‘वंदे मातरम्’ के दौरान बैठने पर घिरे कांग्रेस MLA इमरान खेड़ावाला, BJP ने मांगी माफी
Introduction
गुजरात विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए।
अहमदाबाद की जमालपुर-खाड़िया सीट से कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ‘वंदे मातरम्’ का गायन शुरू होने पर अन्य विधायकों के साथ खड़े हुए, लेकिन पहले दो पदों के बाद अपनी सीट पर बैठ गए। सदन में मौजूद दूसरे कांग्रेस विधायक गायन समाप्त होने तक खड़े रहे।
भाजपा ने खेड़ावाला के इस कदम को राष्ट्रीय गीत का अपमान बताते हुए उनसे माफी की मांग की। खेड़ावाला ने आरोप खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कोई अपमान नहीं किया और वे उस हिस्से तक खड़े रहे जिसे कांग्रेस की ऐतिहासिक स्थिति के अनुरूप गाया जाता रहा है।
मानसून सत्र के पहले दिन कैसे शुरू हुआ विवाद?
घटना 9 सितंबर 2026 को गुजरात विधानसभा के तीन दिवसीय मानसून सत्र के पहले दिन हुई।
विधानसभा की परंपरा के अनुसार कार्यवाही की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के गायन से हुई। इसी दौरान खेड़ावाला पहले खड़े हुए और बाद में बैठ गए।
इस पर सत्तारूढ़ भाजपा के विधायकों ने आपत्ति जताई और मामला जल्द ही राजनीतिक टकराव में बदल गया।
भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी से मुलाकात कर खेड़ावाला के खिलाफ सदन के नियमों के तहत कार्रवाई की मांग भी की।
BJP ने लगाया राष्ट्रीय गीत के अपमान का आरोप
गुजरात सरकार में मंत्री प्रवीण माली ने खेड़ावाला के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
भाजपा का कहना था कि कांग्रेस को बताना चाहिए कि खेड़ावाला का कदम उनका व्यक्तिगत फैसला था या पार्टी की आधिकारिक स्थिति।
भाजपा नेताओं ने उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की और इसे राष्ट्रीय भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया।
महत्वपूर्ण रूप से, यह भाजपा का आरोप है। खेड़ावाला और कांग्रेस दोनों ने इस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया है।
Imran Khedawala ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद खेड़ावाला ने अपने फैसले का बचाव किया।
उन्होंने कहा कि वे ‘वंदे मातरम्’ के उस हिस्से के दौरान खड़े रहे जिसे ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस स्वीकार करती आई है और पहले दो पद समाप्त होने के बाद बैठे।
देशभक्ति पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए खेड़ावाला ने कहा:
“My worship is towards God and Khuda, but my love is for the country. The BJP should not issue certificates of patriotism to anyone.”
यानी उन्होंने कहा कि उनकी इबादत ईश्वर और खुदा के प्रति है, लेकिन उनका प्रेम देश के लिए है और भाजपा को किसी को देशभक्ति का प्रमाणपत्र नहीं देना चाहिए।
खेड़ावाला ने अपने कदम को व्यक्तिगत फैसला बताया और माफी मांगने से इनकार किया।
कांग्रेस की 1937 की स्थिति का दिया हवाला
खेड़ावाला ने अपने पक्ष में कांग्रेस के 1937 के ऐतिहासिक फैसले का भी उल्लेख किया।
उस समय कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो पदों को सार्वजनिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में गाने की व्यवस्था स्वीकार की थी। गीत के बाद के हिस्सों को लेकर कुछ समुदायों की धार्मिक आपत्तियों के बाद यह फैसला लिया गया था।
मौजूदा विवाद में यही ऐतिहासिक संदर्भ महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि खेड़ावाला का कहना है कि उन्होंने पहले दो पदों का पूरा सम्मान किया।
हालांकि विधानसभा में मौजूद अन्य कांग्रेस विधायक पूरे गायन के दौरान खड़े रहे, जिससे पार्टी के भीतर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग व्यक्तिगत रुख भी सामने आए।
कांग्रेस ने कहा—यह उनका व्यक्तिगत फैसला
कांग्रेस विधायक दल के नेता तुषार चौधरी ने इस घटना से पार्टी को सीधे जोड़ने से दूरी बनाई।
उन्होंने कहा कि खेड़ावाला से ही पूछा जाना चाहिए कि वह क्यों बैठे और इसे पार्टी की सामूहिक स्थिति नहीं माना जाना चाहिए।
कांग्रेस के विधानसभा व्हिप किरीट पटेल ने भी इस आरोप को खारिज किया कि खेड़ावाला शुरुआत से ही बैठे रहे थे। पटेल के मुताबिक खेड़ावाला उनके पीछे थे और गायन शुरू होने पर खड़े हुए थे।
यानी विवाद इस बात पर नहीं है कि खेड़ावाला पूरे समय बैठे रहे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वह शुरुआत में खड़े थे; विवाद उनके गायन पूरा होने से पहले बैठने को लेकर है।
कांग्रेस के लिए राजनीतिक मुश्किल क्यों बढ़ी?
विवाद ने कांग्रेस को असहज स्थिति में डाल दिया है।
एक तरफ खेड़ावाला अपने कदम को कांग्रेस की ऐतिहासिक विचारधारा और व्यक्तिगत फैसले से जोड़ रहे हैं। दूसरी तरफ पार्टी के दूसरे विधायक गायन पूरा होने तक खड़े रहे और कांग्रेस नेतृत्व ने उनके कदम को व्यक्तिगत बताया।
भाजपा इसी अंतर का इस्तेमाल कांग्रेस से उसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग के लिए कर रही है।
खेड़ावाला गुजरात विधानसभा में एकमात्र मुस्लिम विधायक हैं, जिससे इस विवाद को धार्मिक पहचान से जोड़ने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। हालांकि घटना का तथ्यात्मक केंद्र यह है कि विवाद उनके पहले दो पदों के बाद बैठने और उसके राजनीतिक अर्थ को लेकर है।
‘वंदे मातरम्’ के पहले दो पदों पर पुरानी बहस
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और बाद में इसे उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया।
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में यह गीत एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीक बना।
इसके साथ ही गीत के सभी पदों और केवल शुरुआती दो पदों के इस्तेमाल को लेकर ऐतिहासिक बहस भी रही है। कांग्रेस ने 1937 में पहले दो पदों के उपयोग को स्वीकार किया था।
इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण गुजरात विधानसभा की मौजूदा घटना केवल कुछ मिनटों की सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रही और तेजी से राजनीतिक विवाद में बदल गई।
अब आगे क्या?
भाजपा खेड़ावाला से माफी और विधानसभा स्तर पर कार्रवाई की मांग कर रही है, जबकि विधायक ने अपने कदम को सही बताते हुए माफी मांगने से इनकार किया है।
इसलिए मामले में तीन बातें अलग-अलग रखना जरूरी है—खेड़ावाला पहले दो पदों के दौरान खड़े थे; इसके बाद वह बैठ गए; और इस कदम को राष्ट्रीय गीत का अपमान कहना भाजपा का राजनीतिक आरोप है, जिसे विधायक ने खारिज किया है।
अब नजर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से किसी औपचारिक कार्रवाई और गुजरात कांग्रेस के आगे के रुख पर रहेगी।
