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विरासत में मिले सोने पर Kolkata ITAT का अहम फैसला: पुराने रिकॉर्ड और पारिवारिक सबूत क्यों हो सकते हैं महत्वपूर्ण

Kolkata ITAT ने ₹1.56 करोड़ मूल्य की 3,233.11 ग्राम ज्वेलरी से जुड़े मामले में Revenue की अपील खारिज कर दी। Tribunal ने पुराने valuation reports, family lockers और मां के affidavit जैसे सबूतों को महत्वपूर्ण माना। हालांकि, यह फैसला inherited gold के लिए कोई blanket tax exemption नहीं देता।

विरासत में मिले सोने पर Kolkata ITAT का अहम फैसला: पुराने रिकॉर्ड और पारिवारिक सबूत क्यों हो सकते हैं महत्वपूर्णAI से बनाई गई प्रतीकात्मक छवि | JantaScope
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT), कोलकाता — DCIT बनाम Miraj Digvijay Shah, ITA No. 1078/KOL/2026; CBDT निर्देश संख्या 1916।

क्या है पूरा मामला?

अगर किसी परिवार में सोने के गहने कई पीढ़ियों से चले आ रहे हों, लेकिन दशकों पुराने purchase bills उपलब्ध न हों, तो Income Tax scrutiny के दौरान उनकी ownership कैसे साबित की जा सकती है?

Kolkata Bench of the Income Tax Appellate Tribunal के एक हालिया फैसले ने इसी सवाल पर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं।

मामला Miraj Digvijay Shah से जुड़ा है। 21 जून 2022 और उसके बाद उनके residential और business premises तथा परिवार के सदस्यों से जुड़े विभिन्न bank lockers पर Income Tax Act की Section 132 के तहत search and seizure action हुआ था।

ITAT के आदेश के अनुसार, search के दौरान कुल ₹14,68,97,402 की jewellery और bullion मिले थे। इनमें से ₹14,00,31,943 मूल्य की jewellery और bullion को source की explanation संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद seize किया गया था।

लेकिन Tribunal के सामने Revenue की अपील में एक प्रमुख विवाद 3,233.11 ग्राम gold ornaments, जिनकी कीमत ₹1,56,77,954 थी, को लेकर था।

Taxpayer का कहना था कि यह jewellery उसकी व्यक्तिगत unexplained संपत्ति नहीं थी, बल्कि उसके दिवंगत परिवार के सदस्यों और उसके पिता के HUF से संबंधित ancestral jewellery थी।


Jewellery कहां मिली, यह तथ्य क्यों महत्वपूर्ण बना?

इस मामले की एक महत्वपूर्ण बात यह थी कि विवादित 3,233.11 ग्राम jewellery taxpayer की व्यक्तिगत possession या केवल उसके नाम वाले bank locker से नहीं मिली थी।

ITAT के अनुसार, jewellery UCO Bank के उन lockers से मिली थी जो परिवार के कई सदस्यों से जुड़े हुए थे।

इनमें taxpayer की मां Rekha Digvijay Shah, दिवंगत पिता Digvijay Shah, दिवंगत दादा, भाई और अन्य रिश्तेदारों से जुड़े नाम शामिल थे।

Tribunal ने यह भी दर्ज किया कि taxpayer ने अपने Section 132(4) statement में कहा था कि उसने संबंधित UCO Bank lockers को पिछले पांच से सात वर्षों में operate नहीं किया था।

इस परिस्थिति ने उस धारणा पर सवाल खड़ा किया कि lockers से मिली पूरी disputed jewellery को सीधे taxpayer की व्यक्तिगत unexplained asset माना जाए।


1997 के Valuation Reports बने अहम सबूत

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में पुराने documentary records शामिल थे।

Taxpayer ने अपने दिवंगत परिवार के सदस्यों से संबंधित 1997 के valuation reports पेश किए।

CIT(A) ने पाया था कि इन पुराने valuation reports में दर्ज jewellery का description search के दौरान मिली jewellery के विवरण से correlate करता था।

Revenue ने इन valuation reports की सत्यता को अस्वीकार करने वाला पर्याप्त material पेश नहीं किया था।

इसके अतिरिक्त taxpayer की मां Rekha Shah का sworn affidavit भी ownership explanation के समर्थन में पेश किया गया था।

ITAT ने गौर किया कि Assessing Officer ने उस affidavit को गलत साबित नहीं किया था।


₹1.56 करोड़ की Jewellery पर क्या फैसला हुआ?

CIT(A) ने पहले ही 3,233.11 ग्राम, यानी ₹1,56,77,954 मूल्य के gold ornaments से जुड़ी addition को हटा दिया था।

Revenue इस relief को चुनौती देते हुए ITAT पहुंचा।

Kolkata ITAT ने उपलब्ध evidence देखने के बाद CIT(A) के निष्कर्ष में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और Revenue का यह ground dismiss कर दिया।

Tribunal ने माना कि 1997 के valuation reports, lockers से संबंधित facts और taxpayer की मां के affidavit जैसे evidence ownership और jewellery की lineage को support करते थे।

इसलिए मामले की परिस्थितियों में disputed ancestral jewellery को taxpayer की unexplained jewellery मानने का आधार स्वीकार नहीं किया गया।


मां की ₹64.93 लाख की Jewellery का मामला अलग क्यों था?

