हरियाणा में करीब एक महीने से जारी है सफाई कर्मचारियों की हड़ताल
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों का आंदोलन अब केवल वेतन और नौकरी की शर्तों से जुड़ा श्रमिक विवाद नहीं रह गया है। करीब एक महीने से चल रही हड़ताल ने कई शहरों में सफाई व्यवस्था प्रभावित की है और मामला राज्य की राजनीति के केंद्र तक पहुंच गया है।
नगर पालिका और संबंधित कर्मचारी संगठन 6 अगस्त 2026 से आंदोलन पर हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में कच्चे और संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की व्यवस्था, ठेका प्रथा से जुड़े मुद्दों का समाधान, समान काम के लिए समान वेतन, सुरक्षा उपकरण और सरकार के साथ पहले हुए समझौतों को लागू करना शामिल है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब तक महत्वपूर्ण मांगों पर ठोस आदेश जारी नहीं होते, आंदोलन जारी रहेगा।
शहरों में कूड़े के ढेर, आम लोगों की परेशानी बढ़ी
लंबी हड़ताल का सबसे प्रत्यक्ष असर हरियाणा के शहरों की सफाई व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।
रोहतक, हिसार, बहादुरगढ़, झज्जर और अन्य स्थानों से कचरा जमा होने और नियमित garbage collection प्रभावित होने की रिपोर्टें सामने आई हैं।
लंबे समय तक कचरा नहीं उठने के कारण यह मामला केवल कर्मचारियों और सरकार के बीच विवाद तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर जमा कचरे ने नागरिक सुविधाओं और स्वच्छता को भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना दिया है।
यही स्थिति सरकार के लिए चुनौती बढ़ाती है—उसे एक तरफ आंदोलनकारी कर्मचारियों की मांगों का समाधान तलाशना है और दूसरी तरफ शहरों में आवश्यक सफाई सेवाओं को सामान्य करना है।
हिसार से बहादुरगढ़ तक पुलिस और कर्मचारियों के बीच टकराव
2 और 3 सितंबर के आसपास आंदोलन ने कई जगह अधिक तनावपूर्ण रूप ले लिया।
हिसार, बहादुरगढ़, झज्जर, हांसी, रोहतक और सोनीपत सहित कई स्थानों पर प्रशासन द्वारा कूड़ा उठाने की कोशिशों के दौरान कर्मचारियों और पुलिस के बीच टकराव की रिपोर्टें आईं।
हिसार में पुलिस ने 20 नामजद सफाई कर्मचारियों—जिनमें 14 महिलाएं शामिल थीं—और 25 से 30 अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी काम में बाधा पहुंचाई और कचरा उठाने की कार्रवाई को रोकने की कोशिश की।
दूसरी ओर, आंदोलनकारी कर्मचारियों ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को दबाव बनाने की रणनीति बताया है।
इन दोनों पक्षों के आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए; वे संबंधित पक्षों के दावे हैं।
सरकार का दावा—13 में से 12 मांगों का समाधान
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में कहा कि उनकी सरकार सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार काम कर रही है।
सरकार के मुताबिक, कर्मचारियों की 13 मांगों में से 12 मांगों को स्वीकार या संबोधित किया जा चुका है।
शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने भी विधानसभा में कहा कि कर्मचारियों के साथ छह दौर की बैठकें हो चुकी हैं।
सरकार ने यह संकेत भी दिया है कि कुछ कर्मचारियों को हरियाणा संविदात्मक कर्मचारी सेवा की सुनिश्चितता अधिनियम, 2024 के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है।
पालिका रोल पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन ₹19,000 से बढ़ाकर ₹21,000 करने पर भी विचार की बात सामने आई है।
फिर हड़ताल खत्म क्यों नहीं हो रही?
सरकार और कर्मचारियों के बयानों में यही सबसे बड़ा अंतर है।
सरकार कहती है कि अधिकांश मांगें स्वीकार की जा चुकी हैं, लेकिन कर्मचारी संगठन इस दावे से सहमत नहीं हैं।
यूनियन का कहना है कि 13 मई को सरकार और नगरपालिका तथा फायर कर्मचारी संगठनों के बीच हुए समझौते से जुड़े जरूरी implementation orders अब तक जारी नहीं किए गए।
कर्मचारी विशेष रूप से contractual workforce के भविष्य और regularisation से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
यही वजह है कि केवल मांगों को स्वीकार करने की घोषणा और उन्हें प्रशासनिक आदेशों में लागू करने के बीच का अंतर मौजूदा गतिरोध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
हरियाणा विधानसभा तक पहुंचा विवाद
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम चरण में प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गई।
विपक्षी कांग्रेस ने सरकार के सामने कर्मचारियों का मुद्दा उठाया और आंदोलन से निपटने के उसके तरीके पर सवाल किए।
इसके जवाब में मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि विपक्ष को सदन में मुद्दे उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन कांग्रेस को कर्मचारियों की समस्याओं पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
इस तरह सड़क और नगर निकाय स्तर पर शुरू हुआ श्रमिक विवाद अब सीधे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव में बदल गया है।
Valmiki Community Factor से क्यों बढ़ी BJP की राजनीतिक चुनौती?
