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राजनीति

दिल्ली SIR पर राहुल गांधी का नया आरोप: बेला एस्टेट के 727 मतदाताओं के नाम हटाने पर उठाए सवाल

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली के बेला एस्टेट का मामला उठाते हुए दावा किया है कि Special Intensive Revision (SIR) के बाद वहां रहने वाले 728 लोगों में से केवल एक व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में रह गया, जबकि 727 नाम हटा दिए गए। दिल्ली के चुनाव अधिकारियों ने इस आरोप पर अलग स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि संबंधित स्थानों पर पहले बने मकान 2022-23 में ध्वस्त हो चुके थे और सत्यापन के दौरान कई मतदाता दर्ज पते पर सामान्य रूप से निवास करते नहीं मिले।

दिल्ली SIR पर राहुल गांधी का नया आरोप: बेला एस्टेट के 727 मतदाताओं के नाम हटाने पर उठाए सवाल
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: राहुल गांधी का सार्वजनिक बयान, दिल्ली चुनाव अधिकारियों का स्पष्टीकरण तथा NDTV, India Today और Reuters की रिपोर्टिंग।

बेला एस्टेट के मतदाताओं को लेकर राहुल गांधी ने उठाया मुद्दा

नई दिल्ली में मतदाता सूची के Special Intensive Revision को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यमुना किनारे स्थित बेला एस्टेट का मामला सामने रखा है।

राहुल गांधी ने इलाके का दौरा करने के बाद दावा किया कि बेला एस्टेट में रहने वाले 728 लोगों में से SIR के बाद केवल एक व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में बचा है और बाकी 727 लोगों के नाम हटा दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि इनमें से कई लोग वर्षों से इलाके में रह रहे हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव तथा 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदान कर चुके थे। राहुल गांधी के मुताबिक, 2023 में उनके मकान ध्वस्त किए जाने के बावजूद कई निवासी उसी इलाके में बने रहे।

राहुल गांधी ने SDM से भी की बात

राहुल गांधी ने बेला एस्टेट के निवासियों से मुलाकात के दौरान स्थानीय प्रशासन के एक अधिकारी से फोन पर बातचीत भी की।

उनका तर्क था कि स्थायी मकान नहीं होने के कारण किसी पात्र नागरिक का मतदाता के रूप में पंजीकरण अपने-आप समाप्त नहीं होना चाहिए। उन्होंने बेघर मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले "House Number 0" प्रावधान का भी उल्लेख किया।

राहुल गांधी ने इन exclusions को "vote theft" यानी वोट चोरी का तरीका बताया। यह कांग्रेस नेता का आरोप है; उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

आंकड़ों में क्यों दिखाई दे रहा है अंतर?

इस मामले में संख्या को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आया है।

राहुल गांधी ने 728 निवासियों में से 727 नाम हटाए जाने की बात कही है। वहीं, संबंधित polling part के draft electoral roll पर आधारित कुछ रिपोर्टों में पहले 729 पंजीकृत मतदाता होने और उनमें से 728 के draft roll से बाहर होने की जानकारी दी गई है।

इसलिए 727 का आंकड़ा राहुल गांधी द्वारा बताए गए निवासियों की संख्या से संबंधित है, जबकि 728 exclusions का दूसरा आंकड़ा polling-part electoral records पर आधारित बताया गया है।

यह अंतर खबर को रिपोर्ट करते समय महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों संख्याओं को एक ही आधिकारिक आंकड़ा बताना भ्रामक हो सकता है।

चुनाव अधिकारियों ने क्या स्पष्टीकरण दिया?

