चारों सीटों पर कुल 43 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान के दौरान कुछ स्थानों पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच विवाद और झड़प की घटनाएं सामने आईं, हालांकि अधिकांश क्षेत्रों में मतदान शांतिपूर्ण रहा।
इन चुनावों को केवल विधान परिषद की चार सीटों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इनके नतीजे यह समझने में भी मदद कर सकते हैं कि राज्य के पंजीकृत शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच विभिन्न दलों का संगठनात्मक प्रभाव कितना है।
चार सीटों पर किन उम्मीदवारों के बीच मुकाबला?
कर्नाटक विधान परिषद की जिन चार सीटों पर मतदान हुआ, उनमें दक्षिण-पूर्व स्नातक, पश्चिम स्नातक, उत्तर-पूर्व शिक्षक और बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
प्रमुख उम्मीदवारों का विवरण इस प्रकार है:

BJP तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि उसकी सहयोगी JD(S) ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपना उम्मीदवार उतारा है। कांग्रेस ने सभी चार सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए हैं।
किस सीट पर कितना मतदान हुआ?
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से जारी आंकड़ों के अनुसार, चारों निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत इस प्रकार रहा:

सबसे अधिक मतदान उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज किया गया। यहां लगभग 87 प्रतिशत पात्र मतदाताओं ने मतदान में भाग लिया। मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और शाम चार बजे समाप्त हुआ। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में केवल संबंधित मतदाता सूची में पंजीकृत पात्र नागरिक मतदान कर सकते हैं।
कांग्रेस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?
कांग्रेस के पास चुनाव से पहले इन चार सीटों में से एक सीट थी, जबकि बाकी तीन सीटें BJP के पास थीं।कांग्रेस अपनी मौजूदा बेंगलुरु शिक्षक सीट बचाने के साथ अन्य तीन निर्वाचन क्षेत्रों में भी अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहती है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने उम्मीदवारों के समर्थन में अलग-अलग वीडियो संदेश जारी किए और मतदाताओं से कांग्रेस को समर्थन देने की अपील की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बी.के. हरिप्रसाद तथा कई मंत्रियों ने भी प्रचार अभियान में भाग लिया। पार्टी ने उम्मीदवारों की घोषणा अपेक्षाकृत पहले की थी, जिससे उन्हें मतदाताओं तक पहुंचने का अधिक समय मिला।
BJP-JD(S) गठबंधन की एकजुटता की परीक्षा
इन चुनावों में NDA के सामने एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक चुनौती है।तीन निर्वाचन क्षेत्रों में JD(S) समर्थकों को BJP उम्मीदवारों का समर्थन करना था, जबकि बेंगलुरु शिक्षक सीट पर BJP समर्थकों को JD(S) के प्रत्याशी ए.पी. रंगनाथ के पक्ष में मतदान करना था।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों के स्थानीय संपर्क, वर्षों से बने संगठनात्मक नेटवर्क और पात्र मतदाताओं के पंजीकरण की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।BJP के प्रदेश नेताओं ने गठबंधन उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी भी गठबंधन के चुनावी अभियान से जुड़े रहे।इन परिस्थितियों में परिणाम गठबंधन के भीतर चुनावी तालमेल का एक संकेत दे सकते हैं। हालांकि इन्हें पूरे राज्य की राजनीतिक राय का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।
बेंगलुरु में कार्यकर्ताओं के बीच झड़प
मतदान के दौरान बेंगलुरु के नागरभावी इलाके में स्थित आंबेडकर कॉलेज के पास कांग्रेस और BJP कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ।रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उकसाने और अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगाए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।अनेकल और गदग में भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं तथा चुनाव अधिकारियों के बीच बहस होने की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के बावजूद चारों निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया पूरी हुई।
चुनाव में पैसे और उपहार बांटने के आरोप
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के कथित प्रयासों को लेकर विवाद हुआ। विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवादी नारायणस्वामी ने कांग्रेस उम्मीदवार पुट्टन्ना पर गिफ्ट कूपन और अन्य सामान बांटने का आरोप लगाया। NDA प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव अधिकारियों से शिकायत करते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की। दूसरी ओर, पुट्टन्ना ने आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वितरित किए गए कार्ड दशहरा की शुभकामनाओं से संबंधित थे। उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार के समर्थकों पर भी मतदाताओं को उपहार देने के आरोप लगाए। इन आरोपों और प्रत्यारोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी चुनावी अनियमितता पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित अधिकारियों की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
विधान परिषद में अभी किस दल की कितनी ताकत?
कर्नाटक विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं। विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध 14 अगस्त 2026 की दलगत स्थिति के अनुसार कांग्रेस के 38, BJP के 24 और JD(S) के छह सदस्य थे। इसके अतिरिक्त एक निर्दलीय सदस्य, एक सभापति और पांच रिक्त स्थान दर्ज थे। इसलिए चार सीटों के चुनाव परिणाम से सदन के राजनीतिक समीकरणों में बदलाव संभव है, लेकिन इन परिणामों से राज्य की विधानसभा सरकार की स्थिरता सीधे प्रभावित नहीं होगी।
27 अक्टूबर को स्पष्ट होगी तस्वीर
मतगणना मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। इसके बाद स्पष्ट होगा कि कांग्रेस अपनी मौजूदा सीट बचाने और अन्य क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व बढ़ाने में कितनी सफल रही तथा BJP-JD(S) गठबंधन अपनी सीटों को बरकरार रख पाया या नहीं। कर्नाटक विधान परिषद का यह चुनाव शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, उम्मीदवारों के स्थानीय प्रभाव तथा दलों के संगठनात्मक तालमेल से जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। फिलहाल मतदान पूरा हो चुका है और सभी पक्षों को आधिकारिक परिणामों का इंतजार है। चुनावी प्रदर्शन का अंतिम आकलन 27 अक्टूबर की मतगणना के बाद ही किया जा सकेगा।
