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राजनीति

Karnataka Form 7 Row: झूठे दावे पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश, सभी 224 सीटों पर जांच के दायरे में आवेदन

कर्नाटक में SIR के दौरान कथित bulk Form 7 applications को लेकर विवाद के बीच CEO V Anbukkumar ने सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव अधिकारियों को जानबूझकर झूठी जानकारी देने वाले आवेदकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

Karnataka Form 7 Row: झूठे दावे पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश, सभी 224 सीटों पर जांच के दायरे में आवेदन
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Election Commission of India Form 7 document, Karnataka CEO directions, The Indian Express and other reported updates.

बेंगलुरु, 3 अक्टूबर 2026: कर्नाटक में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में जमा किए गए Form 7 आवेदनों को लेकर विवाद के बीच राज्य के Chief Electoral Officer (CEO) V Anbukkumar ने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जानबूझकर गलत जानकारी या झूठी घोषणा देकर मतदाता का नाम हटाने की मांग करने वाले आवेदकों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए। यह निर्देश राज्य की सभी 224 विधानसभा सीटों के Electoral Registration Officers (EROs) के लिए है।

यह कदम मुख्यमंत्री D K Shivakumar और कांग्रेस नेताओं के विरोध प्रदर्शन तथा कथित bulk Form 7 submissions की शिकायतों के बाद आया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटवाने के लिए बड़े पैमाने पर संदिग्ध आवेदन दिए गए। ये आरोप जांच के अधीन हैं और इन्हें अभी स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

आखिर Form 7 क्या है?

Election Commission of India के आधिकारिक Form 7 का उपयोग मौजूदा electoral roll में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करने या किसी मौजूदा मतदाता का नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है। मृत्यु, स्थायी रूप से स्थान बदलना, पहले से दूसरी जगह नाम दर्ज होना, कम उम्र या भारतीय नागरिक न होना जैसे निर्धारित आधार इसमें दिए गए हैं।

Form में यह स्पष्ट चेतावनी भी दी गई है कि जानबूझकर गलत बयान या declaration देना Representation of the People Act, 1950 की Section 31 के तहत दंडनीय हो सकता है। इसमें एक साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

CEO ने क्या आदेश दिया?

CEO V Anbukkumar ने District Election Officers, संबंधित स्थानीय अधिकारियों और राज्य की सभी 224 विधानसभा सीटों के EROs को bulk Form 7 submissions की जांच करने का निर्देश दिया है।

निर्देश के अनुसार Forms 6, 6A, 7 या 8 में कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत statement या declaration देता पाया जाता है तो उसके खिलाफ Section 31 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि कानूनी कार्रवाई से पहले Registration of Electors Rules, 1960 के Rule 20 के तहत inquiry की जानी है।

इसका अर्थ यह भी है कि Form 7 जमा होना अपने आप किसी मतदाता का नाम सूची से हटाए जाने के बराबर नहीं है। आवेदन की जांच और निर्धारित प्रक्रिया जरूरी है।

कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?

कर्नाटक कांग्रेस और मुख्यमंत्री D K Shivakumar ने आरोप लगाया कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में pre-printed Form 7 applications जमा किए गए, जिनमें पहले से मतदाताओं के नाम, EPIC नंबर और बूथ संबंधी जानकारी दर्ज थी। Shivakumar ने BJP और JD(S) से जुड़े लोगों पर भी आरोप लगाए हैं। संबंधित आरोपों की सत्यता की जांच जारी है।

Shivakumar ने Belagavi, Vijayapura, Mysuru, Bidar और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी शिकायतों का हवाला देते हुए व्यापक जांच की मांग की है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति की ओर से बड़ी संख्या में applications दाखिल किए गए। इन दावों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि सभी Form 7 applications फर्जी हैं; अब चुनाव अधिकारियों और पुलिस जांच का काम अलग-अलग मामलों की वास्तविकता निर्धारित करना है।

