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राजनीति

काली टी-शर्ट पहन विधानसभा पहुंचे KTR और हरीश राव, पुलिस ने हिरासत में लिया; जानिए क्यों भड़का BRS का विरोध

तेलंगाना विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन BRS नेताओं का विरोध प्रदर्शन टकराव में बदल गया। KTR, T Harish Rao और कई विधायकों को विधानसभा परिसर के बाहर पुलिस ने हिरासत में लिया। BRS नेता कांग्रेस सरकार के 1,000 दिनों के कार्यकाल और चुनावी वादों को लेकर काली टी-शर्ट पहनकर प्रदर्शन कर रहे थे।

काली टी-शर्ट पहन विधानसभा पहुंचे KTR और हरीश राव, पुलिस ने हिरासत में लिया; जानिए क्यों भड़का BRS का विरोध
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

Telangana Assembly Protest: KTR और हरीश राव हिरासत में, कांग्रेस सरकार के खिलाफ काली टी-शर्ट पहनकर पहुंचे थे BRS नेता

विधानसभा के बाहर क्यों हुआ हंगामा?

तेलंगाना विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार, 7 सितंबर को राजनीतिक टकराव के साथ शुरू हुआ। Bharat Rashtra Samithi (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष KT Rama Rao (KTR), पूर्व मंत्री T Harish Rao और पार्टी के कई विधायकों को विधानसभा के बाहर पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

BRS विधायक काली टी-शर्ट पहनकर विधानसभा पहुंचे थे। उनकी टी-शर्ट पर कांग्रेस सरकार के प्रदर्शन और चुनावी वादों को लेकर विरोध संदेश लिखे हुए थे।

पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने जब नेताओं को इस रूप में विधानसभा परिसर में प्रवेश करने से रोका तो दोनों पक्षों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद KTR, हरीश राव और अन्य नेताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटाया गया।

Indian Express ने भी KTR और हरीश राव की हिरासत को “brief detention” के रूप में रिपोर्ट किया है। अलग-अलग रिपोर्टों में “detained” और “arrested” दोनों शब्द इस्तेमाल किए गए हैं, इसलिए कार्रवाई की सटीक कानूनी स्थिति पर उपलब्ध रिपोर्टिंग एक समान नहीं है।

पहले Gun Park पहुंचे थे BRS विधायक

विधानसभा पहुंचने से पहले BRS के विधायक और विधान परिषद सदस्य हैदराबाद के Gun Park में एकत्र हुए थे।

पार्टी का प्रदर्शन तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के लगभग 1,000 दिनों के कार्यकाल को निशाना बनाकर आयोजित किया गया था।

BRS नेताओं ने काली टी-शर्ट को विरोध के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया। कुछ टी-शर्ट पर कांग्रेस के वादों को पूरा नहीं करने और “1,000 days” के शासन को लेकर नारे लिखे हुए थे।

इसके बाद नेता विधानसभा की ओर बढ़े, जहां प्रवेश को लेकर सुरक्षा कर्मियों के साथ विवाद बढ़ गया।

KTR ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन के दौरान KTR ने कांग्रेस सरकार पर चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले विभिन्न वर्गों के लिए 420 वादे किए थे और उन्हें 100 दिनों के भीतर लागू करने की बात कही थी।

KTR ने कहा:

“A thousand days later, not one has been honoured.”

यानी उनका दावा था कि 1,000 दिन गुजरने के बावजूद वादे पूरे नहीं हुए।

यह BRS और KTR का राजनीतिक दावा है। इसे कांग्रेस सरकार के कामकाज का स्वतंत्र रूप से सत्यापित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

हरीश राव ने उतारी काली टी-शर्ट

घटनाक्रम का एक प्रमुख हिस्सा T Harish Rao से जुड़ा रहा।

रिपोर्टों के मुताबिक सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें विरोध संदेश वाली काली टी-शर्ट पहनकर विधानसभा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी।

इसके जवाब में हरीश राव ने अपनी टी-शर्ट उतार दी। इसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई और पुलिस उन्हें वहां से ले गई।

विधानसभा गेट पर मौजूद अन्य BRS नेताओं और पुलिस के बीच भी तनातनी हुई।

KTR ने चोट लगने का किया दावा

KTR ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि धक्का-मुक्की के दौरान उन्हें मामूली चोट लगी।

