुए Business Standard ने बताया कि अगस्त 2026 के अंत में currency in circulation करीब ₹42.86 trillion थी, जबकि FY26 के अंत में यह ₹41.66 trillion थी।

यानी digital payments की तेज growth के बावजूद economy में physical currency की भूमिका समाप्त नहीं हुई है।

MDR की जरूरत क्यों बताई जा रही है?

सरकार और RBI का तर्क है कि UPI infrastructure को लंबे समय तक sustainable बनाए रखने के लिए payment ecosystem को revenue model की जरूरत है।

MDR से मिलने वाली राशि banks, payment service providers और UPI apps सहित ecosystem participants के बीच वितरित होगी। इसका उद्देश्य technology, infrastructure और acceptance network में आगे investment को support करना है।

सरकार ने यह भी कहा है कि कुल MDR collections के बराबर 5% राशि एक dedicated fund में दी जाएगी, जिसका उपयोग छोटे merchants के बीच UPI adoption बढ़ाने के लिए किया जाएगा।

आम UPI User के लिए क्या बदलेगा?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी दोस्त, रिश्तेदार या दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने पर नया MDR लागू नहीं होगा।

इसी तरह सामान्य merchant payments में ₹2,000 तक की transactions भी MDR-free रहेंगी। सरकार के मुताबिक केवल लगभग 4% merchant transactions ही नए MDR framework के दायरे में आएंगे।

इसलिए नए framework का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि eligible merchants अतिरिक्त लागत को कैसे absorb करते हैं और regulators यह सुनिश्चित करने में कितने प्रभावी रहते हैं कि यह लागत सीधे consumers पर न डाली जाए।

आगे क्या देखना महत्वपूर्ण होगा?

15 अक्टूबर से MDR लागू होने के बाद तीन चीजें खास तौर पर महत्वपूर्ण होंगी—बड़े UPI merchant payments के व्यवहार में बदलाव, merchants द्वारा MDR cost को absorb करने का तरीका और cash transactions में किसी वास्तविक बढ़ोतरी के संकेत।

फिलहाल RBI Deputy Governor का आकलन साफ है: MDR के कारण लोगों के बड़े पैमाने पर cash की ओर लौटने की आशंका को वह शुरुआती चिंता मानते हैं। वास्तविक तस्वीर implementation के बाद transaction data से अधिक स्पष्ट होगी।


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