नई दिल्ली: चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर बढ़े विवाद के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार, 26 सितंबर को तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण जारी किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी बैठक में शामिल हुए। आयोग ने अपने नोट में विशेष रूप से कहा कि इसे 26 सितंबर की पूर्ण आयोग की बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर जारी किया गया और इसे पूरे आयोग की मंजूरी प्राप्त है।
यह स्पष्टीकरण उस समय आया जब The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि संधू और जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 मौकों पर आयोग के विभिन्न कदमों को लेकर लिखित आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं।
हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि किसी मुद्दे पर विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है और अंतिम निर्णयों को इससे अलग करके देखा जाना चाहिए।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले लगभग 10 महीनों में मतदाताओं को जोड़ने, हटाने और दोबारा शामिल करने तथा voter-registration प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मामलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
चुनाव आयोग ने रिपोर्ट सामने आने के बाद कहा कि लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक checks-and-balances एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि deliberation के दौरान सामने आने वाली अलग-अलग राय को अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए और पिछले एक वर्ष में आयोग के अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति का परिणाम रहे हैं।
इसलिए यहां दो अलग बातें महत्वपूर्ण हैं: मीडिया रिपोर्ट में आंतरिक स्तर पर दर्ज आपत्तियों की बात कही गई है, जबकि आयोग अंतिम औपचारिक निर्णयों की सर्वसम्मति पर जोर दे रहा है।
SIR पर आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने Special Intensive Revision को लेकर कहा कि 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए SIR का आदेश पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से जारी किया गया था।
आयोग के अनुसार इसकी शुरुआत बिहार से हुई, जिसके बाद पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में प्रक्रिया आगे बढ़ी।
आयोग ने यह भी कहा कि 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 27 अक्टूबर 2025 तथा 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को जारी SIR schedules को भी पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति प्राप्त थी।
आयोग ने अपने पक्ष के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के आदेश का भी उल्लेख किया।
Cabinet Secretary को लिखे पत्र पर भी स्पष्टीकरण
विवाद का एक हिस्सा उन रिपोर्टों से जुड़ा था जिनमें आयोग के दो सदस्यों द्वारा Cabinet Secretary को लिखे जाने का उल्लेख किया गया था।
26 सितंबर के स्पष्टीकरण में चुनाव आयोग ने कहा कि Cabinet Secretary T. V. Somanathan को लिखा गया पत्र आयोग के किसी policy matter या IT division की नीति से संबंधित नहीं था।
आयोग के मुताबिक मामला ECI में deputation पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। आयोग ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी work-redistribution orders को दोनों Election Commissioners के निर्देश के बाद वास्तव में लागू नहीं किया गया और IT division पर Deputy Election Commissioner की oversight समाप्त नहीं हुई थी।
ECINET की अब होगी समीक्षा
चुनाव आयोग ने अपने digital platform ECINET को लेकर उठे सवालों पर एक नई समीक्षा की घोषणा की है।
आयोग का कहना है कि field officers को उनके statutory powers के अनुरूप role-based access उपलब्ध है।
इसके बावजूद आयोग ने कहा कि एक Senior Deputy Election Commissioner की अध्यक्षता वाली समिति ECINET की समीक्षा करेगी। इसमें IIT या IIIT से एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा।
इसका उद्देश्य दोबारा जांचना होगा कि ECINET की व्यवस्था संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप है या नहीं। समिति अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी।
आयोग ने यह भी कहा कि भविष्य में नए IT modules और portals से जुड़े initiatives को Commission की मंजूरी से पहले Committee of Officers में चर्चा के लिए रखा जाएगा।
यह घोषणा महत्वपूर्ण है क्योंकि आयोग जहां मौजूदा व्यवस्था का बचाव कर रहा है, वहीं उसने तकनीकी व्यवस्था और access mechanisms की अतिरिक्त समीक्षा का रास्ता भी खोला है।
