मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार का कहना है कि राजनीतिक हिंसा में परिवार के कमाने वाले सदस्य की मौत होने से पीछे छूटे परिजनों को लंबे समय तक आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे परिवारों को सम्मानजनक जीवन और आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की, जिसे 1 नवंबर को सार्वजनिक किया गया।
इस योजना की खास बात यह है कि इसका लाभ केवल हाल के चुनावों में हिंसा के शिकार परिवारों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें पिछले लगभग 25 वर्षों के दौरान हुई राजनीतिक हिंसा की घटनाओं को शामिल किया गया है।
2001 से अब तक के राजनीतिक हिंसा पीड़ित परिवारों को मिलेगा लाभ
पश्चिम बंगाल सरकार की इस योजना का आधिकारिक नाम 'West Bengal Scheme for Providing Government Employment (Group D Post) to One Eligible Family Member of Victims Killed in Political Violence, 2026' रखा गया है।
अधिसूचना के अनुसार, 1 जनवरी 2001 या उसके बाद राज्य में राजनीतिक हिंसा की घटना में मारे गए व्यक्ति के परिवार का एक आश्रित सदस्य नौकरी के लिए आवेदन कर सकता है। नियुक्तियां मौजूदा भर्ती प्रक्रिया से अलग विशेष व्यवस्था के तहत की जाएंगी। जरूरत पड़ने पर इसके लिए अतिरिक्त ग्रुप-D पद भी बनाए जा सकते हैं।
सरकार का उद्देश्य उन परिवारों की आर्थिक परेशानियों को कम करना है, जिन्होंने राजनीतिक संघर्ष के दौरान अपने घर के मुख्य कमाने वाले सदस्य को खो दिया। योजना में किसी एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं तक लाभ सीमित रखने का प्रावधान नहीं किया गया है। यानी पात्रता की शर्तें पूरी करने वाले अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि के परिवार आवेदन कर सकते हैं।
इसका दायरा 2001 से शुरू होता है, जब पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा की सरकार सत्ता में थी। इसके बाद 2011 में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी और 2026 में BJP सरकार सत्ता में आई। इस तरह योजना राज्य में अलग-अलग राजनीतिक शासन के दौरान हुई घटनाओं को शामिल करती है।
परिवार के किन सदस्यों को मिलेगी सरकारी नौकरी?
योजना के तहत मृतक के परिवार के केवल एक योग्य और आश्रित सदस्य को नियुक्ति के लिए विचार किया जाएगा। अधिसूचना में पात्र सदस्यों की श्रेणियां स्पष्ट की गई हैं।
इनमें शामिल हैं:
मृतक का पति या पत्नी।
मृतक का बेटा या बेटी।
मृतक की थर्ड जेंडर संतान।
यदि मृतक अविवाहित था, तो विशेष परिस्थितियों में उसका भाई या बहन भी आवेदन कर सकते हैं।
हालांकि, अविवाहित मृतक के भाई या बहन को तभी पात्र माना जाएगा, जब उनके माता-पिता और सभी भाई-बहन मृतक पर पूरी तरह निर्भर रहे हों।
सिर्फ रिश्तेदार होना नौकरी पाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। आवेदक को यह भी साबित करना होगा कि वह मृतक पर आर्थिक रूप से निर्भर था और वर्तमान में उसे आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का उद्देश्य वास्तव में जरूरतमंद परिवारों की मदद करना है।
नौकरी पाने के लिए तय की गईं ये महत्वपूर्ण शर्तें
सरकार ने योजना के दुरुपयोग को रोकने और जरूरतमंद परिवारों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए कुछ आर्थिक और शैक्षणिक शर्तें निर्धारित की हैं।
आर्थिक पात्रता: जिस परिवार की मासिक आय 50,000 रुपये से अधिक होगी, वह इस योजना के तहत पात्र नहीं माना जाएगा। इसके अलावा परिवार का कोई सदस्य नियमित सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए और परिवार में कोई सदस्य आयकरदाता नहीं होना चाहिए।
शैक्षणिक योग्यता: आवेदक के लिए न्यूनतम आठवीं पास या उसके समकक्ष योग्यता निर्धारित की गई है।
आयु सीमा: आवेदक की आयु 1 जनवरी 2026 तक कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। अधिकतम आयु सीमा संबंधित ग्रुप-D भर्ती नियमों के अनुसार होगी। रिपोर्टों के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए 45 वर्ष और SC/ST वर्ग के लिए 50 वर्ष की सीमा बताई गई है। विशेष परिस्थितियों में समिति आयु और शैक्षणिक योग्यता में छूट की सिफारिश कर सकती है।
इसके अलावा आवेदक का भारतीय नागरिक और पश्चिम बंगाल का निवासी होना जरूरी है। यदि परिवार के किसी सदस्य को उसी घटना के संबंध में पहले ही अनुकंपा नियुक्ति या सरकारी नौकरी मिल चुकी है, तो दोबारा इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा।
आवेदन के लिए किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
