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राजनीति

₹3,383 करोड़ की संपत्ति घोषित करने वाले BJP विधायक भिखारी बनकर मुंबई की सड़कों पर क्यों निकले? सामने आई पूरी कहानी

₹3,383 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति घोषित कर चुके BJP विधायक पराग शाह पहचान छिपाकर मुंबई के घाटकोपर में भिखारी के वेश में घूमे। जानिए उन्होंने ऐसा क्यों किया और इस दौरान उनके साथ क्या हुआ।

₹3,383 करोड़ की संपत्ति घोषित करने वाले BJP विधायक भिखारी बनकर मुंबई की सड़कों पर क्यों निकले? सामने आई पूरी कहानी
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: JantaScope

मुंबई के घाटकोपर में सड़क पर साधारण और मैले कपड़ों में लोगों से खाना मांग रहे एक व्यक्ति को देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा सकता था कि वह इलाके का मौजूदा विधायक है।

वह व्यक्ति थे घाटकोपर ईस्ट से BJP विधायक पराग शाह

2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के अपने हलफनामे में ₹3,383.06 करोड़ की संपत्ति घोषित करने वाले शाह ने अपना रूप बदलकर घाटकोपर की सड़कों पर कई घंटे बिताए। उन्होंने मेकअप के जरिए अपनी पहचान छिपाई और लोगों से भोजन तथा मदद मांगी। बाद में उनका वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ।

लेकिन इस घटना को केवल “अरबपति विधायक बना भिखारी” के रूप में देखना पूरी कहानी नहीं बताता।

शाह के मुताबिक यह कदम राजनीतिक अभियान नहीं बल्कि उनके जैन आध्यात्मिक गुरु की सलाह पर किया गया एक व्यक्तिगत और आध्यात्मिक अभ्यास था। इसका उद्देश्य यह देखना था कि पद, पहचान और संपत्ति हट जाने पर लोग उनके साथ कैसा व्यवहार करते हैं।

करीब तीन घंटे तक पहचान छिपाकर घाटकोपर में घूमे

Indian Express की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार यह प्रयोग 7 सितंबर 2026 को हुआ था।

शाह ने करीब तीन घंटे तक घाटकोपर स्टेशन, रेलवे ब्रिज और अपने निर्वाचन क्षेत्र की अलग-अलग सड़कों पर भिखारी के वेश में समय बिताया। उन्होंने लोगों से खाने के लिए मदद मांगी और उन जगहों पर भी गए जहां सामान्य परिस्थितियों में उन्हें विधायक के रूप में पहचाना जाता।

उनका रूप इतना बदल गया था कि, शाह के अनुसार, उनके अपने परिवार के सदस्य भी उन्हें पहचान नहीं सके।

उन्होंने अपने कार्यालय जाने का भी दावा किया, जहां सुरक्षा गार्ड ने उन्हें नहीं पहचाना और वहां से जाने को कहा।

यह विवरण महत्वपूर्ण है क्योंकि बाद की कई रिपोर्टों में घटना को “एक दिन” के प्रयोग के रूप में बताया गया, जबकि Indian Express को शाह द्वारा दिया गया अधिक विशिष्ट विवरण लगभग तीन घंटे का है।

उन्होंने ऐसा क्यों किया?

शाह के अनुसार इस प्रयोग का संबंध पहचान और अहंकार को लेकर उनके आध्यात्मिक गुरु द्वारा दिए गए संदेश से था।

उन्होंने Indian Express से कहा कि शायद उन्हें भी यह लगने लगा था कि हर व्यक्ति उन्हें व्यक्तिगत रूप से पहचानता है।

उनके गुरु ने कथित तौर पर उन्हें अपना रूप बदलकर उन्हीं जगहों पर जाने को कहा जहां उन्हें लगता था कि लोग उन्हें जानते हैं। बाद में उन्हें अपने सामान्य रूप में उन्हीं स्थानों पर वापस जाकर लोगों की प्रतिक्रिया देखने की सलाह दी गई।

इसलिए उपलब्ध प्रत्यक्ष रिपोर्टिंग के आधार पर इसे गरीबी का औपचारिक अध्ययन या सरकारी initiative कहना सही नहीं होगा।

यह शाह द्वारा किया गया एक व्यक्तिगत आध्यात्मिक अभ्यास था।

जब विधायक ने लोगों से खाना मांगा

शाह ने बताया कि वह एक ऐसे स्थान पर पहुंचे जहां मुफ्त भोजन बांटा जा रहा था।

भोजन वितरण लगभग समाप्त होने वाला था, लेकिन वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें दाल, चावल और पानी दिया।

इसके बाद वह एक समोसा बेचने वाले के पास गए।

शाह के अनुसार दुकानदार ने उनकी स्थिति देखकर उन्हें बिना पैसे लिए खाना दिया।

PTI को दिए उनके विवरण में एक और घटना सामने आती है। शाह ने बताया कि एक व्यक्ति ने उन्हें ₹20 देते हुए खाना खाने के लिए कहा। उन्होंने मुंबई में लोगों की एक-दूसरे की मदद करने की प्रवृत्ति को अपने अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

