BRICS के बीच BJP-Congress में बढ़ा राजनीतिक टकराव
नई दिल्ली में BRICS Summit के साथ ही घरेलू राजनीति में भारत की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को लेकर BJP और Congress के बीच तीखी बहस शुरू हो गई है।
BJP ने Congress और अन्य विपक्षी दलों पर BRICS तथा भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर “negative atmosphere” बनाने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि मौजूदा वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को देश की आर्थिक प्रगति और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
यह BJP का राजनीतिक दावा है और इसे सरकार के आर्थिक प्रदर्शन पर विपक्ष की आलोचना के जवाब के रूप में देखा जाना चाहिए।
Ravi Shankar Prasad ने Congress पर क्या कहा?
BJP के वरिष्ठ नेता और सांसद Ravi Shankar Prasad ने Congress के नेतृत्व वाली पूर्व UPA सरकार के आर्थिक रिकॉर्ड पर निशाना साधा।
Prasad ने दावा किया कि UPA के समय भारत की अर्थव्यवस्था कमजोर स्थिति में पहुंच गई थी, जबकि Narendra Modi सरकार के दौरान देश ने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। BJP ने इस तुलना के लिए भारत के दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने और हालिया आर्थिक वृद्धि जैसे संकेतकों का हवाला दिया।
BJP नेता ने अपने राजनीतिक हमले में कहा कि Congress ने भारत को “डुबोया”, जबकि BJP सरकार ने उसे फिर खड़ा किया। यह BJP की ओर से Congress के शासनकाल पर की गई राजनीतिक टिप्पणी है, स्वतंत्र आर्थिक निष्कर्ष नहीं।
‘Fragile Five’ से BRICS तक की तुलना
BJP ने अपने तर्क में भारत की पुरानी आर्थिक स्थिति और मौजूदा वैश्विक भूमिका की तुलना भी की।
Prasad ने कहा कि भारत को एक समय कमजोर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के संदर्भ में “Fragile Five” जैसे वर्गीकरण से जोड़ा जाता था, जबकि अब देश BRICS जैसे बड़े बहुपक्षीय मंच की मेजबानी कर रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका बढ़ी है।
हालांकि BRICS की मेजबानी, GDP growth और किसी देश की समग्र आर्थिक स्थिति अलग-अलग संकेतक हैं। इसलिए किसी सरकार के पूरे आर्थिक रिकॉर्ड का मूल्यांकन केवल किसी एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन या growth figure के आधार पर नहीं किया जा सकता।
P. Chidambaram के सवाल से शुरू हुआ विवाद
इस राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि में Congress के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री P. Chidambaram की BRICS को लेकर की गई टिप्पणी है।
Chidambaram ने सवाल उठाया था कि हाल की BRICS बैठकों से भारत को कौन से ठोस लाभ मिले हैं। उन्होंने कहा कि भारत BRICS के साथ SCO, G20 और QUAD जैसे कई अंतरराष्ट्रीय समूहों का हिस्सा है, लेकिन ऐसे मंचों के वास्तविक परिणामों का मूल्यांकन होना चाहिए।
BJP ने उनकी टिप्पणी को भारत की उपलब्धियों को कम करके आंकने वाला रुख बताया और इसका राजनीतिक जवाब दिया।
Shashi Tharoor का रुख Chidambaram से अलग
इस विवाद में एक दिलचस्प पहलू Congress सांसद Shashi Tharoor की प्रतिक्रिया रही।
Tharoor ने BRICS को लेकर Chidambaram की तुलना में अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने भारत की मेजबानी और इतने देशों को एक मंच पर लाने की क्षमता को महत्वपूर्ण बताया तथा BRICS को Global South के लिए उपयोगी मंच के रूप में रेखांकित किया।
BJP ने Congress के इन दोनों नेताओं की अलग-अलग टिप्पणियों को राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए इसे “Congress exposes Congress” कहा।
हालांकि Tharoor और Chidambaram की टिप्पणियां BRICS को अलग नजरिए से देखती हैं—एक उसकी diplomatic utility पर जोर देती है, जबकि दूसरी उसके tangible outcomes पर सवाल उठाती है।
BRICS में अर्थव्यवस्था खुद भी बड़ा मुद्दा
राजनीतिक बयानबाजी के बीच BRICS के आर्थिक एजेंडे पर वास्तविक नीतिगत चर्चा भी चल रही है।
BRICS देशों के finance ministers और central bank governors ने IMF और World Bank जैसी वैश्विक development financial institutions में सुधार की मांग की है। उनका जोर इन संस्थाओं को emerging economies के बदलते आर्थिक महत्व के अनुरूप अधिक representative, transparent और accountable बनाने पर है।
BRICS के भीतर cross-border payments को तेज, सुरक्षित और कम लागत वाला बनाने तथा payment systems के बीच interoperability बढ़ाने जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं।
इसलिए भारत में चल रही BJP-Congress बहस केवल घरेलू राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसके पीछे बड़ा सवाल यह भी है कि BRICS जैसे मंच भारत को व्यापार, वित्त, भुगतान व्यवस्था और वैश्विक संस्थागत सुधारों में कितने ठोस परिणाम दिला सकते हैं।
राजनीतिक बहस का असली सवाल क्या है?
BJP का तर्क भारत की आर्थिक वृद्धि और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर केंद्रित है, जबकि Congress के भीतर से BRICS के measurable benefits पर सवाल सामने आए हैं।
इन दोनों दावों के बीच फर्क महत्वपूर्ण है।
किसी summit की diplomatic value को केवल तत्काल आर्थिक समझौतों से नहीं मापा जा सकता। उसी तरह बड़े नेताओं की मौजूदगी या summit की सफल मेजबानी अपने आप यह साबित नहीं करती कि उससे देश को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिल चुका है।
BRICS Summit के बाद trade, investment, financial cooperation और institutional reforms से जुड़े वास्तविक outcomes इस बहस को आंकने के लिए अधिक ठोस आधार प्रदान करेंगे।
