कांग्रेस में पद पाने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रदर्शन-आधारित बनाने की एक नई कोशिश दिखाई दे रही है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने पिछले सप्ताह करीब 130 पार्टी नेताओं का इंटरव्यू लिया। यह कवायद संभावित AICC सचिवों और संगठन में नई जिम्मेदारियों के लिए नेताओं को परखने से जुड़ी है।
The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार इंटरव्यू की प्रक्रिया 7 सितंबर से शुरू हुई और नेताओं को लगभग 12 से 14 लोगों के समूहों में बुलाया गया। उनसे सिर्फ उनका राजनीतिक परिचय नहीं पूछा गया, बल्कि अलग-अलग परिस्थितियों में वे संगठन को कैसे संभालेंगे, इस पर भी सवाल किए गए।
इस exercise को अलग घटना की तरह देखना अधूरा होगा।
कांग्रेस पिछले कई महीनों से Sangathan Srijan Abhiyan के तहत जिला स्तर तक अपने संगठन को पुनर्गठित कर रही है। पार्टी के आधिकारिक रिकॉर्ड दिखाते हैं कि इसी अभियान के तहत अलग-अलग राज्यों में AICC observers नियुक्त किए गए और नए District Congress Committee presidents चुने जा रहे हैं।
अब वही performance-oriented approach AICC स्तर तक पहुंचती दिखाई दे रही है।
इंटरव्यू में नेताओं से आखिर पूछा क्या गया?
इस चयन प्रक्रिया का सबसे दिलचस्प हिस्सा इसका format है।
रिपोर्ट के मुताबिक उम्मीदवारों से पहले संक्षेप में अपना परिचय देने को कहा गया। इसके बाद उनके सामने उनके राजनीतिक और संगठनात्मक काम से जुड़े सवाल रखे गए।
एक उम्मीदवार ने The Indian Express को बताया कि उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें किसी विशेष राज्य का सचिव बनाया जाए तो वे अपनी जिम्मेदारी कैसे निभाएंगे और उस राज्य की समस्याओं से कैसे निपटेंगे। उम्मीदवारों से अपने राजनीतिक जीवन की उल्लेखनीय उपलब्धियां बताने को भी कहा गया।
सवाल केवल अतीत पर नहीं थे।
नेताओं को ऐसी hypothetical situations भी दी गईं जिनमें उन्हें बताना था कि कमजोर संगठन वाले राज्य में पार्टी को कैसे पुनर्जीवित किया जा सकता है। चुनाव वाले राज्यों से जुड़े संभावित challenges और Sangathan Srijan Abhiyan पर उनकी समझ भी परखी गई।
यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रक्रिया केवल वरिष्ठता या किसी बड़े नेता की recommendation पर निर्भर selection से अलग मॉडल की ओर संकेत करती है।
हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि कांग्रेस ने patronage या आंतरिक प्रभाव को पूरी तरह performance-based system से बदल दिया है। उपलब्ध जानकारी केवल यह दिखाती है कि इस दौर में structured interviews और performance review का इस्तेमाल किया गया है।
64 AICC सचिव—और करीब आधे बदलने की चर्चा
फेरबदल का संभावित आकार छोटा नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के पास फिलहाल 64 AICC सचिव हैं, जिनमें से अधिकांश अलग-अलग राज्यों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों से जुड़े हुए हैं। इनमें से करीब 50% को मौजूदा जिम्मेदारियों से हटाए जाने की संभावना बताई गई है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है।
50% बदलाव अभी आधिकारिक रूप से घोषित संख्या नहीं है।
कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर 16 सितंबर की सुबह तक ऐसा कोई अंतिम press release उपलब्ध नहीं था जिसमें 32 सचिवों को हटाने या 50% पद बदलने की औपचारिक घोषणा की गई हो। पार्टी के नवीनतम आधिकारिक releases में विभिन्न राज्यों की नियुक्तियां दिखाई देती हैं, लेकिन इस प्रस्तावित AICC secretary reshuffle की अंतिम सूची अभी सार्वजनिक नहीं है।
इसलिए इसे संभावित फेरबदल के रूप में रिपोर्ट करना अधिक सटीक है, तय फैसला मानकर नहीं।
यह सिर्फ 130 नेताओं की कहानी नहीं है
इस घटनाक्रम का व्यापक संदर्भ कांग्रेस का Sangathan Srijan Abhiyan है।
पार्टी के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि यह अभियान पहले से कई राज्यों में चल रहा है।
उदाहरण के लिए, मार्च 2026 में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महाराष्ट्र, दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में DCC अध्यक्षों के चयन के लिए AICC observers नियुक्त किए थे। जुलाई में Karnataka, Andaman & Nicobar सहित दूसरे क्षेत्रों के लिए भी इसी प्रक्रिया के तहत observers लगाए गए।
जनवरी 2026 में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति करते समय पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कहा था कि observers ने जिलों में विस्तृत समीक्षा की, कार्यकर्ताओं और अन्य stakeholders से बातचीत की और reports जमा कीं। उसके बाद observers तथा वरिष्ठ नेताओं के साथ one-to-one discussions हुए।
यानी 130 नेताओं के interviews अचानक शुरू हुआ प्रयोग नहीं हैं।
वे पहले से चल रहे संगठनात्मक बदलाव के अगले चरण के रूप में अधिक स्पष्ट दिखाई देते हैं।
राहुल गांधी पहले ही दे चुके हैं ‘performance’ का संकेत
इस कहानी को समझने के लिए फरवरी 2026 की एक घटना महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली में Sangathan Srijan Abhiyan के तहत आयोजित नए जिला कांग्रेस अध्यक्षों के training programme में राहुल गांधी ने जमीन पर performance और accountability पर जोर दिया था।
The Tribune के अनुसार उन्होंने जिला अध्यक्षों से कहा:
“Perform or step aside.”
