भाजपा को 13 सीटें, सहयोगियों ने जोड़ीं तीन जीत
प्रकाशित परिणामों के अनुसार, भाजपा ने अकेले 13 सीटों पर जीत दर्ज की। उसके सहयोगी जनता दल यूनाइटेड, जनता दल सेक्युलर और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को एक-एक सीट मिली। इस तरह एनडीए का कुल आंकड़ा 16 तक पहुंचा।
अन्य दलों में समाजवादी पार्टी को पांच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट को दो और कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल तथा जन सुराज को एक-एक सीट मिली। दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। यह वितरण बताता है कि एनडीए की कुल बढ़त के बावजूद विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों और स्थानीय उम्मीदवारों ने अपनी प्रभावी मौजूदगी बनाए रखी।
उत्तर प्रदेश में भाजपा आगे, सपा ने बढ़ाई चुनौती
उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच रहा। परिणाम संबंधी अद्यतन रिपोर्टों में भाजपा को छह और सपा को पांच सीटें मिलने की जानकारी दी गई है। वाराणसी के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सपा का प्रदर्शन विशेष राजनीतिक महत्व रखता है।
वाराणसी शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव ने भाजपा के प्रमोद कुमार मिश्रा को 5,015 मतों से हराया। वाराणसी स्नातक सीट की लंबी मतगणना ने भी राजनीतिक ध्यान खींचा। अलग-अलग समय पर प्रकाशित खबरों में इस सीट को लेकर रुझान और परिणाम की स्थिति अलग दिखाई दी। सुबह की कुछ रिपोर्टों में मतगणना जारी थी, जबकि अद्यतन परिणाम संकलनों में सपा की पांच सीटें दर्ज की गईं।
राजनीतिक विश्लेषण के स्तर पर यह प्रदर्शन सपा को संगठन मजबूत करने का अवसर देता है। हालांकि, इसे पूरे उत्तर प्रदेश के मतदाताओं की राय या आगामी विधानसभा चुनाव का निश्चित संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी को बढ़त
महाराष्ट्र की पांच सीटों में विपक्षी महा विकास आघाड़ी ने तीन और सत्तारूढ़ महायुति ने दो सीटें जीतीं। शरद पवार की पार्टी ने पुणे और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीटों पर सफलता हासिल की। भाजपा को पुणे शिक्षक और शिवसेना को अमरावती शिक्षक सीट मिली।
सबसे चर्चित मुकाबला नागपुर स्नातक सीट का रहा। कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराया। वंजारी को 67,231 और कोहले को 63,960 वोट मिले। नागपुर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह नगर होने के कारण यह परिणाम भाजपा के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है। कांग्रेस के लिए इस सीट को बरकरार रखना कमजोर समग्र प्रदर्शन के बीच राहत लेकर आया।
कर्नाटक में भाजपा-जदएस गठबंधन का पूरा दबदबा
कर्नाटक की चारों सीटें एनडीए के खाते में गईं। भाजपा ने तीन सीटें जीतीं, जबकि जनता दल सेक्युलर ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस से छीन लिया। भाजपा की सफलताओं में उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस का एक भी सीट नहीं जीत पाना उसके लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती है। इन परिणामों से भाजपा-जदएस गठबंधन को सरकार के खिलाफ अभियान तेज करने का अवसर मिला है। फिर भी, परिषद की इन सीटों का परिणाम और विधानसभा में सरकार का बहुमत अलग विषय हैं; दोनों को एक ही पैमाने पर नहीं देखा जाना चाहिए।
बिहार में एनडीए को चार, जन सुराज का खुला खाता
बिहार की आठ सीटों में भाजपा ने तीन और जदयू ने एक सीट जीती। राजद तथा जन सुराज को एक-एक सीट मिली, जबकि दो सीटें निर्दलीयों के खाते में गईं।
जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज की। इसके साथ पार्टी ने बिहार विधान परिषद में अपनी पहली चुनावी सफलता हासिल की। पटना शिक्षक सीट पर राजद के संजीव सिंह विजयी रहे। तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक सीटों पर निर्दलीयों की जीत ने स्थानीय स्तर पर स्थापित उम्मीदवारों की अहमियत भी सामने रखी।
बैलेट पेपर पर राजनीतिक बहस, नतीजों का सीमित अर्थ
इन चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। हालांकि, नागपुर में कांग्रेस की जीत के बाद उसे सभी 28 सीटों पर शून्य बताने वाली शुरुआती खबरें अद्यतन स्थिति नहीं दर्शातीं।
इन परिणामों का संतुलित आकलन जरूरी है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता सामान्य विधानसभा चुनाव के पूरे मतदाता वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं करते। इसलिए एनडीए की जीत को राष्ट्रीय जनादेश या विपक्ष की चुनिंदा सफलताओं को व्यापक सत्ता परिवर्तन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। ये नतीजे विशिष्ट मतदाता समूहों के बीच राजनीतिक पकड़ समझने में उपयोगी हैं।
