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राजनीति

चुनाव आयोग विवाद पर INDIA ब्लॉक की बड़ी बैठक, EVM की जगह बैलेट पेपर समेत विपक्ष ने रखीं छह मांगें

चुनाव आयोग और SIR विवाद के बीच INDIA ब्लॉक के नेताओं ने नई दिल्ली में बैठक कर छह प्रमुख मांगें रखीं। विपक्ष ने EVM के बजाय बैलेट पेपर से मतदान, SIR से पहले की मतदाता सूची के इस्तेमाल, voter deletion से पहले उचित प्रक्रिया और Election Commission की जवाबदेही की मांग की।

चुनाव आयोग विवाद पर INDIA ब्लॉक की बड़ी बैठक, EVM की जगह बैलेट पेपर समेत विपक्ष ने रखीं छह मांगें
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: The Indian Express report | ECI — EVM/VVPAT

नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026: चुनाव आयोग और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच INDIA ब्लॉक के शीर्ष नेताओं ने बुधवार को नई दिल्ली में बैठक की। बैठक में विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए छह प्रमुख बिंदु सामने रखे। इनमें भविष्य के चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी शामिल है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक में कहा कि विपक्ष का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम अधिकार मतदाताओं के पास रहे। बैठक में 19 विपक्षी दलों की भागीदारी की जानकारी दी गई।

INDIA ब्लॉक की छह प्रमुख मांगें क्या हैं?

बैठक में खड़गे की ओर से रखे गए प्रस्तावों के अनुसार विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े छह प्रमुख बदलावों की मांग की।

  1. SIR से पहले की मतदाता सूची का इस्तेमाल: विपक्ष ने मांग की कि भविष्य के चुनावों के लिए Special Intensive Revision से पहले मौजूद electoral roll को आधार बनाया जाए।

  2. मतदाता सूची संशोधन में पूरी पारदर्शिता: प्रत्येक constituency और polling booth के स्तर पर मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और सुधार से संबंधित जानकारी सार्वजनिक और स्पष्ट तरीके से उपलब्ध कराई जाए।

  3. नाम हटाने से पहले उचित प्रक्रिया: किसी वैध मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे सूचना दी जाए, कारण बताया जाए और फैसले के खिलाफ प्रभावी अपील का अवसर मिले।

  4. योग्य मतदाताओं को बाहर होने से बचाना: प्रशासनिक चूक, पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध न होने या प्रक्रिया की जानकारी के अभाव के कारण पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित न हों।

  5. EVM के बजाय बैलेट पेपर: INDIA ब्लॉक ने चुनावों में Electronic Voting Machines के स्थान पर मतपत्रों के जरिए मतदान कराने की मांग की।

  6. Election Commission की संस्थागत जवाबदेही: विपक्ष ने ऐसी चुनावी व्यवस्था और आयोग की मांग की जिस पर राजनीतिक दलों के बीच व्यापक भरोसा कायम रह सके।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ?

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल के अलावा तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी तथा समाजवादी पार्टी, CPI, CPI(M), NCP (SP), शिवसेना (UBT) सहित कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार बैठक में कुल 19 दलों की भागीदारी थी।

SIR विवाद क्यों बना INDIA ब्लॉक की बैठक का केंद्र?

इस राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि में मतदाता सूचियों का Special Intensive Revision है। विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए और पूरी प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं रही।

हाल की रिपोर्टिंग में चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर असहमति की बात भी सामने आई है। Reuters के मुताबिक, Election Commission ने मतदाता सूची से जुड़े अपने सॉफ्टवेयर की समीक्षा शुरू की है। आयोग ने आंतरिक मतभेदों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि वह कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करता है।

इसलिए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों या किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के विपक्षी आरोपों को इस स्तर पर राजनीतिक आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से सिद्ध निष्कर्ष के रूप में।

EVM पर फिर क्यों तेज हुई बहस?

EVM बनाम बैलेट पेपर का मुद्दा भारत की राजनीति में नया नहीं है। विपक्षी दल अलग-अलग समय पर EVM और VVPAT से संबंधित सवाल उठाते रहे हैं। मौजूदा बैठक में बैलेट पेपर की वापसी को औपचारिक मांगों में शामिल करने से यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

दूसरी ओर, Election Commission का आधिकारिक रुख EVM के पक्ष में रहा है। आयोग के अनुसार भारतीय EVM standalone मशीनें हैं और चुनाव से पहले उनकी कई स्तरों पर जांच की जाती है। आयोग के मुताबिक First Level Checking के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मशीनों की physical और functional testing भी होती है। VVPAT में मतदाता को संबंधित पर्ची लगभग सात सेकंड तक दिखाई देती है।

इस वजह से INDIA ब्लॉक की बैलेट पेपर वाली मांग को Election Commission की मौजूदा व्यवस्था से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और नीतिगत मतभेद के रूप में देखा जा सकता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी बढ़ा दबाव

INDIA ब्लॉक की यह बैठक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच हुई है। विपक्षी दल पिछले कुछ हफ्तों से उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक SIR से जुड़े कुछ निर्णयों को लेकर अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की खबरों ने विवाद को और बढ़ाया है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि विपक्ष की इस्तीफे की मांग एक राजनीतिक मांग है। इसे अपने-आप में आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ किसी आरोप के न्यायिक या स्वतंत्र रूप से सिद्ध होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

यह घटनाक्रम क्यों महत्वपूर्ण है?

इस बैठक का महत्व केवल EVM और बैलेट पेपर की बहस तक सीमित नहीं है। विपक्ष ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, मतदाताओं को अपील का अवसर देने और Election Commission की संस्थागत जवाबदेही जैसे मुद्दों को एक साझा राजनीतिक एजेंडे में शामिल किया है।

इससे आने वाले समय में चुनाव सुधार, मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव आयोग के कामकाज पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। साथ ही, बैलेट पेपर पर लौटने की मांग के कारण मतदान प्रणाली को लेकर पुरानी बहस भी नए सिरे से सामने आ गई है।

अंततः इन मांगों का व्यावहारिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि Election Commission इन मुद्दों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या चुनावी नियमों या प्रक्रियाओं में कोई बदलाव किया जाता है।

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