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UPI से ₹2,000 से ज्यादा भेजने पर लगेगा चार्ज? सरकार ने साफ किया नया नियम, P2P Payment रहेगा Free

UPI पर नए MDR नियम को लेकर सरकार ने बड़ी सफाई दी है। दोस्तों और परिवार को किए जाने वाले P2P UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ्री रहेंगे। जानिए ₹2,000 की सीमा, 0.4% MDR और नए नियम किन merchant payments पर लागू होंगे।

UPI से ₹2,000 से ज्यादा भेजने पर लगेगा चार्ज? सरकार ने साफ किया नया नियम, P2P Payment रहेगा Free
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: JantaScope

UPI से ₹2,000 से ज्यादा भेजने पर क्या अब आपको फीस देनी होगी? हाल में UPI के नए Merchant Discount Rate यानी MDR ढांचे को लेकर बनी उलझन के बीच केंद्र सरकार ने इस सवाल पर स्पष्ट जवाब दिया है।

अगर आप किसी व्यक्ति को UPI के जरिए पैसे भेज रहे हैं—चाहे रकम ₹2,000 से कम हो या उससे कहीं ज्यादा—तो Person-to-Person (P2P) transaction पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

वित्त मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा कि नया UPI framework P2P transactions को प्रभावित नहीं करता और ऐसे लेन-देन transferred amount की परवाह किए बिना पूरी तरह free बने रहेंगे।

इसका मतलब है कि दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को सामान्य UPI transfer करने वाले ग्राहकों के लिए नया MDR कोई अतिरिक्त transaction fee नहीं बनता।

सबसे पहले समझें: आपके लिए वास्तव में क्या बदल रहा है?

UPI से जुड़े नए नियम को केवल “₹2,000 से ज्यादा के UPI payment पर charge” कहना अधूरा और भ्रामक हो सकता है।

असल अंतर transaction की रकम के साथ-साथ यह भी है कि पैसा किसे भेजा जा रहा है।

Person-to-Person (P2P):
एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को UPI transfer पूरी तरह free रहेगा। रकम की वजह से MDR लागू नहीं होगा।

Person-to-Merchant (P2M):
Merchant को किए जाने वाले कुछ eligible payments पर ₹2,000 से ऊपर MDR लागू होगा।

सरकार के अनुसार ₹2,000 तक के merchant payments MDR से मुक्त रहेंगे। छोटे merchants के लिए निर्धारित zero-MDR व्यवस्था भी जारी रहेगी। सरकार का अनुमान है कि लगभग 96% P2M transactions नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।

₹2,000 से ज्यादा दोस्त को भेजे तो क्या होगा?

मान लीजिए आप अपने दोस्त को UPI से ₹5,000 भेजते हैं।

यह P2P transaction है, इसलिए MDR = ₹0

आप परिवार के किसी सदस्य को ₹25,000 भेजते हैं।

यह भी P2P है, इसलिए MDR = ₹0

यहां ₹2,000 की सीमा लागू नहीं होती। सरकार ने साफ कहा है कि P2P transactions transferred amount की परवाह किए बिना free रहेंगे।

यह distinction इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ₹2,000 की सीमा को सभी UPI transactions पर लागू मान लेना गलत होगा।

फिर 0.4% MDR किस पर लगेगा?

सरकार के नए framework के अनुसार सामान्य eligible Person-to-Merchant यानी P2M transaction में ₹2,000 से अधिक payment पर 0.4% MDR लागू होगा।

₹75,000 या उससे अधिक के eligible transaction में MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति transaction रखी गई है।

उदाहरण के तौर पर:

₹3,000 के eligible merchant transaction पर 0.4% के हिसाब से MDR ₹12 होगा।

₹50,000 के eligible merchant transaction पर MDR ₹200 होगा।

₹1 लाख के eligible transaction में सामान्य 0.4% गणना ₹400 होती, लेकिन ₹300 cap के कारण MDR ₹300 तक सीमित रहेगा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR ग्राहक से वसूला जाने वाला UPI transaction charge नहीं है।

MDR कौन देगा—ग्राहक या दुकानदार?

वित्त मंत्रालय के मुताबिक MDR merchant-payment ecosystem के भीतर लगने वाला शुल्क है। यह सरकार या NPCI द्वारा ग्राहक से लिया जाने वाला tax या charge नहीं है।

सरकार ने कहा है कि banks को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि merchants MDR को customers पर pass न करें। UPI application providers को platform fee या hidden charge लगाने की अनुमति भी नहीं है।

इसलिए किसी eligible merchant को ₹5,000 का UPI payment करने का अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक के account से ₹5,020 कटेंगे।

0.4% MDR की आर्थिक जिम्मेदारी merchant-payment ecosystem की है, customer-facing UPI fee की नहीं।

छोटे दुकानदारों के लिए अलग सुरक्षा

नए framework का एक महत्वपूर्ण हिस्सा छोटे merchants को लेकर है।

सरकार के मुताबिक UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे merchants, जो Person-to-Person-Merchant (P2PM) category के अंतर्गत आते हैं, zero MDR का लाभ जारी रखेंगे। इसमें street vendors, neighbourhood shops और दूसरे छोटे कारोबार शामिल हो सकते हैं।

इसका एक महत्वपूर्ण परिणाम है:

₹2,000 से ज्यादा का merchant payment होने का मतलब अपने-आप यह नहीं है कि हर दुकानदार पर 0.4% MDR लगेगा।

Merchant की classification भी मायने रखेगी।

रेलवे, पेट्रोल, इंश्योरेंस जैसी categories में अलग नियम

कुछ essential या relatively thin-margin sectors को सामान्य 0.4% formula से अलग रखा गया है।

सरकार के मुताबिक ₹2,000 से ऊपर के transactions के लिए railways, telecommunications, insurance, fuel और agricultural inputs जैसी specified categories में ₹5 प्रति transaction का flat MDR होगा।

Capital-market payments के लिए भी अलग व्यवस्था है। Mutual funds, securities, stockbrokers और dealers से संबंधित eligible payments पर MDR 0.02% होगा और अधिकतम सीमा ₹300 प्रति transaction होगी।

लगभग 96% merchant transactions क्यों रहेंगे unaffected?

