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राजनीति

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन तेज, चुनाव आयोग तक मार्च के बाद बढ़ा सियासी टकराव

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है। INDIA गठबंधन के सांसदों ने दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने की कोशिश की, जबकि मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन तेज, चुनाव आयोग तक मार्च के बाद बढ़ा सियासी टकराव
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Reuters, The Indian Express और India Today

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन तेज, दिल्ली में प्रदर्शन के बाद सियासी लड़ाई गहराई

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध अब संसद और राजनीतिक बयानों से आगे बढ़कर सड़क पर बड़े प्रदर्शन का रूप लेता जा रहा है। INDIA गठबंधन के सांसदों ने 6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने की कोशिश की और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया।

विपक्ष का मुख्य आरोप मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) और कथित तौर पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़ा है। विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकार से जोड़ रहा है। हालांकि, ये विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग और भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोपों से इनकार किया है।

संसद से चुनाव आयोग तक मार्च की कोशिश

मंगलवार को विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार के पास एकत्र हुए और निर्वाचन आयोग के मुख्यालय की ओर बढ़े। इलाके में पहले से भारी सुरक्षा और बैरिकेडिंग की गई थी। पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद प्रदर्शन लंबा चला और राहुल गांधी सहित कई नेता धरने पर बैठ गए। बाद में पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

प्रदर्शन के दौरान विपक्ष की मांग थी कि CEC ज्ञानेश कुमार पद छोड़ें और मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर जवाबदेही तय की जाए। यह आंदोलन विपक्ष की पहले घोषित व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन और आगे दिल्ली में बड़ी रैली की योजना भी शामिल है।

विपक्ष के आरोप क्या हैं?

विपक्ष का कहना है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने देशभर में करोड़ों मतदाताओं के प्रभावित होने के दावे किए हैं। उदाहरण के तौर पर BJD नेता मानस मंगराज ने 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। ऐसे आंकड़े राजनीतिक दलों के दावे हैं और इन्हें चुनाव आयोग द्वारा स्वीकार किए गए आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

विपक्ष की व्यापक मांग है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी हो, पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित किए जाएं और चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया तथा फैसलों पर उठ रहे सवालों का जवाब दे।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

6 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि ने आयोग से बैठक के लिए औपचारिक समय नहीं मांगा था। आयोग के मुताबिक बाद में उसे पुलिस के माध्यम से जानकारी मिली कि विपक्षी सांसद Parliament House Annexe में आयोग से मिलना चाहते हैं। आयोग ने कहा कि स्थापित प्रोटोकॉल के तहत ऐसी बैठकें निर्वाचन आयोग के परिसर में होती हैं।

यह पक्ष महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदर्शन को लेकर दोनों तरफ से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। विपक्ष का जोर CEC से मुलाकात और जवाबदेही पर रहा, जबकि आयोग ने बैठक की प्रक्रिया और औपचारिक अनुरोध को लेकर अपना स्पष्टीकरण दिया।

आंदोलन का दायरा बढ़ने के संकेत

CEC के खिलाफ विरोध केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा है। 4 अक्टूबर को दिल्ली और मुंबई में भी प्रदर्शन हुए थे। मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई।

7 अक्टूबर को आम आदमी पार्टी ने भी दिल्ली में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही। इससे CEC और मतदाता सूची विवाद पर चल रहे राजनीतिक अभियान का दायरा और बढ़ता दिखाई देता है।

ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा भी स्थगित

इसी राजनीतिक माहौल के बीच CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का 7 और 8 अक्टूबर के लिए प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरा स्थगित कर दिया गया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने इसकी वजह “unavoidable reasons” बताई है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी प्रदर्शन को दौरा स्थगित होने का कारण नहीं बताती, इसलिए दोनों घटनाओं के बीच प्रत्यक्ष संबंध मानना उचित नहीं होगा।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

विवाद का मूल सवाल केवल किसी एक चुनाव अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। मतदाता सूची चुनावी व्यवस्था की बुनियादी संरचना है। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची में नहीं है, तो उसके मतदान के अधिकार पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के लिए डुप्लीकेट, मृत या अन्य अपात्र प्रविष्टियों को हटाकर मतदाता सूची को सही रखना भी आवश्यक प्रक्रिया है।

इसी कारण इस विवाद में आरोप और प्रमाण के बीच अंतर बनाए रखना महत्वपूर्ण है। विपक्ष द्वारा मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप राजनीतिक रूप से गंभीर हैं, लेकिन प्रत्येक दावे की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड, न्यायिक प्रक्रिया या स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ों के आधार पर ही की जानी चाहिए।

आगे क्या?

INDIA गठबंधन पहले ही देशव्यापी कार्यक्रम की रूपरेखा घोषित कर चुका है। इसमें अक्टूबर की शुरुआत में विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन और 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली की योजना शामिल है। ऐसे में CEC ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर विवाद आने वाले दिनों में भी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।

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