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राजनीति

DUSU चुनाव में NSUI का खाता भी नहीं खुला: राहुल गांधी नाराज बताए गए, कांग्रेस में हार के कारणों पर मंथन

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 में ABVP ने चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की, जबकि NSUI एक भी केंद्रीय पद नहीं जीत सकी। मीडिया रिपोर्टों में कांग्रेस सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि राहुल गांधी और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व नतीजों से असंतुष्ट है और चुनाव प्रबंधन, उम्मीदवार चयन तथा संगठन के भीतर मतभेदों की समीक्षा की जा रही है। संभावित संगठनात्मक कार्रवाई की भी चर्चा है।

DUSU चुनाव में NSUI का खाता भी नहीं खुला: राहुल गांधी नाराज बताए गए, कांग्रेस में हार के कारणों पर मंथन
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: The Economic Times

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों ने कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के सामने गंभीर संगठनात्मक सवाल खड़े कर दिए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार केंद्रीय पदों में से अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—तीन पद अपने नाम किए, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीता। NSUI चारों केंद्रीय पदों पर जीत दर्ज करने में विफल रही।

इस हार के बाद कांग्रेस के भीतर चुनावी रणनीति की समीक्षा शुरू होने की खबरें हैं। मीडिया रिपोर्टों में पार्टी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व NSUI के प्रदर्शन से नाराज है। सूत्रों के अनुसार चुनाव अभियान के संचालन, उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक समन्वय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इन संभावित कार्रवाइयों का औपचारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

ABVP ने तीन प्रमुख पद जीते

DUSU चुनाव के नतीजों में ABVP के यश डबास ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। उन्हें 24,576 वोट मिले, जबकि NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। इस तरह अध्यक्ष पद पर जीत का अंतर 2,053 वोट रहा।

सचिव पद पर ABVP की रिया छाबड़ी ने जीत दर्ज की। उन्हें 21,650 वोट मिले, जबकि NSUI की नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले। संयुक्त सचिव पद भी ABVP के खाते में गया।

इन परिणामों के साथ ABVP ने DUSU के चार केंद्रीय पदों में से तीन पर कब्जा किया और NSUI किसी भी केंद्रीय पद पर जीत हासिल नहीं कर सकी।

दीपांशु शौकीन की जीत ने बढ़ाई NSUI की मुश्किल

चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला। दीपांशु शौकीन, जिन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, 30,615 वोट हासिल कर उपाध्यक्ष बने।

ABVP के ईशु मौर्य को 16,910 वोट मिले, जबकि NSUI के वीर चतरथ 4,313 वोट हासिल कर सके। रिपोर्टों के मुताबिक शौकीन NSUI से जुड़े रहे थे और टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे थे।

उनकी जीत NSUI के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण राजनीतिक और संगठनात्मक संकेत मानी जा रही है क्योंकि पार्टी समर्थित आधिकारिक उम्मीदवार से कहीं अधिक वोट एक पूर्व NSUI नेता ने निर्दलीय लड़कर हासिल किए।

राहुल गांधी ने रिपोर्ट मांगी: मीडिया रिपोर्ट

NDTV की एक रिपोर्ट में कांग्रेस के वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि राहुल गांधी ने चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से परिणामों की जानकारी ली और हार के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट के अनुसार यह बातचीत राहुल गांधी के 19 सितंबर के इंदौर स्थित कार्यक्रम के बाद हुई।

इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी के भीतर NSUI की चुनावी रणनीति और उससे जुड़े पदाधिकारियों की भूमिका पर चर्चा हो रही है। किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का अंतिम फैसला होने की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

चुनाव प्रबंधन और उम्मीदवार चयन पर सवाल

ANI की सूत्र-आधारित रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व में NSUI के campaign strategy, candidate selection और overall election management को लेकर असंतोष है।

सूत्रों का दावा है कि संगठन की राज्य इकाई के भीतर मतभेद और बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी ने भी NSUI की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया। कांग्रेस नेतृत्व मामले को गंभीरता से देख रहा है और जिम्मेदारी तय किए जाने की संभावना जताई गई है। ये दावे पार्टी सूत्रों पर आधारित हैं; कांग्रेस ने इन बिंदुओं पर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

NSUI प्रभारी की भूमिका भी चर्चा में

हार के बाद NSUI से जुड़े चुनावी प्रबंधन और नेतृत्व की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। NDTV की रिपोर्ट में विशेष रूप से कन्हैया कुमार की भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर सवाल उठने का उल्लेख किया गया है। हालांकि रिपोर्ट में संभावित कार्रवाई को अंतिम निर्णय के बजाय समीक्षा और रिपोर्ट मिलने के बाद लिए जाने वाले फैसले के रूप में बताया गया है।

इसलिए इस स्तर पर किसी पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई को तय मानना सही नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के भीतर समीक्षा और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हुई है।

'छात्रों की गूंज' अभियान के बीच आया नतीजा

DUSU चुनाव का परिणाम कांग्रेस के लिए इसलिए भी ध्यान खींचता है क्योंकि राहुल गांधी हाल में युवाओं और छात्रों से जुड़ने के लिए 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत कार्यक्रम कर रहे थे। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने DUSU नतीजों को इस व्यापक छात्र संपर्क अभियान के संदर्भ में भी देखा है।

हालांकि किसी एक विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के परिणाम को देशभर के युवा मतदाताओं के रुझान का प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा। DUSU चुनाव दिल्ली विश्वविद्यालय के अपने छात्र समुदाय, स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और कैंपस स्तर की संगठनात्मक राजनीति से प्रभावित होता है।

किन मुद्दों पर लड़ा गया DUSU चुनाव?

इस बार चुनाव अभियान में छात्र सुरक्षा, आवास, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर, शैक्षणिक सुविधाएं और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

हाल में दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद छात्रों के आवास और सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में रहा। घटना में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच छात्र शामिल थे। ABVP और NSUI दोनों ने घटना के बाद जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।

नवनिर्वाचित DUSU अध्यक्ष यश डबास ने जीत के बाद कॉलेजों, हॉस्टलों और PG आवासों की सुरक्षा ऑडिट को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात कही है।

कांग्रेस के लिए आगे क्या?

NSUI का चारों केंद्रीय पदों पर हारना कांग्रेस के लिए केवल सीटों का नुकसान नहीं है, बल्कि चुनाव प्रबंधन और उम्मीदवार चयन की समीक्षा का कारण भी बना है। खासकर निर्दलीय दीपांशु शौकीन की बड़ी जीत ने टिकट वितरण से जुड़े फैसलों पर अतिरिक्त ध्यान खींचा है।

फिलहाल उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि कांग्रेस नेतृत्व हार के कारणों की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। इसके बाद संगठनात्मक जिम्मेदारी तय करने या बदलाव करने का फैसला हो सकता है। जब तक कांग्रेस की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं होती, संभावित कार्रवाई को सूत्रों पर आधारित जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


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