जांच एजेंसी उन वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है, जिनमें समूह की भारतीय इकाइयों द्वारा कथित तौर पर अपनी पैरेंट कंपनी को भुगतान किया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, संबंधित पैरेंट कंपनी पर लगभग ₹74,000 करोड़ का कर्ज बताया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, ED यह जांच कर रही है कि विदेशी भुगतान और फंड ट्रांसफर FEMA के नियमों के अनुरूप थे या नहीं। छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले गए हैं।
हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की जांच जारी है और ED प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है।
यह मामला सामने आने के बाद कॉरपोरेट जगत और निवेशकों की नजरें जांच के अगले चरण पर टिकी हुई हैं।
