दिल्ली की मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) 2026 को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस बार चर्चा के केंद्र में कोई सामान्य मतदाता ही नहीं, बल्कि दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta और पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal भी हैं।
Delhi Chief Electoral Officer के कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, SIR के दौरान लाखों मतदाताओं की entries को verification के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें वे मतदाता शामिल हैं जिन्हें पिछली revision की electoral roll से map नहीं किया जा सका या जिनके विवरण में “logical discrepancies” पाई गईं।
दिल्ली के Chief Electoral Officer Ashok Kumar के मुताबिक, जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में ऐसी समस्याएं मिली हैं, उन्हें supporting documents देने के लिए notices भेजे जा रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि notice मिलना अपने-आप में किसी मतदाता की अयोग्यता या नाम के अंतिम रूप से हटाए जाने का फैसला नहीं है।
Arvind Kejriwal और परिवार को क्यों मिला Notice?
Arvind Kejriwal के साथ उनकी पत्नी Sunita Kejriwal, बेटे Pulkit Kejriwal, पिता Gobind Ram Kejriwal और मां Gita Devi को भी notices जारी किए गए हैं।
ये सभी “Unmapped with Last SIR” category में आए हैं।
New Delhi के Electoral Registration Officer (ERO) ने इस मामले में कहा कि Kejriwal परिवार द्वारा जमा किए गए Enumeration Forms में पिछली revision की संबंधित electoral rolls से उनकी entries को link करने के लिए जरूरी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
ERO के मुताबिक, ऐसे मतदाताओं को notices जारी किए जा रहे हैं जिन्हें पिछली revision की electoral roll से link नहीं किया जा सका या जिनकी mapping में logical discrepancies पाई गई हैं।
इसका अर्थ यह है कि notice को सीधे “voter list से नाम हट गया” के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित मतदाताओं को अब ERO के सामने जरूरी जानकारी और दस्तावेज जमा करने होंगे।
Kejriwal परिवार अकेला नहीं, Part-51 में 110 Voters को Notice
Arvind Kejriwal और उनके परिवार के पांच सदस्य उन 110 मतदाताओं में शामिल हैं जिन्हें New Delhi Assembly constituency के Part-51, KG Marg में notices जारी किए गए हैं।
चुनाव अधिकारियों के मुताबिक SIR में “unmapped” voter वह है जिसकी मौजूदा electoral-roll entry को पिछली SIR की संबंधित voter list से सफलतापूर्वक match नहीं किया जा सका।
ऐसे मतदाता supporting documents देकर अपनी eligibility और electoral record का सत्यापन करा सकते हैं। Notices का निपटारा 29 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का कार्यक्रम है।
CM Rekha Gupta को क्यों मिला था Notice?
दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta भी SIR के दौरान notice पाने वाले मतदाताओं में शामिल थीं, लेकिन उनका मामला Kejriwal परिवार से अलग था।
Election officials के मुताबिक Gupta की enumeration details में age-related discrepancy flag हुई थी। अन्य रिपोर्टिंग के अनुसार voter records में उनके और उनके माता-पिता के बीच उम्र का अंतर 15 साल से कम दिखाई दे रहा था, जिसे logical discrepancy के रूप में चिह्नित किया गया।
इसके बाद designated Booth Level Officer (BLO) ने physical verification किया।
Gupta की ओर से उपलब्ध कराए गए तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद उनकी electoral entry validate कर दी गई। अधिकारियों के मुताबिक उनका नाम AC-14 Shalimar Bagh की final electoral roll में शामिल करने के लिए रखा गया है, जिसका प्रकाशन 4 नवंबर 2026 को निर्धारित है।
यानी Rekha Gupta को notice जरूर मिला था, लेकिन उनका verification पूरा होने के बाद संबंधित discrepancy को clear कर दिया गया है।
आखिर कितने Voters को मिले Notice?
