2027 चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा फैसला
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को पंजाब का नया AICC General Secretary in-charge नियुक्त किया है।
पायलट ने इस पद पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह ली है। बघेल को अब असम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा मंजूर किए गए ये बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है जब पंजाब कांग्रेस पिछले कुछ महीनों से आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के पास तैयारी का सीमित समय बचा है।
पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती—पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी
सचिन पायलट की नई जिम्मेदारी केवल चुनावी रणनीति तैयार करने तक सीमित नहीं होगी। उनके सामने पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग शक्ति केंद्रों के बीच तालमेल बनाने की होगी।
1 जुलाई को कांग्रेस नेतृत्व ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर बनाए रखने और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को Campaign Committee का चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया था।
इसके बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए। चन्नी समर्थक नेताओं के एक वर्ग ने वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का विरोध किया और नेतृत्व में बदलाव की मांग की।
पार्टी कार्यक्रमों के दौरान भी यह खींचतान दिखाई दी। ‘Har Booth, Congress Mazboot’ अभियान के दौरान चन्नी समर्थकों की ओर से “Channi lyao, Punjab bachao” के नारे लगाए गए। कुछ मौकों पर अलग-अलग खेमों के समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
भूपेश बघेल की जगह पायलट को क्यों मिली जिम्मेदारी?
भूपेश बघेल को पंजाब कांग्रेस के अंदर चल रहे विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने राज्य के नेताओं से बातचीत की और संगठन के भीतर समझौता कराने की कोशिश की, लेकिन मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए।
जुलाई में बघेल ने करीब 92 नेताओं से विचार-विमर्श के आधार पर पार्टी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल को रिपोर्ट भी सौंपी थी।
इसके बावजूद विवाद जारी रहा। बघेल के पंजाब दौरे के दौरान कुछ स्थानों पर “Baghel Go Back” जैसे नारे और पोस्टर भी सामने आए।
कांग्रेस के भीतर के सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया कि बघेल पर राजा वड़िंग के पक्ष में झुकाव रखने के आरोप भी लगाए गए थे। यह पार्टी का आधिकारिक निष्कर्ष नहीं है, बल्कि कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी है।
इसी पृष्ठभूमि में पायलट की नियुक्ति को ऐसे नेता को जिम्मेदारी देने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है जो पंजाब के मौजूदा खेमों से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है।
पायलट की नियुक्ति पर चन्नी और वड़िंग दोनों की सकारात्मक प्रतिक्रिया
दिलचस्प बात यह है कि पंजाब कांग्रेस के प्रमुख खेमों ने सचिन पायलट की नियुक्ति का स्वागत किया है।
चरणजीत सिंह चन्नी ने पायलट का स्वागत करते हुए इस फैसले के लिए कांग्रेस हाईकमान का धन्यवाद किया।
वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने भी पायलट को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि उनकी ऊर्जा और सक्रियता चुनाव से पहले संगठन को मजबूती देगी।
वड़िंग ने साथ ही भूपेश बघेल के कार्यकाल की सराहना करते हुए उन्हें अपना “guide and mentor” बताया।
पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी पायलट की नियुक्ति का स्वागत किया है।
पायलट के लिए चुनावी रणनीति से पहले संगठन संभालना जरूरी
2027 की चुनावी लड़ाई में कांग्रेस के सामने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को चुनौती देने का लक्ष्य है, लेकिन इसके लिए पार्टी को पहले अपने संगठन के भीतर एक साझा रणनीति बनानी होगी।
पायलट के लिए उम्मीदवारों के चयन, प्रदेश नेतृत्व और चुनाव प्रचार की दिशा तय करने से पहले अलग-अलग खेमों को एक मंच पर लाना महत्वपूर्ण होगा।
यह चुनौती इसलिए भी अहम है क्योंकि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भी कांग्रेस आंतरिक नेतृत्व विवाद से प्रभावित हुई थी। उस चुनाव में पार्टी सत्ता गंवा बैठी और आम आदमी पार्टी ने भारी बहुमत हासिल किया था।
इसलिए इस बार कांग्रेस नेतृत्व के लिए चुनावी अभियान शुरू होने से पहले आंतरिक मतभेदों को नियंत्रित करना रणनीतिक प्राथमिकता बन गया है।
राहुल गांधी की प्रस्तावित यात्रा पर भी नजर
कांग्रेस पंजाब में संगठन को सक्रिय करने के लिए राहुल गांधी की प्रस्तावित बस यात्रा पर भी काम कर रही है।
भूपेश बघेल ने इससे पहले कहा था कि यात्रा के लिए लगभग 15 सितंबर की तारीख पर विचार किया जा रहा है। इसे अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि के बजाय प्रस्तावित तारीख के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पार्टी की योजना राज्य के वरिष्ठ नेताओं को इस अभियान में एक साथ लाने की है। यदि सभी प्रमुख नेता एक मंच पर दिखाई देते हैं, तो कांग्रेस इसे आंतरिक एकजुटता का राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल कर सकती है।
सिर्फ पंजाब नहीं, कई राज्यों में कांग्रेस का फेरबदल
सचिन पायलट की नियुक्ति कांग्रेस के व्यापक संगठनात्मक फेरबदल का हिस्सा है।
भूपेश बघेल को असम भेजा गया है, जबकि रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का AICC General Secretary in-charge बनाया गया है। वह कर्नाटक की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे।
सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, डॉ. सिरिवेला प्रसाद को महाराष्ट्र और पीवी मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है।
इन नियुक्तियों से स्पष्ट है कि कांग्रेस नेतृत्व आने वाले चुनावों से पहले कई राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों को नए सिरे से बांट रहा है।
पंजाब में पायलट की नियुक्ति का राजनीतिक मतलब
सचिन पायलट की नियुक्ति को केवल एक नियमित संगठनात्मक फेरबदल मानना पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
कांग्रेस के सामने फिलहाल दो काम समानांतर रूप से हैं—एक तरफ उसे AAP के खिलाफ मजबूत चुनावी विकल्प तैयार करना है, दूसरी तरफ पार्टी के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक प्रभाव को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित करना है।
पायलट के लिए असली परीक्षा इस बात से तय होगी कि वह वड़िंग, चन्नी, बाजवा और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के बीच कार्यात्मक तालमेल कितना जल्दी बना पाते हैं।
उनकी नियुक्ति का विभिन्न खेमों द्वारा स्वागत किया जाना शुरुआत में उनके पक्ष में जाता है। लेकिन 2027 के चुनाव में इसका वास्तविक असर संगठनात्मक फैसलों, उम्मीदवार चयन और चुनाव प्रचार के दौरान ही स्पष्ट होगा।
