क्या है पूरा मामला?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी दलों द्वारा वोट चोरी, चुनावी सूची में बदलाव और छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनावी सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम गायब हैं। इसी संदर्भ में विपक्षी दलों द्वारा ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई है। दिल्ली की सड़कों पर बीते कई दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की जा रही है, जिसमें अलग-अलग छात्र समूहों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है। इसमें chockroch जनता पार्टी और इंडिया गठबंधन अहम भूमिका में हैं। सभी अपने-अपने तरीके से आंदोलन में भाग ले रहे हैं।
बीते 3 दिनों से दिल्ली में अलग-अलग समूहों द्वारा लगातार प्रदर्शन की कोशिश जारी है, लेकिन प्रदर्शन का प्रस्ताव पारित न होने की वजह से दिल्ली पुलिस सुरक्षा अधिनियमों के चलते प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन करने नहीं दे रही है, जिसके कारण पुलिस द्वारा लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर बल का भी प्रयोग किया जा रहा है।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन को रोकने के लिए अब तक 700 से ज्यादा लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। लेकिन प्रदर्शनकारी इतनी आसानी से रुकने वाले नहीं हैं। दिल्ली में अभी भी प्रदर्शन जोरों-शोरों से चल रहा है, और आज सोमवार को इंडिया गठबंधन के नेताओं द्वारा दिल्ली की सड़कों पर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया जाना है।
सैकड़ों प्रदर्शनकारी दिल्ली पुलिस की हिरासत में? क्या है पूरा सच? दिल्ली की मौजूद हालात ।
शनिवार को ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए सीजेपी द्वारा किए जा रहे आंदोलन में दिल्ली पुलिस और केंद्रीय बलों द्वारा कड़ी कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद रविवार को दिल्ली पुलिस ने थोड़ी ढील दे दी। कुछ मेट्रो स्टेशन खोल दिए गए और लोगों की आवाजाही पर रोकटोक को कम दिया गया। नेटवर्क सुविधाओं को फिर से उपलब्ध कराया गया, ताकि लोगों को परेशानी न हो।
लेकिन सेंट्रल दिल्ली में, जहां अभी भी प्रदर्शन को लेकर कड़े नियम लागू हैं, वहां पांच या दो से ज्यादा लोग दिखने पर पुलिस उन्हें हिरासत में ले रही है। इसके बावजूद रविवार को कुछ प्रदर्शनकारियों ने छोटे विरोध प्रदर्शन किए।
पूरी दिल्ली में तकरीबन 30,000 पुलिसकर्मियों और 200 अर्धसैनिक बलों की कंपनियों को तैनात किया गया है। शनिवार के विपरीत रविवार को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के 10 किलोमीटर के दायरे में आते-जाते वाहन की जांच नहीं की। लेकिन अशोक रोड, टॉल्स्टॉय रोड, जनपथ के साथ संसद स्ट्रीट की ओर जाने वाले प्रमुख रास्ते सील रहे। और केवल पहचान पत्र वालों को ही जाने की अनुमति थी।
जनपथ, सेवा तीर्थ और पटेल चौक के साथ बाकी प्रदर्शन स्थलों के पास के स्टेशनों पर रुके लोगों ने कहा कि शनिवार को हुई हिरासत के बाद वे विरोध प्रदर्शन में भाग लेने से भी डर रहे हैं।
वहीं, नई दिल्ली में जगह-जगह पर छोटे समूह इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने वाले थे, लेकिन वहाँ अचानक विरोध प्रदर्शन हुआ जिसे वामपंथी छात्र समूहों और राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित किया गया था। इसमें 700 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।
रविवार को दोपहर के समय अखिल भारतीय छात्र संघ और क्रांतिकारी युवा संगठन के 50-60 सदस्यों के एक समूह को पालिका बाजार के पास से दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके कुछ समय बाद सीपीआई सांसद जॉन ब्रिटास उसी क्षेत्र में पहुंचे और वे मीडिया से बात कर रहे थे, तभी उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। बाद में उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों पर मारपीट का आरोप लगाया।
वहीं, रविवार को एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद बड़ी भीड़ में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ने लगे और प्रदर्शनकारियों ने आर.के. आश्रम मार्ग के पास से प्रदर्शन शुरू किया। इसी बीच पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने का प्रयास किया और सैकड़ों की तादाद में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इस घटना में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भगदड़ की स्थिति बन गई थी। इसके बाद कनॉट प्लेस के पास भी मार्च हुआ, जिसमें नेहा बोरा सहित अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर लगातार हो रहे इस प्रदर्शन में अब प्रशासन भी सख्त हो चुका है, और दिल्ली पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा बल अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हट रहे हैं। विपक्षी दलों द्वारा केंद्र सरकार पर आरोपों का सिलसिला जारी है। प्रदर्शनकारियों का यह मानना है कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा ही अब दिल्ली में शांति लाएगा।
पुलिस की सख्ती से प्रदर्शन रुका तो नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं प्रदर्शनकारियों में थोड़ा भय जरूर है।
