ECI और विपक्ष के बीच बैठक को लेकर क्या है नया विवाद?
नई दिल्ली में 6 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के विरोध मार्च के बाद चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बैठक को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक पहुंचकर अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपना और आयोग से मुलाकात करना चाहते थे।
विरोध प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब बड़ी संख्या में निर्वाचित सांसद चुनाव आयोग से मिलने पहुंचे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त उनसे मुलाकात क्यों नहीं कर रहे हैं।
हालांकि, देर शाम Election Commission of India (ECI) ने पूरे मामले पर अपना आधिकारिक पक्ष जारी करते हुए कहा कि शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए आयोग से बैठक का समय नहीं मांगा था। आयोग के मुताबिक उसे करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस से जानकारी मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन देना चाहता है।
240 सांसदों और बैठक की जगह को लेकर कहां फंसा मामला?
ECI के मुताबिक, दिल्ली पुलिस से मिली जानकारी में बाद में बताया गया कि प्रस्तावित बैठक में लगभग 240 सांसद शामिल होना चाहते थे और मुलाकात Parliament House Annexe में करने की बात थी।
चुनाव आयोग ने इस व्यवस्था को अपने निर्धारित प्रोटोकॉल से अलग बताया। आयोग का कहना है कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल के साथ ऐसी बैठकें सामान्य रूप से ECI के परिसर में होती हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि उसने अपने ड्यूटी पर मौजूद सबसे वरिष्ठ अधिकारी को प्रस्तावित स्थान पर भेजकर सांसदों का ज्ञापन स्वीकार करने की पेशकश की थी। ECI के अनुसार यह अपने आप में एक असाधारण कदम होता, लेकिन सांसदों ने इस विकल्प को स्वीकार नहीं किया।
बैठक के लिए क्या है चुनाव आयोग की प्रक्रिया?
ECI के आधिकारिक बयान के मुताबिक, राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए आयोग ने 2025 में एक प्रक्रिया निर्धारित की थी और राजनीतिक दलों को इसकी जानकारी दी गई थी।
इस प्रक्रिया के तहत किसी एक पार्टी या कई राजनीतिक दलों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है तो उसके अधिकृत प्रतिनिधि को appointment मांगना होता है। इसके बाद दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर बैठक का समय निर्धारित किया जाता है।
ECI ने कहा कि राजनीतिक दल भविष्य में भी बैठक के लिए अनुरोध कर सकते हैं और उपलब्धता के आधार पर मुलाकात की तारीख तथा समय तय किया जा सकता है।
राहुल गांधी और विपक्ष ने क्या सवाल उठाए?
दूसरी तरफ विपक्ष का सवाल था कि बड़ी संख्या में सांसद जब चुनाव आयोग से मिलने के उद्देश्य से पहुंचे थे तो उन्हें आयोग तक पहुंचने और सीधे चुनाव आयुक्तों के सामने अपनी बात रखने की अनुमति क्यों नहीं दी गई।
प्रदर्शन स्थल पर राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से सवाल किया कि आयोग उनसे क्यों नहीं मिल रहा है। INDIA गठबंधन का यह प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों की पृष्ठभूमि में हुआ। इन आरोपों को ECI स्वीकार नहीं करता है।
पहले से तय था 6 अक्टूबर का विरोध मार्च
यह प्रदर्शन अचानक तय नहीं हुआ था। INDIA गठबंधन के नेताओं ने 30 सितंबर की बैठक के बाद 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों के चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च करने की घोषणा की थी।
उस बैठक में विपक्ष ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अधिक पारदर्शिता, मतदाता का नाम हटाने से पहले उचित सूचना और अपील की व्यवस्था सहित कई मांगें उठाई थीं। विपक्ष लगातार SIR और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहा है। ये विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप और राजनीतिक मांगें हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
विवाद सिर्फ बैठक का नहीं, संस्थागत भरोसे का भी है
मौजूदा विवाद में दोनों पक्षों के तर्क अलग-अलग बिंदुओं पर केंद्रित हैं। चुनाव आयोग अपनी निर्धारित प्रक्रिया, अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए appointment और बैठक के स्थान से जुड़े प्रोटोकॉल पर जोर दे रहा है। दूसरी ओर विपक्ष का तर्क है कि निर्वाचित सांसदों की इतनी बड़ी संख्या जब चुनावी मुद्दों को लेकर आयोग से मिलने पहुंची तो उनके साथ सीधे संवाद होना चाहिए था।
यही वजह है कि यह मामला अब केवल इस सवाल तक सीमित नहीं है कि बैठक क्यों नहीं हुई। राजनीतिक रूप से बड़ा सवाल चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच भरोसे तथा संवाद का बन गया है।
आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष निर्धारित प्रक्रिया के तहत नई बैठक का औपचारिक अनुरोध करता है या नहीं और यदि करता है, तो चुनाव आयोग उस पर क्या फैसला लेता है।
