विज्ञापन - शीर्ष बैनर
Read in English —JantaScope English
राजनीति

Jharkhand Voter List पर नया विवाद: BJP एजेंटों के Form 7 पर BLOs ने उठाए सवाल, विपक्ष ने साधा निशाना

झारखंड में Special Intensive Revision (SIR) के तहत मतदाता सूची को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। गोड्डा जिले के कुछ बूथों पर BJP के Booth Level Agents द्वारा Form 7 के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन दिए जाने और कुछ BLOs द्वारा उनकी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बाद मामला राजनीतिक टकराव में बदल गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रभावित नामों में बड़ी संख्या अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं की बताई गई है। हालांकि किसी मतदाता का नाम हटाने का अंतिम निर्णय निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के तहत ही हो

Jharkhand Voter List पर नया विवाद: BJP एजेंटों के Form 7 पर BLOs ने उठाए सवाल, विपक्ष ने साधा निशाना
विज्ञापन

द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

झारखंड में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) 2026 के बीच मतदाता सूची से नाम हटाने के आवेदनों को लेकर BJP और सत्तारूढ़ JMM-कांग्रेस खेमे के बीच नया राजनीतिक विवाद पैदा हो गया है।

विवाद मुख्य रूप से गोड्डा जिले के कुछ मतदान केंद्रों से जुड़ा है।

एक मीडिया जांच के अनुसार, BJP से जुड़े कुछ Booth Level Agents (BLAs) ने बड़ी संख्या में Form 7 जमा किए, जिनमें ड्राफ्ट मतदाता सूची में मौजूद लोगों के नाम हटाने की मांग की गई थी।

कम से कम चार बूथों पर संबंधित Booth Level Officers (BLOs) ने इन आवेदनों की प्रामाणिकता या प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

मामला इसलिए अधिक संवेदनशील हो गया क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार इन आवेदनों में शामिल कई नाम अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के थे।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—Form 7 दाखिल किए जाने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम अपने-आप मतदाता सूची से हट गया है। किसी नाम को हटाने के लिए निर्वाचन प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच आवश्यक होती है।

गोड्डा में आखिर हुआ क्या?

विवाद झारखंड के Godda जिले में सामने आया है।

5 अगस्त को SIR के तहत राज्य की draft electoral roll प्रकाशित होने के बाद claims और objections की प्रक्रिया शुरू हुई।

इसी दौरान कुछ मतदान केंद्रों पर BJP के BLAs मतदाताओं के नाम हटाने की मांग वाले Form 7 लेकर पहुंचे।

मीडिया रिपोर्ट में कई ऐसे मतदाताओं के नाम सामने आए हैं जिनके खिलाफ deletion applications दिए गए थे।

कुछ BLOs ने इन फॉर्म को स्वीकार करने पर आपत्ति जताते हुए उनकी प्रामाणिकता या निर्धारित प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए।

इससे स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ विवाद चुनाव अधिकारियों और राजनीतिक दलों के बीच बड़े टकराव में बदल गया।

एक BJP एजेंट ने 75 Form 7 जलाए: रिपोर्ट

मामले का सबसे चौंकाने वाला घटनाक्रम एक बूथ से सामने आया।

The Indian Express की जांच के मुताबिक, एक BJP Booth Level Agent के पास 75 Form 7 थे।

जब संबंधित BLO ने इन फॉर्म को लेकर सवाल किए, तो रिपोर्ट के अनुसार BLA ने उन्हें जला दिया

यह घटना मीडिया रिपोर्ट में दर्ज दावा है और इसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इससे जुड़े प्रत्येक आवेदन की वैधता तथा किसी संभावित नियम उल्लंघन पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित चुनाव अधिकारियों की जांच और प्रक्रिया से ही तय होगा।

BLOs ने क्यों उठाए सवाल?

रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम चार बूथों पर BLOs ने BJP के BLAs द्वारा लाए गए Form 7 पर आपत्ति जताई।

कुछ अधिकारियों ने इन आवेदनों को genuine नहीं माना या उनकी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।

दूसरी तरफ BJP की ओर से BLOs द्वारा फॉर्म स्वीकार नहीं किए जाने पर आपत्ति जताई गई।

इसके बाद विवाद प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया।

यह भी महत्वपूर्ण है कि BLO राज्य सरकार के कर्मचारी होते हैं और वर्तमान में झारखंड में JMM-कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। इसी कारण BJP और सत्तारूढ़ पक्ष के बीच विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है।

Chief Electoral Officer की क्या स्थिति है?

इस विवाद में चुनाव प्रशासन का पक्ष महत्वपूर्ण है।

झारखंड के Chief Electoral Officer से जुड़े स्पष्टीकरण के अनुसार, BLO किसी Form 7 को लेने से सीधे इनकार नहीं कर सकता।

लेकिन फॉर्म स्वीकार किया जाना और उसके आधार पर मतदाता का नाम हटा दिया जाना दो अलग-अलग बातें हैं।

आवेदन आने के बाद उसकी जांच और निर्धारित चुनावी प्रक्रिया पूरी की जानी होती है।

इसका अर्थ है कि किसी राजनीतिक दल के BLA द्वारा Form 7 जमा करने भर से मतदाता का नाम स्वतः समाप्त नहीं होता।

अल्पसंख्यक मतदाताओं के नामों को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