योजना का लाभ लेने के लिए पात्र परिवारों को संबंधित जिले के जिला मजिस्ट्रेट (DM) के कार्यालय में निर्धारित आवेदन प्रारूप जमा करना होगा। आवेदन के साथ मृतक और आवेदक के संबंध तथा घटना से जुड़े जरूरी दस्तावेज देने होंगे।
प्रमुख दस्तावेजों में शामिल हैं:
मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र।
आवेदक और मृतक के बीच संबंध का प्रमाण।
घटना से संबंधित FIR की कॉपी।
पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट।
अदालत में तय किए गए आरोपों से जुड़े दस्तावेज।
परिवार की आय और आर्थिक निर्भरता का प्रमाण।
शैक्षणिक योग्यता और निवास से संबंधित दस्तावेज।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मृत्यु राजनीतिक हिंसा के कारण हुई थी या नहीं, इसकी पुष्टि जिला स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी करेगी। केवल परिवार की ओर से दावा करने के आधार पर किसी घटना को राजनीतिक हिंसा नहीं माना जाएगा।
जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति करेगी जांच
सरकारी नौकरी देने से पहले प्रत्येक आवेदन की जांच की जाएगी। इसके लिए हर जिले में जिला स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी बनाई जाएगी। इसकी अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट करेंगे। समिति में संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक या कोलकाता में पुलिस उपायुक्त और गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग की ओर से नामित अभियोजन अधिकारी शामिल होंगे।
समिति FIR, चार्जशीट और अदालत में तय किए गए आरोपों के आधार पर घटना की जांच करेगी। इसके बाद यह देखा जाएगा कि आवेदक वास्तव में मृतक पर निर्भर था या नहीं और क्या परिवार योजना की आर्थिक एवं अन्य शर्तें पूरी करता है।
अधिसूचना के अनुसार, जिला स्तरीय समिति को आवेदन मिलने के 90 दिनों के भीतर उस पर निर्णय लेकर अपनी सिफारिश आगे भेजनी होगी।
यदि किसी आवेदक को समिति के फैसले से आपत्ति है, तो वह निर्णय की सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर अपील कर सकता है। ऐसी अपीलों पर राज्य स्तरीय समिति विचार करेगी, जिसकी अध्यक्षता गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव करेंगे।
बंगाल की राजनीति में क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
पश्चिम बंगाल में पिछले कई दशकों से चुनावी हिंसा और राजनीतिक संघर्ष एक गंभीर मुद्दा रहे हैं। पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक अलग-अलग समय पर राजनीतिक दलों ने हिंसा, हमले और कार्यकर्ताओं की मौत को लेकर आरोप लगाए हैं।
विशेष रूप से 2019 के लोकसभा चुनाव, 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक हिंसा की घटनाएं चर्चा में रहीं। BJP ने आरोप लगाया था कि उसके कई कार्यकर्ताओं और समर्थकों को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने अपने ऊपर लगाए गए कई आरोपों को खारिज किया है।
अब 2001 से राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों को नौकरी देने की घोषणा के बाद यह मुद्दा फिर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। योजना में अलग-अलग राजनीतिक शासन के दौरान हुई घटनाओं को शामिल करना इसे विशेष महत्व देता है। हालांकि, इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आवेदन प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है और पात्र परिवारों को कितनी जल्दी सहायता मिलती है।
क्या सभी आवेदकों को मिलेगी सरकारी नौकरी?
सरकार ने अधिसूचना में साफ किया है कि योजना के तहत आवेदन करने की पात्रता मिलने का अर्थ यह नहीं है कि नौकरी मिलना सुनिश्चित हो गया है। नियुक्ति से पहले स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश, पदों की उपलब्धता, पुलिस वेरिफिकेशन और मेडिकल जांच जरूरी होगी।
योजना आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू होगी। इसलिए इच्छुक परिवारों को आवेदन से पहले संबंधित जिला प्रशासन से लागू प्रक्रिया और दस्तावेजों की जानकारी लेनी चाहिए।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल सरकार का यह फैसला उन परिवारों के लिए राहत का रास्ता खोल सकता है, जिन्होंने राजनीतिक हिंसा में अपने कमाने वाले सदस्य को खोया है। लेकिन इस योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वास्तविक पीड़ित परिवारों की पहचान निष्पक्ष तरीके से हो और राजनीतिक आरोपों से अलग रखकर जरूरतमंद लोगों तक सरकारी सहायता पहुंचाई जाए।