इस आंदोलन का एक संवेदनशील राजनीतिक पहलू सामाजिक प्रतिनिधित्व से भी जुड़ा है।
सफाई कर्मचारियों में वाल्मीकि समुदाय की महत्वपूर्ण मौजूदगी होने के कारण यह मुद्दा केवल कर्मचारी नीति तक सीमित नहीं माना जा रहा। समुदाय का हरियाणा की सामाजिक और चुनावी राजनीति में भी महत्व है।
इसी वजह से कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारी या कठोर प्रशासनिक कदम राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकते हैं।
हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि मौजूदा आंदोलन से किसी राजनीतिक दल के चुनावी समर्थन में कितना बदलाव आएगा। इसके लिए कोई स्पष्ट चुनावी डेटा उपलब्ध नहीं है।
BJP सरकार के लिए दोहरी चुनौती
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के सामने अब दो अलग लेकिन आपस में जुड़ी चुनौतियां हैं।
पहली administrative challenge है—शहरों में कचरा उठाना और sanitation services सामान्य करना।
दूसरी political challenge है—कर्मचारियों के साथ समझौता करते हुए ऐसा समाधान निकालना जिससे विपक्ष को सरकार पर श्रमिक विरोधी या सामाजिक रूप से संवेदनशील वर्गों की अनदेखी करने का आरोप लगाने का मौका न मिले।
सरकार अगर बहुत कठोर कार्रवाई करती है तो आंदोलन और तेज होने का जोखिम है। वहीं लंबे समय तक गतिरोध जारी रहने पर शहरों में जमा कचरे और नागरिक असुविधा का राजनीतिक नुकसान सरकार को उठाना पड़ सकता है।
फायर कर्मचारियों पर भी कार्रवाई
आंदोलन का असर केवल सफाई कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा है।
फायर सर्विस कर्मचारियों के खिलाफ भी सरकार ने कार्रवाई शुरू की है।
रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार ने नगर निकाय रोल पर कार्यरत 10 फायर कर्मचारियों को हटाने और 14 स्थायी कर्मचारियों को निलंबित करने की कार्रवाई की है।
इसके अलावा 1,200 से अधिक fire employees को 3 सितंबर सुबह 9 बजे तक काम पर लौटने के नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई।
कर्मचारी संगठनों ने इन कार्रवाइयों का विरोध किया है और इन्हें आंदोलन दबाने का प्रयास बताया है।
अब आगे क्या?
कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं। हड़ताल को 6 सितंबर तक बढ़ाने की घोषणा की गई है।
इसके अलावा यूनियन ने 10 से 12 सितंबर के बीच ‘जन न्याय पंचायत’ आयोजित करने की योजना भी घोषित की है।
इससे साफ है कि यदि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जल्द कोई स्वीकार्य समझौता नहीं होता, तो मौजूदा गतिरोध और लंबा खिंच सकता है।
आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि सरकार कर्मचारियों की बाकी आपत्तियों पर लिखित और लागू करने योग्य समाधान देती है या प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए आवश्यक सेवाएं बहाल करने पर जोर बढ़ाती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आंदोलन?
हरियाणा का मौजूदा sanitation workers आंदोलन तीन मुद्दों को एक साथ सामने लाता है—urban governance, contractual employment और social politics।
कर्मचारियों के लिए यह नौकरी की सुरक्षा, वेतन और पहले किए गए सरकारी वादों के क्रियान्वयन का मामला है।
सरकार के लिए चुनौती शहरों की सफाई व्यवस्था सामान्य करने के साथ यह दिखाने की है कि बातचीत के जरिए कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
और विपक्ष के लिए यह सरकार को विधानसभा से लेकर जनता के बीच घेरने का अवसर बन गया है।
इसलिए करीब एक महीने से जारी यह हड़ताल अब सिर्फ कचरा उठाने की समस्या नहीं रही—यह हरियाणा सरकार की labour policy, crisis management और राजनीतिक संवाद क्षमता की भी परीक्षा बन गई है।
