पांच महीने बाद FAR बॉन्ड में विदेशी निवेशकों की बिकवाली
भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों का रुख सितंबर में बदल गया है। Foreign Portfolio Investors ने Fully Accessible Route के तहत आने वाली सरकारी प्रतिभूतियों से महीने में अब तक ₹9,192 करोड़ निकाले हैं।
यह मार्च 2026 के बाद FAR बॉन्ड में पहली मासिक शुद्ध बिकवाली है। मार्च में विदेशी निवेशकों ने ₹17,688 करोड़ की निकासी की थी। इसके बाद अप्रैल से अगस्त के बीच लगातार पांच महीनों तक खरीदारी देखने को मिली थी।
अप्रैल से अगस्त के दौरान FPIs ने FAR प्रतिभूतियों में कुल ₹60,332 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की थी। हालांकि अगस्त में निवेश की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई थी और शुद्ध खरीद केवल ₹203 करोड़ रही।
जून में आया था रिकॉर्ड निवेश
2026 में FAR बॉन्ड में विदेशी निवेश का सबसे मजबूत महीना जून रहा, जब FPIs की शुद्ध खरीद ₹41,774 करोड़ तक पहुंच गई थी।
इस अवधि में सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों को अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण टैक्स बदलाव किया था। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी व्यवस्था के तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाले ब्याज और capital gains पर कर छूट दी गई। इससे पहले ब्याज आय पर 20% withholding tax लागू था। संबंधित अध्यादेश 5 जून को जारी किया गया था।
हालांकि जून के आंकड़े को पूरी तरह नई खरीदारी नहीं माना जा सकता। कुछ सरकारी प्रतिभूतियों को FAR श्रेणी में दोबारा वर्गीकृत किए जाने के कारण उन बॉन्ड में पहले से मौजूद विदेशी होल्डिंग भी FAR डेटा में शामिल हुई।
RBI ने भी बढ़ाया FAR का दायरा
Reserve Bank of India ने FAR के दायरे का विस्तार करते हुए नए जारी होने वाले 15 साल, 30 साल और 40 साल की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड को भी इस व्यवस्था में शामिल किया।
FAR व्यवस्था के तहत पात्र सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश पर सामान्य निवेश सीमा लागू नहीं होती। इसका उद्देश्य भारतीय सरकारी डेट मार्केट को विदेशी पूंजी के लिए अधिक सुलभ बनाना है।
इसके बावजूद जुलाई में FAR बॉन्ड में विदेशी निवेश घटकर ₹7,581 करोड़ रह गया और अगस्त में यह केवल ₹203 करोड़ था। सितंबर में प्रवाह अंततः नकारात्मक हो गया।
विदेशी निवेशकों ने सितंबर में बॉन्ड क्यों बेचे?
सितंबर की बिकवाली ऐसे समय हुई है जब वैश्विक वित्तीय बाजार कई दबावों का सामना कर रहे हैं।
ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड विकसित बाजारों की fixed-income securities को अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक बना सकती है। इसी समय पश्चिम एशिया में तनाव और ऊंची कच्चे तेल की कीमतों ने भारत जैसे तेल आयातक देश को लेकर महंगाई और बाहरी खाते से जुड़ी चिंताओं को बढ़ाया है।
Business Standard की रिपोर्ट के समय Brent crude $105 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ था। बाजार प्रतिभागियों ने ऊंचे अमेरिकी yields, महंगे crude और geopolitical uncertainty को emerging-market debt की मांग कमजोर होने के प्रमुख कारणों में गिना।
यह दबाव केवल बॉन्ड तक सीमित नहीं है। सितंबर के दौरान भारतीय शेयर बाजार से भी विदेशी पूंजी की निकासी दर्ज हुई है, जिससे व्यापक स्तर पर वैश्विक risk appetite में बदलाव का संकेत मिलता है।
Bloomberg Index से जुड़ी उम्मीदों को भी लगा झटका
भारतीय सरकारी बॉन्ड में पहले की विदेशी खरीदारी को वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में संभावित inclusion की उम्मीद से भी समर्थन मिला था।
Bloomberg Index Services Limited ने 31 जुलाई को FAR के तहत आने वाले भारतीय सरकारी बॉन्ड को Bloomberg Global Aggregate Index में शामिल करने पर अपना फैसला फिर टाल दिया। संस्था ने कहा था कि हाल के बाजार सुधारों को दैनिक बाजार प्रक्रियाओं में और स्थापित होने के लिए समय चाहिए।
यह इंडेक्स करीब $3 trillion के passive assets द्वारा ट्रैक किया जाता है। इसलिए इसमें भारतीय सरकारी बॉन्ड की संभावित एंट्री से भारत के डेट मार्केट में अतिरिक्त विदेशी मांग पैदा होने की उम्मीद की जा रही थी।
फैसला टलने से उस संभावित निकट-अवधि के demand catalyst को लेकर अनिश्चितता बढ़ी।
भारत के बॉन्ड बाजार के लिए इसका क्या मतलब है?
₹9,192 करोड़ की सितंबर निकासी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पांच महीने की लगातार विदेशी खरीदारी के बाद आया बदलाव है। लेकिन एक महीने की बिकवाली को भारतीय सरकारी बॉन्ड के प्रति दीर्घकालिक विदेशी रुचि खत्म होने के प्रमाण के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
अप्रैल-अगस्त के दौरान FAR बॉन्ड में ₹60,332 करोड़ की शुद्ध खरीदारी हुई थी, जो बताती है कि इससे पहले विदेशी निवेश मजबूत रहा था। सितंबर की बिकवाली का समय भी ऐसे वैश्विक माहौल से मेल खाता है जिसमें अमेरिकी yields और तेल की कीमतें ऊंची रही हैं।
दूसरी ओर, यदि वैश्विक yields लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तेल महंगा रहता है या रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड से मिलने वाला relative return कम आकर्षक हो सकता है।
आगे किन संकेतों पर रहेगी नजर?
आने वाले महीनों में विदेशी निवेश की दिशा के लिए US Treasury yields, crude oil prices, rupee movement, वैश्विक ब्याज दरों और geopolitical developments पर नजर रहेगी।
साथ ही, वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल करने से जुड़े फैसले और घरेलू नीतिगत बदलाव FAR बाजार में विदेशी निवेशकों की रुचि को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल सितंबर का डेटा यह दिखाता है कि भारतीय सरकारी बॉन्ड को अधिक आकर्षक बनाने वाले घरेलू सुधार मौजूद होने के बावजूद वैश्विक जोखिमों का प्रभाव विदेशी पूंजी के फैसलों पर भारी पड़ सकता है।