अलग-अलग रिपोर्टों में headline figures में मामूली अंतर दिखाई देता है, इसलिए संख्या को संदर्भ के साथ समझना जरूरी है।
Delhi poll body के शनिवार के बयान के मुताबिक 33 लाख के करीब voters को discrepancies के लिए चिह्नित किया गया था और उनमें से 31,63,930 को उस समय तक notices भेजे जा चुके थे।
Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार draft electoral roll में कुल 9,753,577 electors थे। इनमें 1,379,785 को “no mapping” और 1,933,134 को “logical discrepancies” category में रखा गया।
इसलिए Rekha Gupta या Kejriwal परिवार को मिले notices को अकेले किसी एक राजनीतिक नेता के खिलाफ कार्रवाई के रूप में देखना उपलब्ध आंकड़ों की पूरी तस्वीर नहीं दिखाता—verification exercise में लाखों अन्य electors भी शामिल हैं।
AAP ने उठाए सवाल
Kejriwal और उनके परिवार को notice मिलने के बाद Aam Aadmi Party (AAP) ने चुनाव अधिकारियों पर सवाल उठाए।
AAP ने पूछा कि दिल्ली के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके Arvind Kejriwal और उनके परिवार के सदस्यों के electoral records को लेकर ऐसी स्थिति कैसे पैदा हो सकती है। पार्टी ने इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठाए हैं।
यह AAP का राजनीतिक आरोप है; उपलब्ध चुनाव-अधिकारी स्पष्टीकरण इसे स्थापित तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं करता। ERO का कहना है कि notices निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन सभी electors को दिए जा रहे हैं जिनकी पिछली electoral roll से mapping नहीं हो सकी या जिनके records में logical discrepancy मिली।
Draft Voter List से 47.6 लाख नाम क्यों बाहर हुए?
दिल्ली में SIR की व्यापकता समझने के लिए draft electoral roll के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं।
31 अगस्त को प्रकाशित draft roll में करीब 97.5 लाख voters शामिल थे, जबकि जून में SIR शुरू होने के समय दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ registered electors थे। करीब 47.6 लाख नाम draft roll में शामिल नहीं हुए।
इनमें करीब 43.3 लाख लोगों को absent या shifted, करीब 2.8 लाख को deceased और लगभग 1.4 लाख entries को duplicate के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
यहां भी एक महत्वपूर्ण अंतर है: draft roll में नाम न होना अपने-आप में eligibility पर अंतिम निर्णय नहीं है। Claims और objections की प्रक्रिया इसी कारण रखी गई है।
Voters के पास अब क्या विकल्प है?
जिन लोगों की enumeration forms SIR के दौरान प्राप्त नहीं हुईं या जिनका नाम draft electoral roll में नहीं आया, उनके लिए claims process उपलब्ध है।
Election authorities के मुताबिक पात्र मतदाता Form 6 और जरूरी supporting documents के जरिए electoral roll में inclusion के लिए आवेदन कर सकते हैं। Claims और objections की अवधि 30 सितंबर 2026 तक खुली है।
दिल्ली में electoral officials द्वारा camps भी लगाए जा रहे हैं जहां मतदाताओं के claims और objections पर सुनवाई की जा रही है। Chief Electoral Officer Ashok Kumar ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर camps की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
Final Delhi Voter List कब आएगी?
SIR प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
Notices से जुड़े मामलों का disposal 29 अक्टूबर 2026 तक पूरा किए जाने का कार्यक्रम है, जबकि final electoral roll 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होनी है।
इसलिए मौजूदा draft list, discrepancy notice और final electoral roll को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए। Notice का उद्देश्य संबंधित elector से अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज लेकर entry का verification करना है।
Rekha Gupta और Kejriwal के मामलों में क्या अंतर है?
दोनों नेताओं को SIR प्रक्रिया में notice मिला, लेकिन कारण एक जैसे नहीं थे।
Rekha Gupta की entry में age-related logical discrepancy flag हुई थी। Physical verification और documents की जांच के बाद उनकी entry validate कर दी गई है। दूसरी ओर, Arvind Kejriwal और उनके परिवार को “Unmapped with Last SIR” category में notice मिला क्योंकि ERO के मुताबिक उनके Enumeration Forms में पिछली revision की electoral roll से linkage स्थापित करने के लिए पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
यही अंतर इस पूरे विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