Belagavi में 15,000 मतदाताओं को लेकर Rahul Gandhi का आरोप

कांग्रेस नेता और लोकसभा में Leader of Opposition Rahul Gandhi ने भी आरोप लगाया कि Belagavi में करीब 15,000 मतदाताओं के नाम हटाने का संगठित प्रयास किया गया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR तथा जांच की मांग की। यह कांग्रेस नेता का आरोप है, जांच का निष्कर्ष नहीं।

इसी विवाद में मुख्यमंत्री Shivakumar ने इससे कहीं बड़े स्तर पर मतदाताओं को प्रभावित किए जाने के दावे किए हैं। ऐसे व्यापक आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए उन्हें स्थापित संख्या के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

BJP ने आरोपों को किया खारिज

कर्नाटक BJP अध्यक्ष B Y Vijayendra ने कांग्रेस और Shivakumar के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के CEO कार्यालय में किए गए विरोध प्रदर्शन की आलोचना की और कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए।

दूसरी ओर Shivakumar ने BJP पर voter deletion की कथित योजना का आरोप दोहराया। इस तरह दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, जबकि जांच अभी जारी है।

Mysuru, Bidar और Belagavi में FIR

विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा है। Mysuru, Bidar और Belagavi में कथित Form 7 irregularities से संबंधित FIR दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं।

Mysuru में पुलिस ने 501 Form 7 applications से जुड़े एक मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ applications में आवश्यक applicant details नहीं थीं। पुलिस जांच जारी है।

FIR दर्ज होना आरोपों के सही साबित होने के बराबर नहीं है; आपराधिक जिम्मेदारी जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से तय होगी।

224 विधानसभा क्षेत्रों में जांच क्यों महत्वपूर्ण?

CEO के निर्देश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका statewide scope है। जांच केवल उन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है जहां कांग्रेस ने शिकायत की है, बल्कि सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों में संदिग्ध या bulk applications की जांच की जा सकती है।

इससे चुनाव अधिकारियों के सामने दोहरी जिम्मेदारी आती है—एक तरफ किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने से रोकना और दूसरी तरफ ऐसे मामलों में electoral roll को अपडेट करने की वैध प्रक्रिया जारी रखना जहां नाम हटाने का कानूनी आधार मौजूद हो।

राजनीतिक आरोप और सत्यापित तथ्य अलग रखना जरूरी

इस विवाद में तीन स्तरों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

पहला, bulk Form 7 applications को लेकर शिकायतें सामने आई हैं और कुछ मामलों में FIR दर्ज हुई हैं। दूसरा, CEO ने knowingly false declarations पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया है। ये दस्तावेजीकृत घटनाक्रम हैं।

तीसरा, Congress, BJP और अन्य राजनीतिक नेताओं की ओर से एक-दूसरे पर लगाए गए व्यापक आरोप अभी राजनीतिक दावे हैं। जांच पूरी होने से पहले यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि राज्यव्यापी स्तर पर किसी एक पार्टी ने संगठित रूप से मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की।

आने वाली जांच इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इससे पता चल सकता है कि विवादित applications में कितने वास्तविक थे, कितने गलत या अपूर्ण थे और क्या किसी मामले में जानबूझकर गलत declaration देने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

आगे क्या होगा?

ERO स्तर पर applications की scrutiny और inquiry इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण अगला चरण है। जहां जानबूझकर गलत जानकारी देने का प्रमाण मिलता है, वहां Representation of the People Act के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

साथ ही जिन मामलों में FIR पहले ही दर्ज हो चुकी हैं, वहां पुलिस जांच अलग से आगे बढ़ेगी।

इस पूरे विवाद का अंतिम महत्व केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में नहीं, बल्कि इस बात में है कि electoral-roll revision के दौरान eligible voters की सुरक्षा और गलत deletion requests के खिलाफ safeguards कितने प्रभावी साबित होते हैं।

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