उन्होंने उन्हें अपने जिलों के लिए जवाबदेह रहने और जमीन पर काम करने पर जोर दिया था।
अप्रैल में धर्मशाला में जिला अध्यक्षों के एक अन्य workshop में राहुल ने संगठनात्मक सुधार और grassroots engagement बढ़ाने की बात की। कांग्रेस के अपने विवरण के अनुसार उन्होंने factionalism से दूर रहने, जनता के मुद्दों पर काम करने और अच्छे district-level workers के लिए ऊपर आने का रास्ता बनाने की बात कही।
सितंबर के interviews इसलिए उसी broader message के अनुरूप दिखाई देते हैं।
कांग्रेस जिला अध्यक्षों पर इतना जोर क्यों दे रही है?
भारतीय राष्ट्रीय दलों में दिल्ली स्थित नेतृत्व महत्वपूर्ण होता है, लेकिन चुनावी संगठन वास्तव में नीचे की कई परतों पर निर्भर करता है।
District Congress Committee ऐसी ही एक महत्वपूर्ण organisational layer है।
यहीं से स्थानीय कार्यकर्ताओं का coordination, राजनीतिक कार्यक्रम, booth-level mobilisation और प्रदेश नेतृत्व के साथ संपर्क जैसी गतिविधियां जुड़ती हैं।
कांग्रेस की आधिकारिक नियुक्तियों से पता चलता है कि Sangathan Srijan Abhiyan का बड़ा हिस्सा इन्हीं district organisations को पुनर्गठित करने पर केंद्रित रहा है।
दिल्ली में मई 2026 में पार्टी ने 14 District Congress Committee presidents नियुक्त किए थे। उस प्रक्रिया में भी AICC observers द्वारा district-level review, स्थानीय पदाधिकारियों से बातचीत और senior leaders के साथ consultations शामिल थे।
यह बताता है कि पार्टी केवल शीर्ष पदों में बदलाव नहीं कर रही, बल्कि organisational pipeline को district से AICC तक जोड़ने का प्रयास कर रही है।
नई प्रक्रिया का असली परीक्षण नियुक्ति के बाद होगा
Structured interviews अपने-आप संगठनात्मक सुधार साबित नहीं करते।
किसी नेता से यह पूछना कि वह कमजोर राज्य में कांग्रेस को कैसे मजबूत करेगा एक बात है; उसे जिम्मेदारी मिलने के बाद measurable organisational improvement दिखाना दूसरी।
यही इस पूरे प्रयोग का सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण होगा।
अगर पार्टी वास्तव में performance को महत्व देना चाहती है तो उसे यह देखना होगा कि नए पदाधिकारी स्थानीय संगठन का विस्तार करते हैं या नहीं, निष्क्रिय इकाइयों को सक्रिय करते हैं या नहीं, कार्यकर्ताओं के बीच coordination सुधारते हैं या नहीं और चुनावों के बीच भी जमीन पर मौजूद रहते हैं या नहीं।
फिलहाल उपलब्ध evidence यह बताता है कि selection process अधिक structured हो रही है।
यह अभी साबित नहीं करता कि उससे चुनावी performance बेहतर होगी।
पुराने नेताओं की जगह केवल युवा चेहरे आएंगे?
