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राजनीति

अमृतपाल सिंह की पार्टी का दायरा बढ़ाने की कोशिश, नए चेहरों ने संविधान और समावेशिता पर दिया जोर

2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल (वारिस पंजाब दे) अपने राजनीतिक और सामाजिक आधार को व्यापक करने की कोशिश कर रहा है। पूर्व ED डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह और विधायक मनप्रीत सिंह अयाली जैसे नए चेहरों ने देश की एकता, संवैधानिक दायरे, नशे, भ्रष्टाचार, रोजगार और सभी समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस रणनीति के असर को लेकर अलग-अलग आकलन हैं।

अमृतपाल सिंह की पार्टी का दायरा बढ़ाने की कोशिश, नए चेहरों ने संविधान और समावेशिता पर दिया जोर
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: The Indian Express, with additional reporting from The Tribune and NDTV.

नए चेहरों के साथ Waris Punjab De की बदलती राजनीतिक रणनीति

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के बीच हिरासत में बंद खडूर साहिब सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़ा अकाली दल (वारिस पंजाब दे) अपने पारंपरिक पंथिक आधार से आगे पहुंचने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।

इस रणनीति का सबसे नया संकेत पूर्व Enforcement Directorate (ED) डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह के पार्टी में शामिल होने से मिला। बुधवार को उनके साथ पूर्व पंजाब पुलिस DSP बलविंदर सिंह सेखों भी संगठन से जुड़े। इससे पहले जून में दाखा विधायक मनप्रीत सिंह अयाली पार्टी से जुड़ चुके थे।

इन नए सदस्यों के सार्वजनिक बयानों में नशे, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और रोजगार के साथ-साथ संवैधानिक राजनीति और विभिन्न समुदायों तक पहुंच बनाने पर जोर दिखाई देता है।

निरंजन सिंह ने देश की एकता और संप्रभुता पर क्या कहा?

The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, निरंजन सिंह ने देश की एकता और संप्रभुता पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हो सकता।

अमृतपाल सिंह से पहले जुड़े रहे खालिस्तान संबंधी बयानों के बारे में पूछे जाने पर निरंजन सिंह ने अलग रुख व्यक्त किया। उनका कहना था कि भारत ही उनकी मातृभूमि है और दूसरी मातृभूमि का सवाल नहीं उठता।

Times of India के अनुसार, पार्टी में शामिल होने के दौरान उन्होंने Waris Punjab De को “secular people” का समूह बताया और पंजाब में नशे, भ्रष्टाचार तथा कानून-व्यवस्था को लेकर पिछली और मौजूदा सरकारों की आलोचना की।

निरंजन सिंह ने यह भी कहा कि वह चुनाव लड़ने के इरादे से पार्टी में नहीं आए हैं। Indian Express के मुताबिक, उन्होंने अपने फैसले के पीछे चार प्रमुख मुद्दे बताए—नशा, उच्च स्तर का भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और रोजगार।

मनप्रीत सिंह अयाली: संविधान के दायरे में काम करने की शर्त

तीन बार के विधायक और व्यवसायी मनप्रीत सिंह अयाली दो दशकों से अधिक समय तक शिरोमणि अकाली दल से जुड़े रहे थे। जून 2026 में उनके Waris Punjab De से जुड़ने को संगठन के लिए मालवा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा गया।

अयाली ने Indian Express से कहा कि संगठन से जुड़ते समय उन्होंने स्पष्ट किया था कि पार्टी को संविधान के दायरे में काम करना होगा।

उनका तर्क है कि पंजाब में पारंपरिक अकाली राजनीति से निराश युवाओं के बीच एक नए राजनीतिक मंच की मांग बनी है। उन्होंने नशे, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को उन मुद्दों में गिनाया जिनकी वजह से, उनके अनुसार, Waris Punjab De युवाओं के बीच समर्थन हासिल कर रहा है।

यह पार्टी नेता का राजनीतिक आकलन है; इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित जनमत सर्वेक्षण का निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

हिंदू और मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की बात

पार्टी के व्यापक सामाजिक आधार की कोशिश का एक और संकेत अयाली के उम्मीदवारों को लेकर दिए बयान में मिलता है।

उन्होंने कहा कि संगठन के मन में किसी समुदाय के प्रति भेदभाव नहीं है और पार्टी हिंदू तथा मुस्लिम उम्मीदवारों को भी टिकट देगी।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी पार्टी सरकार बनाती है, तो उसका प्रस्ताव एक हिंदू और एक दलित सहित दो उपमुख्यमंत्री बनाने का होगा। यह फिलहाल पार्टी नेता द्वारा व्यक्त भविष्य की राजनीतिक योजना है, न कि लागू नीति।

