इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित विपक्षी दलों के नेताओं, सांसदों, कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की खबर है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से आम नागरिकों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाने के लिए पुनरीक्षण की प्रक्रिया आवश्यक है। इस मुद्दे ने केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।
रामलीला मैदान में जुटे विपक्षी दल, 'वोट बचाओ, देश बचाओ' का नारा
INDIA गठबंधन ने इस प्रदर्शन को 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान के तहत आयोजित किया है। दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान को इस राजनीतिक कार्यक्रम का केंद्र बनाया गया। विपक्षी दलों ने लोगों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की थी। राहुल गांधी ने छात्रों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से भी इस अभियान में भाग लेने का आह्वान किया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उत्तर भारत के अलग-अलग राज्यों से विपक्षी दलों के समर्थक दिल्ली पहुंचे। पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सहित कई क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं ने भी इस आंदोलन में भाग लिया।
रैली का एक प्रमुख हिस्सा मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक प्रस्तावित मार्च है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह केवल किसी एक राजनीतिक दल का विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा है।
क्यों हो रही है मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग?
इस पूरे विवाद के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं। INDIA गठबंधन के नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR की प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी योग्य नागरिक का नाम बिना उचित जांच के नहीं हटाया जाना चाहिए।
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसी आधार पर गठबंधन ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप अभी राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें चुनाव आयोग की ओर से प्रमाणित अनियमितता या किसी चुनाव में धोखाधड़ी का स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
SIR क्या है और इसे लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है, जिसे हिंदी में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कहा जाता है। इस प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की विस्तृत जांच करता है। इसका उद्देश्य मृत व्यक्तियों, स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं, दोहरी प्रविष्टियों और अन्य अपात्र नामों की पहचान करना तथा पात्र नागरिकों के विवरण को सही रखना है।
लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की चिंता यह है कि यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटा दिया जाता है, तो वह चुनाव में मतदान करने के अधिकार से वंचित हो सकता है।
रॉयटर्स की 1 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष से चल रही पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। रिपोर्ट में इन नामों में लगभग 2.8 करोड़ मृत मतदाता, 6.3 करोड़ स्थानांतरित मतदाता और 3 करोड़ ऐसे लोग शामिल बताए गए हैं जिनका पता नहीं लगाया जा सका।
विपक्ष ने इन आंकड़ों और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ विपक्षी नेताओं का आरोप है कि नाम हटाए जाने का असर अल्पसंख्यक समुदायों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, चुनाव आयोग और बीजेपी ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
राहुल गांधी और विपक्ष ने चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा उठाया
इस प्रदर्शन में राहुल गांधी की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने पहले भी चुनावी प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी का कहना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित रहना चाहिए। यदि मतदाता सूची में किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है, तो उसका सीधा असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को संसद के बाहर भी उठाने का फैसला किया है। विपक्ष की रणनीति इस अभियान को केवल दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय राज्यों, जिलों और स्थानीय स्तर तक पहुंचाने की है।
प्रदर्शन से पहले विपक्ष का सांकेतिक महाभियोग कार्यक्रम
रामलीला मैदान में आयोजित रैली से एक दिन पहले यानी 31 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक सांकेतिक सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया था।
इस कार्यक्रम में विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
हालांकि, यह एक राजनीतिक और प्रतीकात्मक कार्यक्रम था, न कि संसद में संविधान के तहत शुरू की गई औपचारिक महाभियोग प्रक्रिया। इस घटनाक्रम के बाद 1 नवंबर की रैली को विपक्ष के अभियान की अगली बड़ी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, यातायात पर भी असर
INDIA गठबंधन की रैली को देखते हुए दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। रामलीला मैदान और आसपास के क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाई गई है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की गई है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रैली में लगभग 50 हजार लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया था। वहीं, आयोजन से जुड़े नेताओं ने इससे कहीं अधिक लोगों के पहुंचने की संभावना जताई थी।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भीड़ को देखते हुए मध्य दिल्ली के कई इलाकों में यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन की व्यवस्था की है। मिंटो रोड, आईटीओ, दिल्ली गेट और आसपास के क्षेत्रों में यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई।
बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों पर उठाए सवाल
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने INDIA गठबंधन के प्रदर्शन और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों की आलोचना की है। बीजेपी का कहना है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का पक्ष है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। यदि किसी योग्य मतदाता का नाम गलती से हट गया है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे दोबारा सूची में शामिल कराने का विकल्प उपलब्ध है।
इस तरह एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी और चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को नियमित चुनावी सुधार का हिस्सा बता रहे हैं।