इन घटनाओं का विवरण स्वयं शाह के बयान पर आधारित है; इन्हें स्वतंत्र observational study के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

बाद में उसी जगह विधायक बनकर वापस पहुंचे

प्रयोग का दूसरा हिस्सा शायद पहले हिस्से जितना ही महत्वपूर्ण था।

अपना मेकअप हटाने और सामान्य रूप में वापस आने के बाद शाह उन कुछ स्थानों पर दोबारा गए जहां वह पहले भिखारी के रूप में गए थे।

उन्होंने उन्हीं लोगों से बातचीत की जिन्होंने कुछ समय पहले उन्हें उनकी वास्तविक पहचान जाने बिना देखा था।

शाह के मुताबिक इस अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि किसी व्यक्ति को मिलने वाला सम्मान उसके व्यक्तित्व से कितना जुड़ा होता है और उसकी सामाजिक स्थिति, पैसा या पद उसमें कितनी भूमिका निभाते हैं।

₹3,383 करोड़ का आंकड़ा आखिर है क्या?

इस कहानी में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला आंकड़ा शाह की संपत्ति है।

लेकिन यहां एक जरूरी distinction है।

₹3,383.06 करोड़ को पराग शाह की वर्तमान “net worth” कहना तकनीकी रूप से सटीक नहीं होगा।

यह वह संपत्ति है जिसे उन्होंने 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए दाखिल अपने चुनावी हलफनामे में घोषित किया था

Indian Express के अनुसार उस हलफनामे में शाह ने ₹3,383.06 करोड़ की assets घोषित की थीं और वह 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के सबसे अधिक संपत्ति घोषित करने वाले उम्मीदवार थे।

शाह रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े रहे हैं और राजनीति में आने से पहले Brihanmumbai Municipal Corporation में corporator भी रह चुके हैं।

वर्तमान में वह घाटकोपर ईस्ट से दूसरी बार विधायक हैं।

कहानी वायरल क्यों हुई?

इस घटना में स्वाभाविक रूप से एक असाधारण contrast है:

एक तरफ हजारों करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति वाला निर्वाचित प्रतिनिधि और दूसरी तरफ उसी व्यक्ति का पहचान छिपाकर सड़क पर भोजन मांगना।

यही contrast सोशल मीडिया पर कहानी के तेजी से फैलने की एक वजह बना।

लेकिन वायरल वीडियो से अलग करने योग्य दो बातें हैं।

पहली, शाह ने स्वयं कहा कि यह राजनीतिक stunt नहीं था और उन्होंने इसे अपने आध्यात्मिक गुरु की सलाह से जोड़ा।

दूसरी, किसी व्यक्ति का कुछ घंटे भिखारी के वेश में बिताना मुंबई में homelessness या chronic poverty का प्रतिनिधि अनुभव नहीं माना जा सकता। शाह जानते थे कि उनका प्रयोग अस्थायी था और वह उसके बाद अपने सामान्य जीवन में लौट सकते थे।

इसलिए घटना उनके व्यक्तिगत अनुभव के बारे में जानकारी देती है; इससे गरीबी में रहने वाले लोगों के दीर्घकालिक अनुभवों के बारे में व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

JantaScope Analysis: इस प्रयोग ने वास्तव में क्या दिखाया?

इस घटना की सबसे उपयोगी व्याख्या शायद “अमीर विधायक ने गरीबी का अनुभव किया” नहीं है।

अधिक सटीक रूप से, शाह ने अपनी सार्वजनिक पहचान हटाकर लोगों की प्रतिक्रिया देखने की कोशिश की।

यह अंतर महत्वपूर्ण है।

गरीबी केवल कपड़ों, भोजन मांगने या कुछ घंटों तक पैसे न रखने की स्थिति नहीं है। इसमें आय की अनिश्चितता, आवास, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और लंबे समय तक आर्थिक असुरक्षा जैसे कई कारक शामिल होते हैं।

शाह का प्रयोग इन परिस्थितियों को reproduce नहीं कर सकता था।

लेकिन उनके अनुभव से एक अलग सवाल जरूर सामने आता है: हम किसी अनजान व्यक्ति के साथ उसके दिखने वाले सामाजिक दर्जे के आधार पर कितना अलग व्यवहार करते हैं?

शाह ने स्वयं अपने अनुभव को इसी दिशा में देखा। उनके मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में मिलने वाला सम्मान और पहचान उस समय गायब हो गई जब लोगों को पता नहीं था कि वह कौन हैं। दूसरी ओर, उन्हें अनजान लोगों से भोजन और मदद भी मिली।

यही विरोधाभास इस घटना को सिर्फ एक वायरल वीडियो से आगे ले जाता है।

क्या इस पर कोई राजनीतिक विवाद हुआ?

घटना ने सोशल मीडिया पर ध्यान आकर्षित किया, लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टिंग में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे इसे BJP का आधिकारिक अभियान या महाराष्ट्र सरकार की पहल कहा जा सके।

शाह ने इसे अपना व्यक्तिगत, आध्यात्मिक अभ्यास बताया है।

इसलिए इसे किसी व्यापक पार्टी कार्यक्रम के रूप में प्रस्तुत करना उपलब्ध तथ्यों से आगे जाना होगा।

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