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राजनीति

INDIA ब्लॉक ने लोकसभा स्पीकर की चाय बैठक का किया बहिष्कार, राज्यसभा के कार्यक्रम में पहुंचे खड़गे और सोनिया गांधी

संसद के मानसून सत्र के समापन के बाद विपक्षी INDIA गठबंधन के कई प्रमुख दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पारंपरिक चाय बैठक से दूरी बनाई। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता इसमें शामिल नहीं हुए। हालांकि, राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन की ओर से आयोजित चाय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी समेत विपक्ष के नेता मौजूद रहे। वहीं, DMK नेता कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष की बैठक में हिस्सा लिया।

INDIA ब्लॉक ने लोकसभा स्पीकर की चाय बैठक का किया बहिष्कार, राज्यसभा के कार्यक्रम में पहुंचे खड़गे और सोनिया गांधी
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: PTI

संसद सत्र के अंत में दिखा सत्ता-विपक्ष का तनाव

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही समाप्त होने के बाद आयोजित होने वाली पारंपरिक चाय बैठकों में इस बार राजनीतिक मतभेद साफ दिखाई दिए। INDIA गठबंधन के प्रमुख घटक दलों कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और समाजवादी पार्टी (SP) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा आयोजित चाय बैठक में हिस्सा नहीं लिया।

संसदीय परंपरा के तहत लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारी अपने-अपने कक्ष में इस तरह की अनौपचारिक बैठक आयोजित करते हैं। इन आयोजनों को राजनीतिक मतभेदों से अलग हटकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच संवाद का अवसर माना जाता है।

लोकसभा की बैठक में नहीं पहुंचे कांग्रेस, TMC और SP

रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस, TMC और SP सहित INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष की चाय बैठक का बहिष्कार किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया जब मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर लगातार टकराव और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे।

लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सरकार के कई अन्य वरिष्ठ नेता तथा मंत्री मौजूद थे।

DMK की कनिमोझी ने लिया हिस्सा

INDIA गठबंधन के कई दलों की गैरमौजूदगी के बीच DMK नेता कनिमोझी का लोकसभा अध्यक्ष की बैठक में शामिल होना खास तौर पर चर्चा में रहा। कुछ रिपोर्टों ने उनकी मौजूदगी को विपक्षी गठबंधन के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा है। हालांकि, केवल इस कार्यक्रम में भागीदारी के आधार पर गठबंधन की भविष्य की दिशा को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्ष के सभी घटकों ने कार्यक्रम को लेकर एक जैसा रुख नहीं अपनाया। इससे संकेत मिलता है कि संसदीय रणनीति और राजनीतिक विरोध के तरीके को लेकर सहयोगी दलों के फैसले अलग-अलग हो सकते हैं।

राज्यसभा की चाय बैठक में पहुंचे खड़गे और सोनिया गांधी

लोकसभा में विपक्षी दलों की गैरमौजूदगी के विपरीत राज्यसभा में तस्वीर अलग रही। राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन द्वारा आयोजित चाय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी सहित विपक्ष के नेताओं ने भाग लिया।

इससे साफ है कि विपक्ष की ओर से दोनों सदनों की पारंपरिक बैठकों के प्रति एक समान रणनीति नहीं अपनाई गई। लोकसभा अध्यक्ष की बैठक का बहिष्कार जहां असंतोष का राजनीतिक संकेत बना, वहीं राज्यसभा की बैठक में भागीदारी ने संसदीय संवाद के लिए कुछ गुंजाइश बने रहने का संकेत दिया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?

संसद में चाय बैठकें औपचारिक विधायी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होतीं, लेकिन इनका प्रतीकात्मक महत्व है। तीखी राजनीतिक बहस और विरोध के बावजूद ऐसे अनौपचारिक कार्यक्रम विभिन्न दलों के नेताओं को आमने-सामने बातचीत का अवसर देते हैं।

ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष की बैठक से प्रमुख विपक्षी दलों की दूरी को सत्र के दौरान बने तनाव की निरंतरता के तौर पर देखा जा सकता है। दूसरी तरफ, राज्यसभा सभापति की बैठक में विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी यह भी दिखाती है कि राजनीतिक विरोध और संस्थागत संवाद एक साथ चल सकते हैं।

संतुलित विश्लेषण

INDIA ब्लॉक के प्रमुख दलों का लोकसभा अध्यक्ष की चाय बैठक से दूर रहना सरकार और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक खींचतान का प्रतीक माना जा सकता है। विपक्ष के नजरिए से इस तरह का बहिष्कार संसदीय कार्यवाही को लेकर असंतोष जताने का राजनीतिक तरीका हो सकता है।

दूसरी ओर, सत्तापक्ष यह तर्क दे सकता है कि संसदीय लोकतंत्र में तीखे मतभेदों के बावजूद अनौपचारिक संवाद की परंपराओं को जारी रखना बेहतर राजनीतिक माहौल बनाने में मदद करता है।

DMK नेता कनिमोझी की उपस्थिति और राज्यसभा की बैठक में खड़गे तथा सोनिया गांधी की भागीदारी इस पूरे घटनाक्रम को एक साधारण सत्ता बनाम विपक्ष विवाद से अधिक जटिल बनाती है। इससे पता चलता है कि विपक्षी दल विभिन्न संसदीय मंचों पर अपनी रणनीति परिस्थितियों के अनुसार तय कर रहे हैं।

निष्कर्ष

मानसून सत्र के समापन पर हुई दोनों चाय बैठकों ने संसद के भीतर मौजूद राजनीतिक तनाव की अलग-अलग तस्वीर पेश की। लोकसभा में कांग्रेस, TMC और SP जैसे प्रमुख विपक्षी दलों ने दूरी बनाई, जबकि DMK की कनिमोझी कार्यक्रम में पहुंचीं। दूसरी ओर, राज्यसभा के आयोजन में मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी की मौजूदगी ने दिखाया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद के कुछ रास्ते खुले हुए हैं।

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