नई दिल्ली, 16 अगस्त 2026: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर रविवार को देश के शीर्ष नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने राजधानी में वाजपेयी के स्मारक ‘सदैव अटल’ पहुंचकर पुष्प अर्पित किए।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सहित अन्य गणमान्य लोग भी शामिल हुए।
पीएम मोदी ने वाजपेयी के नेतृत्व को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाजपेयी को दूरदृष्टि रखने वाला असाधारण राजनेता बताते हुए उनके राष्ट्रसेवा के योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री के संदेश का प्रमुख जोर वाजपेयी की सुशासन, जनकल्याण और मजबूत नेतृत्व की सोच पर रहा। उन्होंने कहा कि वाजपेयी के विचार और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रसेवा को याद किया। शाह ने कहा कि वाजपेयी का व्यक्तित्व और नेतृत्व भाजपा कार्यकर्ताओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरणा देता रहेगा।
तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन अलग-अलग अवसरों पर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उनका पहला कार्यकाल 1996 में केवल 13 दिनों का था। इसके बाद उन्होंने 1998 में फिर सरकार का नेतृत्व किया और 1999 से 2004 तक पूर्ण कार्यकाल पूरा किया। वे कांग्रेस से बाहर के पहले प्रधानमंत्री बने जिन्होंने पांच वर्ष का पूर्ण कार्यकाल पूरा किया।
उनका संसदीय जीवन पांच दशकों से भी अधिक लंबा रहा। वे दस बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य चुने गए। राजनीति के अलावा वाजपेयी अपनी प्रभावशाली वक्तृत्व शैली, लेखन और कविता के लिए भी जाने जाते थे।
भारत रत्न से हुए थे सम्मानित
देश के सार्वजनिक जीवन में लंबे योगदान के लिए अटल बिहारी वाजपेयी को 2015 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनका निधन 16 अगस्त 2018 को हुआ था।
क्यों महत्वपूर्ण है वाजपेयी की राजनीतिक विरासत?
वाजपेयी भारतीय राजनीति के उस दौर के प्रमुख चेहरों में रहे जब गठबंधन सरकारें राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही थीं। भाजपा के संस्थापक नेताओं में शामिल वाजपेयी ने पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर सरकार का नेतृत्व करने वाली राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को गठबंधन प्रबंधन, बुनियादी ढांचे पर जोर, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों के संदर्भ में याद किया जाता है। साथ ही, उनके लंबे संसदीय जीवन और राजनीतिक संवाद की शैली ने उन्हें केवल पार्टी के भीतर ही नहीं बल्कि व्यापक राष्ट्रीय राजनीति में भी अलग पहचान दी।
संतुलित विश्लेषण
अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को समझने के लिए उनके व्यक्तित्व और उनके शासनकाल—दोनों को देखना जरूरी है। समर्थक उन्हें मजबूत नेतृत्व, राजनीतिक संवाद और गठबंधन बनाने की क्षमता के लिए याद करते हैं। उनके दौर में भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के स्तर पर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखे।
किसी भी लंबे राजनीतिक कार्यकाल की तरह उनकी सरकार की नीतियों और निर्णयों पर राजनीतिक तथा अकादमिक बहस भी होती रही है। फिर भी भारतीय संसदीय राजनीति में उनकी वक्तृत्व क्षमता, विपक्ष के साथ संवाद और गठबंधन नेतृत्व की शैली उनके राजनीतिक व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण पहलू माने जाते हैं।
उनकी पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी यह दर्शाती है कि वाजपेयी की राजनीतिक विरासत आज भी भाजपा और व्यापक भारतीय सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