दिल्ली के चुनाव अधिकारियों ने राहुल गांधी के आरोपों से अलग तस्वीर पेश की है।

दिल्ली के Chief Electoral Officer की ओर से सामने आए स्पष्टीकरण के मुताबिक, पुराने electoral records में कई मतदाताओं के पते उस भूमि से जुड़े थे जहां पहले आवासीय ढांचे मौजूद थे। उन ढांचों को 2022-23 के दौरान ध्वस्त किए जाने के बाद SIR के दौरान Booth Level Officers ने पंजीकृत पतों का सत्यापन किया।

चुनाव अधिकारियों का कहना है कि कई मतदाता उन दर्ज पतों पर सामान्य रूप से निवास करते नहीं मिले। अधिकारियों ने यह भी कहा कि पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने के लिए Form 6 के जरिए आवेदन कर सकते हैं।

इसलिए draft roll से नाम बाहर होना और किसी नागरिक का मतदान अधिकार स्थायी रूप से समाप्त हो जाना एक ही बात नहीं है।

'Shifted' श्रेणी पर निवासियों की आपत्ति

विवाद का एक प्रमुख हिस्सा इस सवाल से जुड़ा है कि क्या संबंधित मतदाता वास्तव में बेला एस्टेट छोड़कर चले गए थे।

रिपोर्टों के मुताबिक, कई निवासियों ने खुद को "shifted" माने जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मकान ध्वस्त होने के बाद वे इलाके से पूरी तरह बाहर नहीं गए और आसपास ही रह रहे हैं।

यहीं राहुल गांधी और चुनाव अधिकारियों के दावों के बीच मूल विवाद दिखाई देता है—एक पक्ष वास्तविक निवास और मतदान के पिछले रिकॉर्ड पर जोर दे रहा है, जबकि चुनाव प्रशासन registered address और ordinary residence के सत्यापन की प्रक्रिया का हवाला दे रहा है।

मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

मतदाता सूची किसी भी चुनाव की बुनियादी व्यवस्था है। किसी पात्र नागरिक का नाम सूची में नहीं होने पर वह मतदान नहीं कर सकता, इसलिए electoral-roll revision में accuracy और transparency दोनों महत्वपूर्ण हैं।

साथ ही, मतदाता सूची को अपडेट करना भी आवश्यक होता है क्योंकि मृत्यु, स्थान परिवर्तन, duplicate registration और अन्य कारणों से पुराने रिकॉर्ड में बदलाव की जरूरत पड़ती है।

इसी वजह से बेला एस्टेट विवाद का मुख्य सवाल केवल यह नहीं है कि कितने नाम draft list से बाहर हुए। महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि exclusions किन कारणों से हुए, सत्यापन प्रक्रिया कैसे लागू की गई और पात्र मतदाताओं को अपना नाम वापस जोड़ने के लिए कितना प्रभावी अवसर मिलता है।

देशभर में SIR को लेकर चल रहा व्यापक विवाद

बेला एस्टेट का मामला ऐसे समय सामने आया है जब मतदाता सूचियों के व्यापक verification अभियान को लेकर चुनाव आयोग विपक्षी दलों की आलोचना का सामना कर रहा है।

Reuters की 28 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी दलों ने बड़े पैमाने पर exclusions और प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि deletions निर्धारित कानूनी कारणों और प्रक्रियाओं के तहत किए जाते हैं तथा पात्र मतदाताओं के लिए inclusion और appeal के रास्ते उपलब्ध हैं।

चुनाव आयोग ने voter-roll software की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने और discrepancies वाले मतदाताओं तक अधिकारियों द्वारा सीधे पहुंचने जैसे procedural changes की भी घोषणा की है।

बेला एस्टेट मामले में आगे क्या?

इस मामले में अंतिम निष्कर्ष के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रभावित निवासियों के applications और verification का परिणाम क्या रहता है और final electoral roll में कितने पात्र मतदाताओं के नाम शामिल होते हैं।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी दो अलग पहलुओं को सामने रखती है: राहुल गांधी और प्रभावित निवासियों का कहना है कि पात्र मतदाताओं को गलत तरीके से सूची से बाहर किया गया, जबकि चुनाव अधिकारियों का कहना है कि exclusions residence verification के आधार पर हुए और पात्र नागरिकों के पास पुनः पंजीकरण का विकल्प मौजूद है।

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