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राजनीति

‘खेल को फिक्स बताकर खेलते नहीं रह सकते’: ECI विवाद के बीच अभिजीत डिपके ने विपक्ष से चुनाव न लड़ने को कहा

Cockroach Janta Party के संस्थापक अभिजीत डिपके ने विपक्षी दलों से कहा है कि यदि वे वास्तव में मानते हैं कि चुनावी प्रक्रिया में धांधली हो रही है, तो उन्हें चुनाव लड़ना बंद कर देना चाहिए। उनका तर्क है कि लगातार चुनाव में हिस्सा लेने से उसी प्रक्रिया को वैधता मिलती है जिस पर विपक्ष सवाल उठा रहा है। चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों का खंडन किया है।

‘खेल को फिक्स बताकर खेलते नहीं रह सकते’: ECI विवाद के बीच अभिजीत डिपके ने विपक्ष से चुनाव न लड़ने को कहा
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: PTI, Abhijeet Dipke/X and Election Commission clarification

नई दिल्ली: चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाया है।

शुक्रवार, 25 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दिए अपने बयान में डिपके ने कहा कि यदि विपक्षी दल चुनावों में धांधली होने का दावा करते हैं, तो उन्हें उन्हीं चुनावों में लगातार हिस्सा लेने के अपने फैसले पर भी विचार करना चाहिए।

डिपके ने कहा, “You cannot keep saying the game is rigged while continuing to play it.”

उनका तर्क है कि जिस चुनावी व्यवस्था को विपक्ष कथित रूप से अनुचित बता रहा है, उसमें भागीदारी जारी रखने से उसी व्यवस्था को वैधता मिलती है।

ये डिपके के आरोप और राजनीतिक तर्क हैं; चुनावों में धांधली होने का दावा यहां स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।

‘Fixed match’ का उदाहरण देकर समझाया तर्क

डिपके ने अपनी बात समझाने के लिए एक कथित रूप से फिक्स क्रिकेट मैच का उदाहरण दिया।

उनका कहना था कि किसी फिक्स मैच में जरूरी नहीं कि हर कैच छोड़ा जाए या मुकाबला शुरू से ही एकतरफा दिखाई दे। मैच को अंतिम ओवर तक ले जाकर वास्तविक प्रतिस्पर्धा जैसा दिखाया जा सकता है।

इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने दावा किया कि विपक्ष को कुछ चुनावी जीत मिलने से यह जरूरी नहीं हो जाता कि उसके द्वारा उठाए गए व्यापक चुनावी सवाल समाप्त हो जाते हैं।

उनके अनुसार, यदि विपक्ष खुद चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगा रहा है, तो उसे अपनी भागीदारी के राजनीतिक प्रभाव पर भी विचार करना चाहिए।

‘किस तरह का अस्तित्व बचाने की कोशिश?’

डिपके ने यह सवाल भी उठाया कि क्या विपक्षी दल चुनावों से दूर रहने पर अपना राजनीतिक अस्तित्व कमजोर पड़ने के डर से लगातार चुनाव लड़ रहे हैं।

उन्होंने विपक्ष के सामने कथित वोट चोरी, निर्वाचित विधायकों और सांसदों के दल बदलने तथा राजनीतिक दलों के टूटने जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।

डिपके ने कहा कि चुनावी अनियमितताओं के आरोप किसी विशेष राज्य या किसी खास राजनीतिक दल को प्रभावित करने पर ही नहीं उठाए जाने चाहिए। उनके मुताबिक, यदि चुनावी निष्पक्षता पर सवाल है तो उस पर राजनीतिक हित से अलग एक समान रुख होना चाहिए।

बयान से एक दिन पहले CEC के इस्तीफे की मांग

डिपके की यह टिप्पणी CJP द्वारा Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग किए जाने के एक दिन बाद आई है।

24 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP ने कुमार को इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे का समय दिया और ऐसा नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी।

CJP ने इसके साथ चल रहे Special Intensive Revision (SIR) को रोकने और आगामी चुनावों को फिलहाल स्थगित करने की मांग भी की।

संगठन ने 2023 में Election Commissioners की नियुक्ति से जुड़े कानून को निरस्त कर ऐसी नई व्यवस्था बनाने की मांग की जिसमें, उसके अनुसार, नागरिक समाज की भागीदारी के जरिए अधिक सार्वजनिक विश्वास सुनिश्चित किया जा सके।

ये CJP की मांगें हैं और इन्हें चुनाव आयोग या किसी न्यायिक संस्था के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ECI विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?

ताजा विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ जिसमें कहा गया कि Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने लगभग 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के भीतर विभिन्न मुद्दों पर सवाल या आपत्तियां दर्ज की थीं।

रिपोर्ट में Form 6 में बदलाव, ERONet के केंद्रीकरण और मतदाता सूची से नाम हटाने की अपीलों सहित कई विषयों का उल्लेख किया गया।

हालांकि, Election Commission of India ने इस घटनाक्रम की अलग व्याख्या की है।

आयोग के अनुसार, अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी संस्थान की आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। ECI ने कहा कि SIR सहित आयोग के अंतिम निर्णय तीनों Election Commissioners की सहमति से लिए गए।

इसलिए आंतरिक स्तर पर दर्ज आपत्तियों या टिप्पणियों को अपने आप अंतिम फैसलों पर असहमति का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।

विपक्ष की भागीदारी पर बहस क्यों महत्वपूर्ण है?

डिपके का बयान चुनावी प्रक्रिया पर लगे आरोपों से आगे जाकर एक अलग राजनीतिक सवाल उठाता है—यदि कोई राजनीतिक दल किसी चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाता है, तो क्या उसी व्यवस्था में भाग लेना उसके आरोपों को कमजोर करता है?

डिपके का जवाब स्पष्ट रूप से चुनाव से दूरी बनाने के पक्ष में है। हालांकि यह उनकी राजनीतिक स्थिति है। विपक्षी दल चुनावों में हिस्सा लेने, चुनावी प्रक्रिया को चुनौती देने और संस्थागत या कानूनी उपाय अपनाने के बारे में अपने अलग-अलग निर्णय ले सकते हैं।

इस बहस में एक तरफ चुनावी प्रक्रिया को लेकर CJP और कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोप हैं, जबकि दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं और अंतिम निर्णय संस्थागत नियमों के तहत लिए गए हैं।

ऐसे में दोनों पक्षों के दावों और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं के बीच अंतर बनाए रखना इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

Source

Primary Sources: PTI reports and Abhijeet Dipke's public statement on X, September 25, 2026.

Additional reporting/reference: Hindustan Times, Moneycontrol and Election Commission's reported clarification.

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