Case records में एक और jewellery holding का उल्लेख है।

यह 1,293.43 ग्राम jewellery थी, जिसकी कीमत ₹64,93,280 बताई गई थी और जिसका ownership taxpayer की मां Rekha Shah ने claim किया था।

उनकी ओर से 9 अप्रैल 1997 का valuation report और affidavit पेश किया गया था।

CIT(A) ने इस explanation को स्वीकार किया था।

महत्वपूर्ण बात यह है कि Revenue ने ITAT के सामने इस ₹64.93 लाख वाली jewellery को मिली relief को चुनौती नहीं दी थी।

इसलिए ₹1.56 करोड़ की ancestral jewellery पर ITAT के निर्णय और मां की ₹64.93 लाख की jewellery के treatment को एक ही contested issue समझना सही नहीं होगा।


क्या इसका मतलब है कि Inherited Gold हमेशा Tax-Free है?

नहीं।

इस फैसले को “विरासत में मिला सोना अब tax-free है” के रूप में पढ़ना भ्रामक होगा।

ITAT का फैसला इस particular case के facts और उपलब्ध evidence पर आधारित है।

मुद्दा केवल यह नहीं था कि taxpayer ने jewellery को “ancestral” बता दिया। उसके समर्थन में पुराने valuation reports, family locker records, jewellery descriptions का correlation और sworn affidavit जैसे documentary evidence मौजूद थे।

इसलिए केवल यह कहना कि “यह सोना मुझे माता-पिता या दादा-दादी से मिला था” हर tax scrutiny में अपने-आप पर्याप्त evidence नहीं माना जा सकता।


CBDT की 1994 Jewellery Instruction का क्या महत्व है?

Jewellery search मामलों में CBDT Instruction No. 1916 dated May 11, 1994 का अक्सर उल्लेख होता है।

इसके तहत search के दौरान सामान्यतः seizure न करने के लिए कुछ jewellery quantities बताई गई थीं:

  • विवाहित महिला — 500 ग्राम तक

  • अविवाहित महिला — 250 ग्राम तक

  • पुरुष सदस्य — 100 ग्राम तक

लेकिन इन quantities को automatic ownership certificate या प्रत्येक परिस्थिति में blanket income-tax exemption समझना उचित नहीं है।

इस मामले में भी फैसला केवल इन limits पर आधारित नहीं था। Documentary evidence और jewellery की actual ownership से जुड़े facts ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


परिवारों के लिए इस फैसले का असली सबक क्या है?

भारत में सोने के आभूषण अक्सर शादी, उपहार या inheritance के जरिए एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचते हैं। समस्या तब पैदा हो सकती है जब कई दशक बाद ownership साबित करनी पड़े और original purchase invoice उपलब्ध न हो।

ऐसे में documentary trail महत्वपूर्ण हो सकती है।

जहां उपलब्ध हों, परिवार पुराने jewellery valuation reports, purchase invoices, Will, inheritance या succession documents, gift-related records, wealth-tax/VDIS-era documents, family settlement records और अन्य ownership evidence सुरक्षित रख सकते हैं।

इस मामले में विशेष रूप से लगभग तीन दशक पुराने 1997 valuation reports का relevance सामने आया।


क्या सिर्फ Bank Locker में Gold होना Ownership साबित करता है?

जरूरी नहीं।

इस फैसले से एक और महत्वपूर्ण distinction सामने आता है।

Jewellery किसी locker से मिलने मात्र से यह निष्कर्ष हर मामले में स्वतः नहीं निकाला जा सकता कि पूरी jewellery उसी व्यक्ति की unexplained property है जिसके खिलाफ search proceedings चल रही हैं।

लेकिन इसका उल्टा भी सही नहीं है—family locker में jewellery मिलने भर से वह automatically ancestral या explained नहीं हो जाती।

Ownership का प्रश्न उपलब्ध evidence, locker holders, statements, historical records और मामले के दूसरे facts पर निर्भर कर सकता है।


Taxpayers के लिए Bottom Line

Kolkata ITAT का यह फैसला inherited और ancestral gold रखने वाले परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण practical lesson देता है: पुराने दस्तावेज बेकार समझकर फेंकना महंगा पड़ सकता है।

DCIT vs Miraj Digvijay Shah मामले में करीब ₹1.56 करोड़ की disputed ancestral jewellery के संबंध में 1997 के valuation reports, family lockers की ownership और मां के affidavit जैसे evidence महत्वपूर्ण साबित हुए।

लेकिन यह फैसला सभी inherited jewellery के लिए कोई नई blanket tax immunity नहीं बनाता।

हर मामला उसके facts और उपलब्ध evidence पर निर्भर करेगा। बड़ी मात्रा में inherited gold रखने वाले परिवारों के लिए ownership और inheritance का documentary trail बनाए रखना इसलिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

Source

Primary Source: Income Tax Appellate Tribunal (ITAT), Kolkata — DCIT, Central Circle 1(1), Kolkata vs Miraj Digvijay Shah, ITA No. 1078/KOL/2026, Assessment Year 2023-24, order pronounced on September 11, 2026.

Additional reference: CBDT Instruction No. 1916 dated May 11, 1994 and judicial precedents discussed in the ITAT order.

Disclaimer: यह लेख Kolkata ITAT के 11 सितंबर 2026 के आदेश में दर्ज facts और findings पर आधारित सामान्य जानकारी है। इसे व्यक्तिगत tax या legal advice नहीं माना जाना चाहिए।

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