अयाली इससे पहले भी हिंदू-सिख एकता और सभी समुदायों की सुरक्षा को 2027 के चुनावी एजेंडे का हिस्सा बता चुके हैं।

नशे का मुद्दा बन रहा प्रमुख राजनीतिक एजेंडा

Waris Punjab De की मौजूदा राजनीतिक रणनीति में पंजाब का नशा संकट प्रमुख मुद्दों में शामिल है।

Indian Express के अनुसार, पिछले महीने आयोजित राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रखड़ पुण्या रैली में पार्टी ने नशे के मुद्दे पर एक White Paper लाने का वादा किया था।

पूर्व DSP बलविंदर सिंह सेखों ने भी पार्टी में शामिल होने के पीछे नशे के खिलाफ कार्रवाई को एक कारण बताया।

वहीं निरंजन सिंह ने कहा कि पारंपरिक राजनीतिक दलों और आम आदमी पार्टी से उनकी निराशा ने भी उनके फैसले को प्रभावित किया।

इन आरोपों और राजनीतिक आलोचनाओं को संबंधित नेताओं के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।

Vision Document तैयार करने की योजना

पार्टी केवल नए सदस्यों को जोड़ने तक सीमित नहीं रहना चाहती। अयाली के मुताबिक, संगठन जल्द एक पैनल घोषित करेगा जो पंजाब के लिए vision document तैयार करेगा।

उन्होंने कहा कि युवा, व्यापारी, कारोबारी और किसान सहित अलग-अलग वर्गों से पंजाब की समस्याओं और संभावित समाधानों पर सुझाव लिए जा रहे हैं।

इससे संकेत मिलता है कि संगठन 2027 के चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक पहचान को मुद्दा-आधारित कार्यक्रम के रूप में भी प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है।

पार्टी का विस्तार पहले से जारी

हाल के महीनों में Waris Punjab De ने अपनी चुनावी गतिविधियां तेज की हैं।

पार्टी ने लखबीर सिंह सिधाना उर्फ लक्खा सिधाना को मौर विधानसभा क्षेत्र और दिवंगत अभिनेता दीप सिद्धू के भाई मनदीप सिंह सिद्धू को तलवंडी साबो से 2027 चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किया है।

इससे पहले संगठन ने अमृतपाल सिंह के सहयोगी पपलप्रीत सिंह को मजीठा से उम्मीदवार बनाया था। अन्य घोषित उम्मीदवारों में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के लिए कई नाम शामिल हैं।

अगस्त की रिपोर्टिंग के मुताबिक, हालांकि संगठन अपनी चुनावी गतिविधियां बढ़ा रहा था, उस समय तक उसे Election Commission of India से औपचारिक पार्टी registration और reserved election symbol नहीं मिला था।

आलोचक क्यों उठा रहे हैं सवाल?

पार्टी के नए संदेश को लेकर सभी राजनीतिक पर्यवेक्षक एकमत नहीं हैं।

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. प्रमोद कुमार ने Indian Express से कहा कि गैर-पंथिक चेहरों को शामिल करके पार्टी एक अधिक moderate छवि प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इस रणनीति की सफलता को लेकर संदेह जताया।

यह उनका विश्लेषण है, स्थापित तथ्य नहीं।

दूसरी ओर, पार्टी के नए नेता अपने संदेश को संविधान, सामाजिक समावेश, नशे के खिलाफ अभियान, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दों से जोड़ रहे हैं।

इसलिए 2027 के चुनाव की ओर बढ़ते पंजाब में अहम सवाल यह होगा कि क्या Waris Punjab De अपने मौजूदा पंथिक आधार से आगे विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समूहों तक अपनी पहुंच बढ़ा पाता है।

फिलहाल नए सदस्यों के बयान पार्टी की दिशा में बदलाव या विस्तार का संकेत देते हैं, लेकिन इस रणनीति को मतदाताओं से कितना समर्थन मिलेगा, इसका आकलन चुनावी नतीजों और विश्वसनीय जनमत आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा।


Source

Primary Source: The Indian Express, Political Pulse — 25 September 2026, Manraj Grewal Sharma, “Amritpal Singh’s party wants to broaden its appeal. Its new faces have a message.”

Additional Sources: The Times of India, The Tribune, NDTV और The Indian Express की Waris Punjab De तथा 2027 Punjab Assembly election preparations से संबंधित हालिया रिपोर्टिंग।

Editorial Note: नेताओं द्वारा नशे, कानून-व्यवस्था, अन्य राजनीतिक दलों और पार्टी की लोकप्रियता को लेकर किए गए दावों को इस रिपोर्ट में उनके बयानों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं।

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