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राजनीति

दिल्ली में 1 नवंबर की कांग्रेस महारैली पर बढ़ा विवाद, दिवाली से पहले ₹10,000 करोड़ के कारोबार पर संकट की आशंका।

दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली ने राजनीतिक हलचल के साथ व्यापारिक संगठनों की चिंता भी बढ़ा दी है। दिवाली से ठीक पहले होने वाले इस प्रदर्शन को लेकर व्यापारियों का कहना है कि भारी भीड़, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रतिबंधों से राजधानी के प्रमुख बाजारों का कारोबार प्रभावित हो सकता है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है।

दिल्ली में 1 नवंबर की कांग्रेस महारैली पर बढ़ा विवाद, दिवाली से पहले ₹10,000 करोड़ के कारोबार पर संकट की आशंका।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: THE ECONOMIC TIMES, HINDUSTAN TIMES, INDIA TODAY, NDTV, INDIAN EXPRESS,

रामलीला मैदान में बड़ी राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नवंबर की शुरुआत एक बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के साथ होने वाली है। कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में विशाल जनसभा आयोजित करने की योजना बनाई है। इस रैली का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ राजनीतिक दबाव बढ़ाना है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोगों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा रही है। कांग्रेस के अनुसार, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता लोकतंत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। हालांकि, चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

व्यापारियों ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर जताई चिंता

कांग्रेस की राजनीतिक तैयारियों के बीच दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने रैली की तारीख पर आपत्ति जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि रैली को दिवाली और भाई दूज के बाद आयोजित किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि 6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को दिवाली और 10 नवंबर को भाई दूज होने के कारण नवंबर का पहला सप्ताह खरीदारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से 1 नवंबर को रविवार होने के कारण बाजारों में ग्राहकों की अच्छी आवाजाही की उम्मीद है। ऐसे समय में बड़े राजनीतिक कार्यक्रम से सड़कें बंद होने या आवाजाही बाधित होने पर दुकानदारों की बिक्री प्रभावित हो सकती है।

₹10,000 करोड़ के नुकसान का दावा कितना गंभीर?

व्यापारिक संगठन CTI ने आशंका जताई है कि राजनीतिक प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण त्योहारी कारोबार पर लगभग ₹10,000 करोड़ तक का असर पड़ सकता है। संगठन के अनुसार, दिल्ली में धनतेरस और दिवाली के आसपास सोना-चांदी, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, बर्तन, वाहन और घरेलू सामान की खरीदारी बढ़ जाती है। CTI का दावा है कि इस अवधि में दिल्ली का त्योहारी कारोबार लगभग ₹25,000 करोड़ तक पहुंचता है।

हालांकि, ₹10,000 करोड़ का आंकड़ा व्यापारिक संगठन की आशंका है, वास्तविक या प्रमाणित नुकसान नहीं। रैली आयोजित होने से पहले यह तय नहीं किया जा सकता कि कारोबार पर कितना आर्थिक प्रभाव पड़ेगा। व्यापारियों का कहना है कि पहले से प्रभावित कारोबार के लिए त्योहारी सीजन में एक और बड़ी बाधा आर्थिक मुश्किलें बढ़ा सकती है।

दिल्ली के इन प्रमुख बाजारों पर पड़ सकता है असर

रामलीला मैदान के आसपास पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली के कई प्रमुख थोक एवं खुदरा बाजार स्थित हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, नया बाजार, दरियागंज और कश्मीरी गेट जैसे व्यापारिक क्षेत्र शामिल हैं। CTI के अनुसार, मैदान के लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में 20 से अधिक बड़े बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।

संगठन का दावा है कि रैली में लगभग 10 लाख लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इतनी बड़ी भीड़ पहुंचने की स्थिति में यातायात व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन बड़ी चुनौती बन सकते हैं। व्यापारियों को डर है कि बैरिकेडिंग, सड़क मार्गों में बदलाव और सार्वजनिक परिवहन पर संभावित प्रतिबंधों से बाहरी राज्यों से आने वाले खरीदारों को परेशानी हो सकती है। हालांकि, इन संभावित प्रतिबंधों को अभी लागू आदेश नहीं समझना चाहिए।

कश्मीरी गेट पर व्यापारियों का विरोध प्रदर्शन

रैली के विरोध में 26 अक्टूबर को दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में व्यापारियों ने प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस से आग्रह किया कि राजनीतिक कार्यक्रम दिवाली के बाद आयोजित किया जाए, ताकि दुकानदारों और ग्राहकों को परेशानी न हो। सदर बाजार के व्यापारिक संगठनों ने भी इस मांग का समर्थन किया। व्यापारियों ने अक्टूबर में पहले हुए प्रदर्शनों और यातायात प्रतिबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि सड़कें बंद होने से कारोबार पर असर पड़ा था।

उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन करना राजनीतिक दलों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उसके साथ आम नागरिकों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

राहुल गांधी ने क्या दिया जवाब?

व्यापारियों की चिंता के बीच राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने व्यापारियों की परेशानियों को स्वीकार करते हुए आरोप लगाया कि सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियों के कारण दिल्ली में कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। राहुल गांधी ने मतदाता सूची से जुड़े कथित विवाद को आम लोगों के आर्थिक हितों से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग दोहराई। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी महंगाई और आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों का मुद्दा उठाया। इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि कांग्रेस फिलहाल अपनी राजनीतिक मांगों को लेकर पीछे हटने के बजाय अभियान जारी रखने के पक्ष में है।

दिल्ली पुलिस से मिली रैली की अनुमति

कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली के लिए दिल्ली पुलिस पहले ही अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी कर चुकी है। 17 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम से रामलीला मैदान की उपलब्धता की पुष्टि मिलने के बाद कांग्रेस ने पुलिस से अनुमति मांगी थी। मध्य दिल्ली के पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा आवश्यकताओं का आकलन करने और पार्टी प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद रैली की अनुमति दी थी। इससे कांग्रेस को आयोजन की तैयारी आगे बढ़ाने का रास्ता मिला है। हालांकि, कार्यक्रम के दिन यातायात और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं अलग से लागू की जा सकती हैं।

क्या बदलेगी रैली की तारीख?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि व्यापारियों की अपील के बाद कांग्रेस अपना फैसला बदलेगी या नहीं। व्यापारिक संगठनों ने रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने या किसी वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग उठाई है। दूसरी ओर, 27 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने का रुख बरकरार रखा है। यह विवाद अब राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के अधिकार और त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु रखने की आवश्यकता के बीच संतुलन का प्रश्न बन गया है। आने वाले दिनों में प्रशासन की यातायात योजना, विपक्षी दलों की तैयारियों और व्यापारिक संगठनों के अगले कदम पर सभी की निगाहें रहेंगी।

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