क्या है मार्च का मुख्य कारण ?
विपक्षी पार्टी ऐसा दावा करती है की मतदाता सूची से बड़ी मात्रा मे कंडीडटेस के नाम हटाए जा रहे है, और Election Commission मे बड़ी मात्र मे घोटाला हो रहा है। जिस कारण इंडिया ब्लॉक का कहना है की CEC ज्ञानेश कुमार का रेज़िग्नैशन जरूरी है। वही 2 ऑक्टोबर से इस मार्च की शुरुआत हुई है। देश भर मे लोगों के अंदर वोट चोरी को लेके आक्रोश है , और अलग अलग जगहों पर लोग आंदोलन कर रहे है। वोटी चोरी को लेके शुरू हुआ यह प्रदर्शन आज बढ़ चुका है और इसी लिए इंडिया गठबंधन ने संसद भवन से मुख्य चुनाव आयोग कार्यालय तक " लोकतंत्र बचाओ मार्च निकाला है"।
CEC ज्ञानेशकुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन द्वारा लगाए गए आरोप ।
विपक्षी दलों का कहना है की मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए है , जिससे जनता के मतदान के अधिकार पर प्रभाव पड़ता है। सूची से कुल 13 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा है। जिस कारण विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग मे अधिक पारदर्शिता की मांग की है। ताकि चुनाव आयोग के काम करने का तारिक बेहतर हो सके और वोट धांधली रुक सके। काँग्रेस पार्टी के साथ अन्य विपक्षी दलों ने ज्ञानेशकुमार के इस्तीफे को आंदोलन का मुख्य मुद्दा भी बताया है। वही राहुल गांधी और विपक्षी दलों के नेता का ज्ञानेशकुमार पर आरोप है की उन्होंने form 6 मे एक तर्फे और गैर कानूनी बदलाव किए है। जो इलेक्शन कमिशन के नियमों का उलँघन करता है और आम आदमी के अधिकारों को छीनता है। वही ज्ञानेशकुमार पर SIR और चुनाव आयोग के काम करने के तरीके मे अपारदर्शिता का भी आरोप है।
इंडिया ब्लॉक गठबंधन द्वारा किए गए लोकतंत्र बचाओ मार्च का पूरा मामला क्या है?
विपक्षीय नेता मलिकार्जुन खगे और कॉंग्रेसी नेता राहुल गांधी सहित इंडिया ब्लॉक के अन्य सांसदों ने 6 ऑक्टोबर मंगलवार को संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च किया। लेकिन स्ट्रीट पर पुलिस ने आंदोलन कारियों को रोक दिया है। और प्रदर्शनकारी अब वही धरणे पर बैठ गए है। आंदोलन करने से रोकने के बाद प्रदर्शनकारी नीति आयोग कार्यालय के सामने आकाशवाणी भवन के पास बीच सड़क पर बैठ गए और जोरों शोरों मे नारे लगाना शुरू कर दिया। आंदोलनकारी विपक्षीय संसादों ने CEC ज्ञानेशकुमार की आरएसएस की वर्दी वाली फोटो के cutout लिए थे और जोरों शोरों से " वोट छोड़ो गद्दी छोड़ो " " भाजपा है मुख्य चुनाव आयुक्त है" और "लोकतंत्र बिकाऊ नहीं है जैसे नारे लगाने लगे।" TMC नेता अभिषेक बेनर्जी , डेरेक ओ ब्रायन , प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और CPI नेता जॉन ब्रिटास के साथ कई अन्य सांसद और नेता प्रदर्शन मे शामिल हुए।
आखिर क्यू DMK और आम आदमी पार्टी ने मार्च मे भाग लेने से बनाई दूरी?
सूत्रों के अनुसार, जब आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा संसद संजय सिंह से 6 ऑक्टोबर वाले आंदोलन मे शामिल न होने का कारण पूछा गया तो उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि , आम जनता पार्टी SIR के मुद्दे पर अपनी लड़ाई अलग से लड़ रही है। उनका मानना है की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के मामले मे देश के अलग अलग हिस्से मे रोज प्रदर्शन हो रहे है तो यह कोई एक पार्टी या गठबंधन का मामला नहीं है यह जनता का का मुद्दा है, जिससे जनता को निपटना चाहिए। इसलिए आम जनता पार्टी ने इंडिया ब्लॉक के मंगलवार वाले प्रदर्शन मे शामिल होने के बजाय, अपना प्रदर्शन अलग से करने का फैसला किया है। संजय सिंह ने यह भी कहा की आप आंदोलन मे आम जनता पार्टी का बैनर तक इस्तेमाल नहीं कर रही है। क्युकी वो इसे जनता के आंदोलन के रूप मे देखती है।
बता दे की, सांसदों द्वारा विरोध मार्च निकालने का निर्णय 30 सप्टेंबर को 19 विपक्षी दलों की बैठक मे लिया गया था। जिसके बाद ही इंडिया ब्लॉक ने कहा की उनके सभी सांसद आंदोलन मे हिस्सा लेंगे और चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। और voter list मे जो धांधली हुई है उसमे संशोधन करने और ऐसी चीजे दोबारा न हो इसलिए इस मुद्दे को हाइलाइट करते हुए राष्ट्रपति से बात करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक , DMK के आंदोलन से दूरी बनाने का मुख्य कारण है की DMK पार्टी ने 30 सप्टेंबर को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक मे हिस्सा नहीं लिया था।, जिसमे 6 ऑक्टोबर को संसद भवन से चुनाव आयोग तक होने वाली आंदोलन का जिक्र हुआ था। लेकिन ताजा रेपोर्ट्स के अनुसार, DMK पार्टी की तरफ से आंदोलन मे शामिल न होने के लिए कोई आधिकारिक बयान या जानकारी सामने नहीं आई है।
