नागांव उपचुनाव प्रचार के बीच कांग्रेस के काफिले पर कथित हमला
असम में नागांव लोकसभा उपचुनाव के लिए जारी चुनाव प्रचार के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया है कि सोमवार, 21 सितंबर को पार्टी के चुनावी काफिले पर पत्थर और बोतलें फेंकी गईं।
घटना नागांव जिले के सामगुरी क्षेत्र के बरमा/बोरमा इलाके में हुई, जब कांग्रेस नेता लोरिमुख की ओर एक चुनावी कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे थे। यह प्रचार कांग्रेस उम्मीदवार सिबामोनी बोरा के समर्थन में किया जा रहा था। नागांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है।
गोगोई और भूपेश बघेल भी काफिले में थे
रिपोर्टों के मुताबिक, काफिले में गौरव गोगोई के साथ छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कांग्रेस उम्मीदवार सिबामोनी बोरा, धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन और पार्टी के अन्य नेता शामिल थे।
गोगोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि जिस वाहन में वह और भूपेश बघेल यात्रा कर रहे थे, उसे पत्थरों और बोतलों से निशाना बनाया गया।
उन्होंने लिखा कि नागांव में चुनावी रैली की ओर जाते समय उनकी कार पर हमला किया गया। गोगोई ने हमलावरों को BJP कार्यकर्ता बताया। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
काले झंडे और ‘Go Back’ के नारे लगाने का भी आरोप
कांग्रेस के मुताबिक, काफिले के इलाके से गुजरने के दौरान कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाए और “Go Back” के नारे लगाए। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हुई और वाहनों पर पत्थर तथा अन्य वस्तुएं फेंके जाने की बात सामने आई।
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने की भी खबर है। असम ट्रिब्यून की रिपोर्ट में CRPF कर्मियों पर भी पथराव होने की बात कही गई है।
कांग्रेस उम्मीदवार की गाड़ी क्षतिग्रस्त होने का दावा
गोगोई ने कांग्रेस उम्मीदवार सिबामोनी बोरा की एक क्षतिग्रस्त गाड़ी की तस्वीर भी साझा की। उन्होंने दावा किया कि AICC सचिव मनोज चौहान वाहन में मौजूद थे और उनकी पसलियों के पास पत्थर लगा।
अन्य रिपोर्टों में भी कांग्रेस की ओर से वाहनों के शीशे टूटने और नुकसान होने के दावे सामने आए हैं। हालांकि चोट की प्रकृति और संपत्ति को हुए कुल नुकसान के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
पुलिस की भूमिका पर गौरव गोगोई ने उठाए सवाल
गोगोई ने असम पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि पुलिस को संभावित तनाव के बारे में पहले ही जानकारी दी गई थी और भीड़ को नियंत्रित करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन हालात बिगड़ने से नहीं रोके गए।
कांग्रेस ने इससे आगे बढ़कर मुख्यमंत्री कार्यालय को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उपलब्ध रिपोर्टिंग में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन्हें कांग्रेस के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
घटना को लेकर पुलिस में शिकायत भी दी गई है। असम ट्रिब्यून के अनुसार, कांग्रेस नेता मीरा बोरठाकुर ने नागांव सदर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर कथित हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की। अन्य रिपोर्टों में गोगोई द्वारा भी शिकायत दिए जाने की बात कही गई है।
नागांव उपचुनाव के बीच क्यों अहम है यह घटना?
यह घटना ऐसे समय हुई है जब 6 अक्टूबर को होने वाले नागांव लोकसभा उपचुनाव के लिए प्रचार चल रहा है।
कांग्रेस ने सिबामोनी बोरा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि BJP की ओर से पूर्व नागांव डिप्टी कमिश्नर देबाशीष शर्मा मैदान में हैं। AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल भी चुनाव लड़ रहे हैं।
इस वजह से काफिले पर कथित पथराव का मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है; इसने चुनाव प्रचार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच टकराव को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
सामगुरी क्षेत्र में चुनावी हिंसा का यह पहला विवाद नहीं है। नवंबर 2024 में सामगुरी विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी BJP और कांग्रेस समर्थकों के बीच टकराव और पथराव की खबरें आई थीं। उस समय BJP ने अपने काफिले पर कांग्रेस समर्थकों द्वारा हमला किए जाने का आरोप लगाया था। बाद में BJP के दिप्लू रंजन शर्मा ने सामगुरी विधानसभा सीट जीती थी।
आगे क्या?
ताजा घटना में कांग्रेस ने जांच और कार्रवाई की मांग की है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सुरक्षा बलों ने मौके पर स्थिति को नियंत्रण में लिया।
अब महत्वपूर्ण तथ्य पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई से स्पष्ट होंगे—विशेष रूप से पथराव करने वालों की पहचान, दर्ज मामलों की धाराएं, चोटों की आधिकारिक स्थिति और वाहनों को हुए नुकसान का विवरण।
जब तक जांच या पुलिस की ओर से विस्तृत निष्कर्ष सामने नहीं आते, BJP कार्यकर्ताओं की कथित संलिप्तता और पुलिस को हस्तक्षेप न करने के कथित निर्देश जैसे दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
