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राजनीति

BJP का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल: चुनावी राज्यों पर फोकस, 36 राज्यों और UT में नए प्रभारी नियुक्त

BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने देशभर में संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव करते हुए 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति की है। उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी विनोद तावड़े, उत्तराखंड और तमिलनाडु की राम माधव, पंजाब की सतीश पूनिया और गोवा की भारती प्रवीण पवार को दी गई है। स्मृति ईरानी को हरियाणा और छत्तीसगढ़ का प्रभार सौंपा गया है।

BJP का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल: चुनावी राज्यों पर फोकस, 36 राज्यों और UT में नए प्रभारी नियुक्त
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: The Indian Express

चुनाव से पहले BJP ने बदली राज्यों की संगठनात्मक टीम

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपने संगठन में व्यापक फेरबदल करते हुए 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारियों की घोषणा की है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से की गई इन नियुक्तियों में कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण चुनावी राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है। नई नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं।

यह बदलाव ऐसे समय किया गया है जब 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, गुजरात और मणिपुर समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए नई जिम्मेदारियों का चुनावी महत्व भी है, हालांकि पार्टी की घोषणा संगठनात्मक नियुक्तियों के रूप में की गई है।

विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी

BJP के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है।

उनकी सहायता के लिए चार सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं—जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा

उत्तर प्रदेश लोकसभा में 80 सांसद भेजता है और BJP 2017 से राज्य की सत्ता में है। ऐसे में अगले विधानसभा चुनाव से पहले तावड़े और उनकी टीम की भूमिका संगठन और चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

तावड़े इससे पहले बिहार में पार्टी की संगठनात्मक और चुनावी गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं।

राम माधव को उत्तराखंड और तमिलनाडु का प्रभार

BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को उत्तराखंड और तमिलनाडु दोनों की जिम्मेदारी दी गई है।

उत्तराखंड में अरविंद मेनन और नई दिल्ली से लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज को सह-प्रभारी बनाया गया है।

उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और BJP वहां लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए चुनाव मैदान में उतरेगी।

तमिलनाडु में राम माधव के साथ निर्मल कुमार सुराणा और डीके अरुणा को सह-प्रभारी बनाया गया है।

राम माधव इससे पहले भी BJP के राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और जम्मू-कश्मीर तथा पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़े पार्टी मामलों में सक्रिय रहे हैं।

स्मृति ईरानी को हरियाणा और छत्तीसगढ़

पूर्व केंद्रीय मंत्री और BJP की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी को दो राज्यों—हरियाणा और छत्तीसगढ़—का प्रभारी बनाया गया है।

हरियाणा में सांसद भोला सिंह को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में सिद्धार्थ शंभू सह-प्रभारी होंगे।

हरियाणा में इस नियुक्ति के साथ स्मृति ईरानी ने सतीश पूनिया की जगह संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाली है।

सतीश पूनिया को पंजाब और जम्मू-कश्मीर

BJP ने राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को पंजाब और जम्मू-कश्मीर का प्रभारी बनाया है।

पंजाब में उनके साथ वीरेंद्र सचदेवा और अलका गुर्जर सह-प्रभारी के रूप में काम करेंगे।

पंजाब उन राज्यों में शामिल है जहां BJP अपने संगठन का विस्तार करने की कोशिश कर रही है। राज्य में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, जिससे पूनिया की नई जिम्मेदारी को अतिरिक्त राजनीतिक महत्व मिलता है।

गोवा में भारती प्रवीण पवार को कमान

पूर्व केंद्रीय मंत्री और BJP की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भारती प्रवीण पवार को गोवा का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

अनिल एंटनी उनके साथ सह-प्रभारी होंगे। एंटनी को इसके अलावा नागालैंड का प्रभारी भी बनाया गया है।

गोवा में भी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

गुजरात में तरुण चुग, हिमाचल में श्रीकांत शर्मा

BJP ने तरुण चुग को गुजरात का प्रभारी बनाया है। उनके साथ अजय महावर और गोमती साय सह-प्रभारी रहेंगे।