सरकार का कहना है कि data analysis के आधार पर MDR केवल लगभग 4% merchant transactions पर लागू होगा।

बाकी करीब 96% transactions या तो ₹2,000 की सीमा के भीतर हैं या small-merchants के zero-MDR framework में आते हैं।

यह संख्या नए framework को समझने में महत्वपूर्ण है। बदलाव का उद्देश्य हर UPI payment को chargeable बनाना नहीं, बल्कि चुनिंदा higher-value merchant transactions के जरिए payment ecosystem के लिए revenue mechanism तैयार करना है।

P2P को free रखना इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

UPI केवल दुकानों पर QR scan करने का माध्यम नहीं है। NPCI इसे person-to-person और merchant दोनों तरह के payments को support करने वाले payment system के रूप में परिभाषित करता है।

सरकार के नए clarification के मुताबिक P2P transactions कुल UPI transaction value के लगभग 70% हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह हिस्सा MDR framework से बाहर रहेगा।

इसलिए headline में केवल “UPI पर fee” कहना consumer के लिए पूरी तस्वीर नहीं बताता।

अधिक सटीक बात यह है:

UPI consumers और P2P transfers के लिए free बना हुआ है, जबकि चुनिंदा higher-value merchant transactions के लिए MDR व्यवस्था लाई गई है।

सरकार को MDR की जरूरत क्यों महसूस हुई?

UPI का infrastructure चलाने में banks, payment service providers और UPI apps सहित कई participants शामिल होते हैं।

सरकार का कहना है कि eligible merchant transactions से मिलने वाला MDR इन्हीं payment ecosystem participants में distribute होगा और इसका उद्देश्य UPI infrastructure के संचालन तथा विस्तार को support करना है।

यह मुद्दा पिछले कुछ समय से policy discussion का हिस्सा रहा है। मार्च 2026 में Standing Committee on Finance की 32वीं रिपोर्ट ने UPI ecosystem के लिए viable revenue mechanism की आवश्यकता पर जोर दिया था।

यानी नया framework केवल “UPI पर शुल्क” की कहानी नहीं है। इसके पीछे बड़ा policy सवाल यह है कि भारत एक विशाल real-time digital-payment network को financially sustainable कैसे बनाए, जबकि आम users और छोटे merchants के लिए इसकी accessibility भी बनी रहे।

छोटे merchants के लिए नया fund भी

सरकार ने यह भी कहा है कि कुल MDR collections के 5% के बराबर राशि एक dedicated fund में जाएगी।

इस fund का उद्देश्य छोटे merchants के बीच UPI acceptance बढ़ाना, sustained usage को support करना और छोटे कारोबारों को digital-payment ecosystem से जोड़ना है।

यह पहल महत्वपूर्ण होगी क्योंकि MDR से मिलने वाले नए revenue का एक हिस्सा वापस UPI adoption बढ़ाने में इस्तेमाल करने की योजना है।

क्या UPI पर monthly free limit आने वाली है?

सरकार के मौजूदा clarification के मुताबिक नहीं।

Individuals के लिए free UPI usage पर कोई monthly quota, volume restriction या tiered free cap घोषित नहीं किया गया है।

UPI की daily transaction limits अलग विषय हैं। सरकार के अनुसार banks और NPCI द्वारा निर्धारित daily limits—जो transaction category के आधार पर आम तौर पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक हो सकती हैं—security और risk-management safeguards हैं, fee लगाने की threshold नहीं।

इसलिए transaction limit और transaction charge को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।

JantaScope Analysis: इस बदलाव को समझने का सही तरीका

इस policy में तीन अलग layers दिखाई देती हैं।

पहली—consumer protection। P2P transactions को amount की परवाह किए बिना free रखकर सामान्य users को नए MDR से अलग रखा गया है।

दूसरी—small merchant protection। ₹2,000 तक के P2M transactions और qualifying small merchants को zero-MDR व्यवस्था में रखकर छोटे payments को बड़े स्तर पर unaffected रखने की कोशिश की गई है।

तीसरी—UPI sustainability। चुनिंदा higher-value merchant transactions से payment ecosystem के लिए revenue stream तैयार की जा रही है।

इस framework की वास्तविक परीक्षा implementation में होगी—खासकर यह देखने में कि merchant classification कितनी आसानी से समझी जाती है और MDR को ग्राहकों पर अलग surcharge के रूप में pass न करने वाली व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है।

फिलहाल consumer के लिए सबसे उपयोगी निष्कर्ष बहुत सीधा है:

किसी दोस्त, रिश्तेदार या दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने पर नया MDR लागू नहीं होगा—रकम ₹2,000 से ज्यादा होने पर भी P2P transfer free रहेगा।

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