कुछ अन्य BRS नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

BRS की वरिष्ठ महिला नेताओं ने भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया। Narsapur विधायक और पूर्व मंत्री V Sunitha Laxma Reddy को मामूली चोट लगने की भी रिपोर्ट सामने आई है।

ये आरोप BRS नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टिंग में पुलिस की ओर से इन सभी आरोपों पर विस्तृत स्वतंत्र प्रतिक्रिया स्पष्ट नहीं है।

ट्रैफिक पर भी पड़ा असर

विधानसभा के बाहर BRS कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी का असर आसपास के यातायात पर भी पड़ा।

रिपोर्टों के मुताबिक विधानसभा के आसपास वाहनों की आवाजाही लगभग 30 से 40 मिनट तक प्रभावित हुई।

विरोध प्रदर्शन और नेताओं को हिरासत में लिए जाने के दौरान विधानसभा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी।

BRS किन मुद्दों को विधानसभा में उठाना चाहती है?

BRS का विरोध केवल काली टी-शर्ट पहनने तक सीमित नहीं था। पार्टी कांग्रेस सरकार को कई नीतिगत और जनहित से जुड़े मुद्दों पर घेरने की तैयारी के साथ विधानसभा पहुंची थी।

KTR के मुताबिक BRS अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री K Chandrashekar Rao (KCR) ने पार्टी विधायकों को सरकार से चुनावी वादों के क्रियान्वयन पर जवाब मांगने को कहा है।

KTR ने करीब ₹18,000 करोड़ के लंबित fee reimbursement dues का मुद्दा उठाने की बात भी कही।

BRS GO 97 का भी विरोध कर रही है। पार्टी का आरोप है कि इसके जरिए सरकारी polytechnic colleges को Young India Skills University से जोड़ने की प्रक्रिया छात्रों के हितों को प्रभावित कर सकती है।

KTR ने इससे आगे आरोप लगाया कि इस कदम के पीछे जमीन को real estate के लिए उपलब्ध कराने का उद्देश्य है। यह BRS का आरोप है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

एक महीने का विधानसभा सत्र चाहती है BRS

BRS ने विधानसभा का लगभग एक महीने लंबा सत्र आयोजित करने की भी मांग की है।

पार्टी का कहना है कि किसानों, Singareni कर्मचारियों, ऑटो चालकों, सरकारी कर्मचारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।

इससे संकेत मिलता है कि 7 सितंबर का प्रदर्शन मानसून सत्र में सरकार और मुख्य विपक्षी दल के बीच लंबे राजनीतिक टकराव की शुरुआत बन सकता है।

KCR विधानसभा सत्र से रहेंगे दूर

इस राजनीतिक घटनाक्रम की एक और महत्वपूर्ण कड़ी BRS अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री K Chandrashekar Rao का फैसला है।

सत्र शुरू होने से पहले BRS Legislature Party की बैठक के बाद हरीश राव ने कहा था कि KCR इस विधानसभा सत्र में शामिल नहीं होंगे।

पार्टी ने संकेत दिया है कि KCR बाद में सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।

इस तरह BRS ने विधानसभा के भीतर अपने विधायकों के जरिए और बाहर राजनीतिक आंदोलन के जरिए कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है।

कांग्रेस सरकार के 1,000 दिन बने राजनीतिक मुद्दा

इस पूरे विवाद को समझने के लिए इसका राजनीतिक संदर्भ महत्वपूर्ण है।

BRS ने कांग्रेस सरकार के 1,000 दिनों को उसके चुनावी वादों की समीक्षा के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया है। पार्टी सरकार पर guarantees और अन्य घोषणाओं को पूरा नहीं करने का आरोप लगा रही है।

दूसरी ओर, किसी सरकार के प्रदर्शन का मूल्यांकन केवल विपक्ष के आरोपों के आधार पर नहीं किया जा सकता। BRS द्वारा लगाए गए आरोपों, कांग्रेस सरकार के रिकॉर्ड और अलग-अलग योजनाओं के वास्तविक implementation की स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है।

फिर भी सोमवार का घटनाक्रम यह स्पष्ट करता है कि मानसून सत्र में सरकार और BRS के बीच टकराव केवल सदन की बहस तक सीमित रहने वाला नहीं है।

काली टी-शर्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विधानसभा में विपक्ष के विरोध के अधिकार, सुरक्षा नियमों और कांग्रेस सरकार के चुनावी वादों—तीनों को एक साथ राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है।

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