Goa के 97 मतदाताओं का मामला
आयोग ने Goa में मतदाता सूची से जुड़े एक विशेष मामले पर भी जवाब दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय चुनाव अधिकारियों द्वारा पात्र पाए गए 97 मतदाता final electoral roll में शामिल नहीं हो पाए थे।
आयोग ने कहा कि Goa के Chief Electoral Officer ने संबंधित Booth Level Officers को ऐसे मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक forms एकत्र करने का निर्देश दिया है।
26 सितंबर तक आयोग के अनुसार 97 में से 81 मतदाताओं ने inclusion के लिए Form 6 भर दिया था।
Congress ने इसके बाद सवाल उठाया कि इन मतदाताओं को पहले सूची से बाहर क्यों रखा गया और क्या दूसरे राज्यों में भी इसी तरह के मामले मौजूद हो सकते हैं। यह विपक्ष का सवाल है; आयोग द्वारा ऐसा कोई निष्कर्ष स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
आयोग ने अपनी आंतरिक प्रक्रिया में भी किए बदलाव
विवाद के बीच ECI ने अपने संस्थागत कामकाज से संबंधित कुछ प्रक्रियाएं स्पष्ट करने की घोषणा की।
आयोग के अनुसार अब Commission की बैठकों का agenda पहले circulate किया जाएगा और minutes जारी किए जाएंगे।
अधिकारियों के Annual Performance Appraisal Reports (APARs) हर वर्ष 31 दिसंबर तक पूरे किए जाने की बात कही गई है। अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए Commission की मंजूरी लेने और Commissioners द्वारा अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।
इन कदमों का महत्व केवल मौजूदा विवाद तक सीमित नहीं है। Meeting agendas, minutes और commissioners के निर्देशों के formal compliance से भविष्य में यह रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट हो सकता है कि किसी मुद्दे पर विचार-विमर्श और अंतिम निर्णय किस तरह हुआ।
सत्ता पक्ष और विपक्ष की अलग-अलग प्रतिक्रिया
आयोग के स्पष्टीकरण के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रहीं।
BJP ने आयोग के बयान को उसके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का जवाब बताया। BJP प्रवक्ता Sambit Patra ने कहा कि आयोग के बयान ने मामले को स्पष्ट किया है। NDA सहयोगी TDP के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने भी आयोग के clarification का स्वागत किया।
दूसरी ओर Congress ने कहा कि आयोग के जवाब के बावजूद कई सवाल अनुत्तरित हैं। पार्टी ने voter inclusion, ECINET की निगरानी और Goa में छूटे मतदाताओं से जुड़े मुद्दे उठाए।
इससे साफ है कि आयोग के स्पष्टीकरण के बाद भी राजनीतिक विवाद समाप्त नहीं हुआ है।
क्या वास्तव में आयोग के भीतर मतभेद थे?
इस प्रश्न का उत्तर देते समय दो स्तरों को अलग रखना जरूरी है।
पहला, The Indian Express की जांच में संधू और जोशी द्वारा कई मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। आयोग की शुरुआती प्रतिक्रिया ने भी यह तर्क दिया कि अलग-अलग विचार और observations deliberation का सामान्य हिस्सा हैं।
दूसरा, आयोग का आधिकारिक पक्ष यह है कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुए।
इसलिए यह कहना कि आयोग ने आंतरिक deliberation में किसी प्रकार के मतभेद होने से पूरी तरह इनकार किया है, सही नहीं होगा। इसी तरह यह कहना भी उचित नहीं होगा कि रिपोर्ट की गई हर आपत्ति किसी अंतिम आयोगीय निर्णय में formal dissent बन गई थी।
आगे क्या देखना महत्वपूर्ण होगा?
अब तीन चीजों पर विशेष नजर रहेगी।
सबसे पहले, ECINET की समीक्षा करने वाली समिति क्या निष्कर्ष देती है। दूसरा, SIR के दौरान छूटे या विवादित voter records से जुड़े मामलों को आयोग किस तरह हल करता है। तीसरा, भविष्य में agendas और minutes जारी करने की नई व्यवस्था आयोग की decision-making process को कितना अधिक दस्तावेजीकृत बनाती है।
इन सवालों के जवाब आयोग के शनिवार के बयान से नहीं, बल्कि आने वाले institutional actions और review findings से अधिक स्पष्ट होंगे।
फिलहाल पुष्टि इतनी है कि तीनों सदस्यों वाले Election Commission ने SIR से जुड़े अंतिम फैसलों को सर्वसम्मत बताया है, ECINET की स्वतंत्र विशेषज्ञ वाली समीक्षा की घोषणा की है और अपनी internal administrative procedures में कुछ अतिरिक्त safeguards सामने रखे हैं।
Source
Primary Source: Election Commission of India (ECI) — Commission meeting and official clarification, September 26, 2026.
Additional Reporting: The Indian Express investigation on objections recorded by Election Commissioners; Hindustan Times reporting on the September 26 Commission meeting and clarification.