गुजरात में भी 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।

वहीं श्रीकांत शर्मा को हिमाचल प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है और दर्शना सिंह को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

महाराष्ट्र की जिम्मेदारी बैजयंत पांडा को

BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा को महाराष्ट्र का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

महाराष्ट्र में उनके साथ तीन सह-प्रभारी बनाए गए हैं—अमित मालवीय, सदानंद शेत तानावड़े और कमलजीत सहरावत

यह नियुक्ति संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े राजनीतिक और आर्थिक राज्यों में शामिल है।

तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में सुनील बंसल

राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल तेलंगाना के प्रभारी बने रहेंगे। वहां अभय पाटिल और रेखा शर्मा को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है।

बंसल पश्चिम बंगाल का प्रभार भी संभालेंगे। पश्चिम बंगाल में लाल सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह और पिंकी कुशवाहा को सह-प्रभारी बनाया गया है।

दक्षिण भारत में कई महत्वपूर्ण बदलाव

आंध्र प्रदेश में अरविंद भदौरिया को प्रभारी और वनाथी श्रीनिवासन को सह-प्रभारी बनाया गया है।

केरल में एम नागराज ने प्रकाश जावड़ेकर की जगह प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली है। एम वेंकटेशन सह-प्रभारी होंगे।

कर्नाटक की जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी को दी गई है, जबकि कसम वेंकटेश्वरलू सह-प्रभारी होंगे।

तमिलनाडु में राम माधव और तेलंगाना में सुनील बंसल के नेतृत्व वाली संगठनात्मक टीम के साथ BJP ने दक्षिण भारत के अलग-अलग राज्यों में वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

अन्य प्रमुख नियुक्तियां

बिप्लब कुमार देब को मध्य प्रदेश, डी पुरंदेश्वरी को ओडिशा, संजय भाटिया को राजस्थान, मृगांका देव बर्मन को त्रिपुरा और राजदीप रॉय को मणिपुर का प्रभारी बनाया गया है।

दिल्ली की जिम्मेदारी विनय सहस्रबुद्धे को मिली है। उनके साथ जामयांग त्सेरिंग नामग्याल और दर्शना जरदोश सह-प्रभारी होंगे।

बिहार में हरीश द्विवेदी प्रभारी होंगे, जबकि संगीता यादव और रोहन गुप्ता सह-प्रभारी बनाए गए हैं।

मीडिया और कम्युनिकेशन टीम में भी बदलाव

राज्य प्रभारियों के अलावा BJP ने अपने कम्युनिकेशन ढांचे में भी बदलाव किया है।

लोकसभा सांसद अनिल बलूनी को पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग का समन्वयक बनाया गया है। इस भूमिका में मीडिया और सोशल मीडिया दोनों शामिल होंगे।

वहीं आशीष उषा अग्रवाल को राष्ट्रीय मीडिया विभाग का संयोजक नियुक्त किया गया है।

चुनावी राज्यों पर क्यों बढ़ी नजर?

नई नियुक्तियों में उन राज्यों पर विशेष ध्यान दिखाई देता है जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

उत्तर प्रदेश में विनोद तावड़े, उत्तराखंड में राम माधव, पंजाब में सतीश पूनिया, गोवा में भारती प्रवीण पवार और गुजरात में तरुण चुग जैसे अनुभवी नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली है।

हालांकि इन नियुक्तियों को सीधे चुनावी रणनीति का अंतिम स्वरूप मानना जल्दबाजी होगी। पार्टी की ओर से घोषित पद मुख्य रूप से संगठनात्मक हैं। आने वाले महीनों में उम्मीदवार चयन, गठबंधन रणनीति, स्थानीय नेतृत्व और चुनाव प्रचार से जुड़े अलग फैसले भी महत्वपूर्ण होंगे।

इस फेरबदल का तत्काल असर राज्यों में केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश इकाइयों के बीच समन्वय पर दिखाई देगा, जबकि इसका चुनावी महत्व संबंधित राज्यों में आगामी राजनीतिक गतिविधियों के साथ अधिक स्पष्ट होगा।


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