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राजनीति

जंतर मंतर: प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस के वर्दी से गायब नेम टैग, सोशल मीडिया ट्रोलिंग बड़ी वजह।

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर हो रहे प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस ने अपनी वर्दी से नेम टैग हटा दिए हैं, सोशल मीडिया ट्रोलिंग इसकी बड़ी वजह बताई जा रही है। प्रदर्शन में मौजूद कुछ अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली पुलिस के नेम टैग के कारण फैमिली और पर्सनल लाइफ पर इसका प्रभाव न पड़े इसलिए उन्होंने नेम टैग नहीं पहने हैं, यह एक सोचा समझा कदम है। वहीं डीसीपी सचिन शर्मा से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि, नेम बैज न पहनने का कोई आधिकारिक नोटिस नहीं द

जंतर मंतर: प्रदर्शन में दिल्ली  पुलिस के वर्दी से गायब नेम टैग, सोशल मीडिया ट्रोलिंग बड़ी वजह।
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: THE INDIAN EXPRESS

आखिर दिल्ली पुलिस के वर्दी से क्यों गायब है नेम बैज?

दिल्ली के जंतर मंतर पर लगातार प्रदर्शन जारी है। मौजूदा हालात में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार के इस्तीफे को लेकर हो रहे प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस के वर्दी से नेम बैज गायब दिखाई दिए, लोगों ने जब जवाब मांगा तो कुछ पुलिस ऑफिसर ने कहा कि, बैज लगाना भूल गए और कुछ लोगों ने कहा कि प्रदर्शन में भीड़ को कंट्रोल करते हुए बैज टूट गए, प्रदर्शन में मौजूद अधिकारियों से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि, यह एक सोचा समझा कदम है। ताकि पुलिस कर्मियों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाने और पहचाने जाने से बचाया जा सके ताकि इसका असर उनके निजी जीवन पर न पड़े।

डीसीपी सचिन शर्मा का बयान!

पुलिस कर्मियों के नेम टैग क्यों गायब हैं? एनडीटीवी के अनुसार, यह सवाल डीसीपी सचिन शर्मा से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि, “ड्यूटी के दौरान भीड़ को नियंत्रित करते हुए, कुछ पुलिस कर्मियों के नेम टैग टूट गए होंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा पुलिस ऑफिसर्स के लिए नेम टैग पहनना अनिवार्य है। वैसे दिल्ली पुलिस की तरफ से नेम टैग न पहनने जैसा कोई निर्देश नहीं दिया गया था । लेकिन 20 जुलाई को हुए “चलो संसद मार्च” में बहुत सारे पुलिस कर्मियों की पहचान उनके नेम टैग के कारण हुई थी, जिस कारण कर्मियों को सोशल मीडिया पर हेवी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था, तो नेम टैग न पहनने का बड़ा कारण यह भी हो सकता है।

क्या है चलो संसद मार्च की पूरी सच्चाई?

नीट पेपर लीक के कारण दिल्ली के जंतर मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए प्रोटेस्ट किया गया था। 20 जुलाई को चलो संसद मार्च आयोजित था। इस मार्च के दौरान पुलिस अधिकारियों द्वारा आम जनता और विद्यार्थियों पर हेवी लाठी चार्ज की गई। और बहुत से इन्फ्लुएंसर और आम जनता ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला, जिसमें पुलिस कर्मियों का नेम बैज दिख रहा था। जिस कारण उन्हें सोशल मीडिया पर हेवी ट्रोलिंग झेलनी पड़ी। लोगों का कहना है कि, इसी से सबक लेते हुए इस बार दिल्ली पुलिस कर्मियों ने प्रदर्शन के दौरान नेम बैज हटा दिए हैं। लेकिन, अब तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और दिल्ली पुलिस की तरफ से ऐसा कोई आह्वान नहीं है कि नेम बैज वर्दी से हटा दो।

सीपीआई सांसद पी संतोष कुमार का केंद्रीय मंत्री अमित शाह को पत्र!

हालांकि, इसी मामले में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के राज्यसभा सांसद पी संतोष कुमार ने शनिवार 3 अक्टूबर के दिन गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर, उनसे अनुरोध किया कि दिल्ली पुलिस को नेम प्लेट पहनने के लिए कहे, और उन्हें प्रदर्शन में हो रही दिल्ली पुलिस द्वारा की गई हिंसा, मनमानी हिरासत के बारे में अवगत कराया और मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। अपने पत्र में संतोष कुमार ने दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर 51 का भी जिक्र किया, जिसमें वर्दी के हिस्से के रूप में नेम प्लेट पहनना अनिवार्य है।

नेम बैज न पहनने का मूल कारण।

जुलाई में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में कुछ इन्फ्लुएंसर्स ने पुलिस कर्मियों को टारगेट करते हुए, लाठी चार्ज करते हुए उनकी वीडियोज बनाई और सोशल मीडिया पर वायरल की। जिससे वायरल पुलिस कर्मियों को आम जनता द्वारा काफी हेट का सामना करना पड़ा, आम लोग पुलिस कर्मियों को एक्सपोज करने लगे उनके मीम्स बनाकर डालने लगे। कथित तौर पर यह काफी अपमान जनक रहा। इसमें शामिल अधिकारियों और कर्मियों को बुरी ट्रोलिंग, और मीम ट्रेंड का शिकार होना पड़ा। और निजी जीवन और परिवार पर भी प्रभाव पड़ा, नेम बैज न पहनने को लेकर एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि आईपीएस लेवल के अधिकारियों ने अपने नेम बैज पहन रखे हैं लेकिन अन्य पुलिस कर्मियों ने बैज के गिरने या टूटने के कारण बैज नहीं पहने। हालांकि, आधिकारिक तौर पर पुलिस कर्मियों के बैज न पहनने को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है।

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