इसे भी अभी स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
130 नेताओं के interviews और संभावित 50% बदलाव से यह निष्कर्ष निकालना आकर्षक होगा कि कांग्रेस पुराने नेताओं को हटाकर बड़े पैमाने पर युवा leadership ला रही है।
लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग में ऐसा कोई आधिकारिक age criterion सामने नहीं आया है।
Selection में राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक performance, राज्य-विशिष्ट समझ और भविष्य की strategy जैसे पहलुओं पर जोर दिए जाने की जानकारी है।
इसलिए इसे फिलहाल generational purge या केवल “young vs old” reshuffle के रूप में प्रस्तुत करना evidence से आगे जाना होगा।
एक और महत्वपूर्ण पहलू: पद पाने से ज्यादा जवाबदेही
कांग्रेस की इस प्रक्रिया में एक recurring theme दिखाई देती है—organisational posts को permanent entitlement की तरह न देखना।
फरवरी में राहुल गांधी का “perform or step aside” संदेश और अब मौजूदा AICC सचिवों की performance review इसी दिशा की दो घटनाएं हैं।
अगर इस सिद्धांत को लगातार लागू किया जाता है तो पार्टी के internal organisation में एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है: पद मिलने के बाद भी performance evaluation जारी रहना।
लेकिन यहां “अगर” महत्वपूर्ण है।
यह जानने के लिए भविष्य की नियुक्तियों और subsequent reviews को देखना होगा कि क्या खराब performance वास्तव में पद गंवाने का कारण बनती है या यह प्रक्रिया इस reshuffle तक सीमित रहती है।
प्रियंका गांधी की भूमिका भी ध्यान देने योग्य है
इस exercise में प्रियंका गांधी वाड्रा की सीधी भागीदारी भी महत्वपूर्ण organisational detail है।
रिपोर्टों के अनुसार राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल के साथ उन्होंने भी उम्मीदवारों को interview किया।
इसका अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि औपचारिक नियुक्ति का अधिकार इन तीन नेताओं के पास ही है।
कांग्रेस की आधिकारिक organisational appointments में अंतिम approval आमतौर पर Congress President Mallikarjun Kharge के नाम से जारी होता है। हाल के DCC appointments में भी पार्टी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रस्तावों को मंजूरी दी।
इसलिए प्रक्रिया को सही तरीके से समझने के लिए vetting/recommendation और formal appointment के बीच अंतर रखना जरूरी है।
अब आगे क्या?
सबसे महत्वपूर्ण अगला संकेत कांग्रेस की औपचारिक नियुक्ति सूची होगी।
उससे चार बातें स्पष्ट हो सकती हैं: मौजूदा 64 सचिवों में वास्तव में कितने बदले गए, किन नेताओं को नई जिम्मेदारी मिली, क्या नए चेहरों को महत्वपूर्ण राज्यों में भेजा गया और क्या performance review भविष्य में नियमित प्रक्रिया बनती है।
अभी तक उपलब्ध जानकारी से इतना स्पष्ट है कि कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा को district-level appointments से आगे AICC पदों तक ले जा रही है।
लेकिन 130 interviews का होना confirmed development है; उनसे निकलने वाला अंतिम reshuffle अभी पूरी तरह confirmed outcome नहीं है।
यही इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण factual distinction है।
JantaScope Analysis: असली बदलाव नामों में नहीं, selection model में हो सकता है
इस कहानी को केवल “कौन हटेगा और कौन आएगा” के नजरिए से देखना शायद इसकी बड़ी तस्वीर को छोटा कर देगा।
कांग्रेस की अपनी 2026 की organisational records में एक pattern दिखाई देता है: observers भेजना, district-level feedback लेना, reports बनाना, interviews करना, training देना और performance पर जोर देना।
अब करीब 130 नेताओं की vetting उसी प्रक्रिया को केंद्रीय संगठन तक ले जाती दिखाई देती है।
इसलिए वास्तविक सवाल यह नहीं है कि 32 सचिव हटेंगे या 30।
अधिक महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या कांग्रेस एक ऐसा internal system बना पाती है जिसमें selection → responsibility → measurable performance → review लगातार चलता रहे।
अभी उस सवाल का जवाब उपलब्ध नहीं है।
आने वाली नियुक्तियां उसका पहला संकेत देंगी।
क्या पुष्टि हुई, और क्या अभी पुष्टि नहीं हुई?
पुष्टि हुई: राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और के.सी. वेणुगोपाल ने करीब 130 नेताओं को vet/interview किया। उम्मीदवारों से उनके पिछले काम, संगठनात्मक योगदान और विभिन्न राज्यों में पार्टी को मजबूत करने की strategy से जुड़े सवाल किए गए।
पुष्टि हुई: कांग्रेस का Sangathan Srijan Abhiyan वास्तविक और पहले से जारी organisational programme है। कांग्रेस के अपने records में 2025-26 से कई राज्यों में इसके तहत observers और DCC presidents की नियुक्तियां दर्ज हैं।
रिपोर्टेड, लेकिन अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं: मौजूदा 64 AICC सचिवों में करीब 50% को बदले जाने की संभावना। कांग्रेस ने अभी अंतिम reshuffle list जारी नहीं की है।
पुष्टि नहीं हुई: ठीक 32 सचिव हटेंगे, reshuffle की अंतिम तारीख क्या होगी, किन 130 उम्मीदवारों में से किसे पद मिलेगा, या सभी interviews के लिए एक औपचारिक scoring system इस्तेमाल किया गया था। इन बातों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