मीडिया जांच के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन दिए गए, उनमें बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय से जुड़े नामों की दिखाई दी।

यही तथ्य इस मामले को राजनीतिक रूप से ज्यादा संवेदनशील बनाता है।

विपक्ष इसे चुनिंदा मतदाताओं को निशाना बनाने की कोशिश के रूप में पेश कर रहा है, जबकि BJP की तरफ से BLOs की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।

फिलहाल यह स्थापित तथ्य नहीं है कि वैध मुस्लिम मतदाताओं को व्यवस्थित रूप से मतदाता सूची से हटाने का कोई आधिकारिक अभियान चलाया गया है।

इसलिए राजनीतिक आरोप और चुनाव प्रशासन द्वारा प्रमाणित तथ्य को अलग-अलग रखना जरूरी है।

झारखंड में SIR क्यों चल रहा है?

झारखंड में Special Intensive Revision 2026 की प्रक्रिया 30 जून को शुरू हुई थी।

BLOs को घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करने और enumeration forms उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई।

राज्य के Chief Electoral Officer K. Ravi Kumar ने प्रक्रिया शुरू होने पर कहा था कि इसका उद्देश्य electoral rolls को सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि कोई पात्र भारतीय नागरिक सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति शामिल न हो।

इसके बाद 5 अगस्त को draft electoral roll प्रकाशित की गई।

ड्राफ्ट लिस्ट से 43 लाख से ज्यादा नाम बाहर

SIR के बाद प्रकाशित draft voter list में एक और बड़ा आंकड़ा सामने आया।

रिपोर्टों के मुताबिक, पिछली मतदाता सूची की तुलना में 43 लाख से अधिक नाम draft electoral roll में शामिल नहीं थे।

इनमें करीब 14.50 लाख ऐसे मतदाता बताए गए जिनका SIR प्रक्रिया के दौरान पता नहीं चल पाया।

लेकिन यहां भी यह समझना महत्वपूर्ण है कि draft roll अंतिम मतदाता सूची नहीं है।

पात्र नागरिकों को claims और objections के जरिए अपने नाम जोड़ने, सुधार करवाने या अन्य बदलावों के लिए आवेदन करने का अवसर दिया गया है।

4 सितंबर तक Claims और Objections

झारखंड में प्रकाशित SIR draft roll पर 4 सितंबर 2026 तक claims और objections दाखिल किए जा सकते हैं।

यानी जिस मतदाता का नाम draft roll में नहीं है, उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी पात्रता साबित कर नाम जुड़वाने का रास्ता अभी खुला है।

इसी अवधि में Form 7 के जरिए किसी नाम को हटाने पर आपत्ति भी उठाई जा सकती है।

इसलिए मौजूदा राजनीतिक विवाद को final electoral roll के बजाय अभी चल रही claims-and-objections प्रक्रिया के संदर्भ में समझना अधिक सही होगा।

BJP और विपक्ष में टकराव का असली मुद्दा क्या है?

यह विवाद केवल Form 7 तक सीमित नहीं है।

इसके केंद्र में बड़ा सवाल यह है कि मतदाता सूची की सफाई और सत्यापन की प्रक्रिया कैसे सुनिश्चित करे कि:

कोई अपात्र मतदाता सूची में न रहे, लेकिन किसी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार भी गलत तरीके से प्रभावित न हो।

BJP लंबे समय से voter rolls की शुद्धता और अपात्र नामों को हटाने की जरूरत पर जोर देती रही है।

दूसरी तरफ JMM और अन्य विपक्षी दल SIR के संभावित दुरुपयोग को लेकर पहले से आशंका जता रहे थे।

अप्रैल 2026 में ही JMM ने आरोप लगाया था कि BJP इस प्रक्रिया का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर सकती है।

अब गोड्डा में Form 7 से जुड़ा विवाद उन पुरानी आशंकाओं को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है।

Form 7 क्या है और इसका इस्तेमाल क्यों होता है?

मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम को शामिल करने पर आपत्ति दर्ज कराने या किसी मौजूदा नाम को हटाने की मांग के लिए Form 7 का इस्तेमाल किया जाता है।

लेकिन फॉर्म दाखिल होना अपने आप में deletion order नहीं है।

आवेदन की जांच होती है और संबंधित व्यक्ति को प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सकता है।

यही सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची से किसी पात्र नागरिक का नाम हटना सीधे उसके मतदान अधिकार को प्रभावित कर सकता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल झारखंड SIR की claims-and-objections प्रक्रिया जारी है और 4 सितंबर इसकी महत्वपूर्ण समयसीमा है।

गोड्डा के विवाद में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि चुनाव अधिकारी संबंधित Form 7 आवेदनों की जांच में क्या पाते हैं और कितने आवेदन नियमों के अनुरूप माने जाते हैं।

इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि जिन मतदाताओं के नामों पर आपत्ति दर्ज की गई है, उन्हें अपनी पात्रता साबित करने और आपत्ति का जवाब देने का पर्याप्त अवसर मिलता है या नहीं।

राजनीतिक आरोपों से अलग, अंतिम कसौटी चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया होगी।

झारखंड का यह विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची की सटीकता और पात्र नागरिक के मतदान अधिकार—दोनों लोकतांत्रिक चुनाव की बुनियादी जरूरतें हैं।

साझा करें
विज्ञापन - मध्य लेख
विज्ञापन - नीचे