विज्ञापन - शीर्ष बैनर
Read in English —JantaScope English
राजनीति

महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ नाम Draft Voter List से बाहर, राहुल गांधी ने फिर लगाया ‘Vote Theft’ का आरोप; बंगाल का भी किया जिक्र

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों को लेकर एक बार फिर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है। महाराष्ट्र की SIR draft voter list में करीब 2.07 करोड़ पुराने मतदाताओं के शामिल न होने और 2024 में लोकसभा से विधानसभा चुनाव के बीच करीब 39 लाख मतदाता बढ़ने का हवाला देते हुए उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। Election Commission ने स्पष्ट किया है कि draft roll से बाहर हुए 2.07 करोड़ नामों को अंतिम deletion नहीं माना जाना चाहिए।

महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ नाम Draft Voter List से बाहर, राहुल गांधी ने फिर लगाया ‘Vote Theft’ का आरोप; बंगाल का भी किया जिक्र
विज्ञापन

द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों को लेकर एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और Election Commission पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

महाराष्ट्र में Special Intensive Revision यानी SIR के बाद प्रकाशित draft electoral roll में करीब 2.07 करोड़ पुराने electors के शामिल नहीं होने को राहुल गांधी ने अपनी पहले की ‘vote theft’ की शिकायत से जोड़ा।

उन्होंने महाराष्ट्र के 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मतदाताओं की संख्या में हुई बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाया और पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए नामों में बड़ी संख्या में बाद में बहाल किए जाने का दावा किया।

हालांकि यहां महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि राहुल गांधी द्वारा इसे ‘vote theft’ कहना उनका राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध जानकारी से यह अपने आप सिद्ध नहीं होता कि मतदाता सूची में बदलाव चुनावी धोखाधड़ी के कारण हुआ।

Election Commission ने भी कहा है कि महाराष्ट्र की draft list से बाहर दिखाई दे रहे करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं को अभी अंतिम रूप से deleted नहीं माना जाना चाहिए।

महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं को लेकर क्या है विवाद?

महाराष्ट्र में SIR से पहले मतदाताओं की संख्या करीब 9.78 करोड़ थी।

SIR के बाद प्रकाशित draft electoral roll में यह संख्या घटकर लगभग 7.78 करोड़ रह गई।

इसका मतलब है कि पुराने electoral roll में मौजूद करीब 2.07 करोड़ electors draft list में शामिल नहीं हुए।

इसी आंकड़े ने राजनीतिक विवाद को तेज कर दिया।

राहुल गांधी ने इसे लेकर सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाता draft roll से बाहर कैसे हो गए।

उन्होंने कहा कि यह लगभग राज्य के हर पांचवें मतदाता के बराबर है।

लेकिन 2.07 करोड़ के आंकड़े को सीधे ‘2.07 करोड़ मतदाताओं के वोटिंग अधिकार खत्म हो गए’ के रूप में समझना सही नहीं होगा।

Election Commission के अनुसार, यह draft electoral roll है और इसके बाद claims और objections की प्रक्रिया होती है। योग्य मतदाता जिनका नाम draft list में नहीं है, निर्धारित प्रक्रिया के तहत inclusion के लिए आवेदन कर सकते हैं।

राहुल गांधी ने पूछा—आखिर कौन सी Voter List सही थी?

राहुल गांधी ने अलग-अलग समय की महाराष्ट्र voter lists के आंकड़ों की तुलना करते हुए सवाल उठाया।

उन्होंने मोटे तौर पर ये आंकड़े सामने रखे:

लोकसभा चुनाव 2024: करीब 9.29 करोड़ मतदाता

विधानसभा चुनाव 2024: करीब 9.7 करोड़ मतदाता

SIR Draft 2026: करीब 7.78 करोड़ मतदाता

इन्हीं आंकड़ों का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने पूछा:

“Which list was correct?”

उनका तर्क है कि मतदाता संख्या में इतने बड़े बदलाव electoral rolls की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।

2024 में 39 लाख नए मतदाताओं पर फिर उठाया सवाल

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच voter population में हुई बढ़ोतरी को भी अपने आरोप का हिस्सा बनाया।

उनका दावा है कि दोनों चुनावों के बीच करीब 39 लाख नए मतदाता electoral roll में जोड़े गए थे।

उन्होंने कहा:

“Maharashtra 2024 – Suddenly, 3.9 million new voters were added between the Lok Sabha and Vidhan Sabha elections.”

इसके बाद उन्होंने अपने पुराने आरोप को दोहराते हुए इसे ‘vote theft’ बताया।

लेकिन यहां भी यह distinction जरूरी है कि voter additions का आंकड़ा अपने आप electoral fraud साबित नहीं करता। राहुल गांधी इन बदलावों को अपने आरोप के समर्थन में पेश कर रहे हैं।

BJP और Election Commission पर सीधा हमला

राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर BJP के साथ Election Commission को भी निशाने पर लिया।

उन्होंने Election Commission के लिए आलोचनात्मक रूप से “Vote Theft Commission” शब्द का इस्तेमाल किया और आरोप लगाया कि तरीके बदलते रहते हैं लेकिन उद्देश्य BJP की जीत सुनिश्चित करना है।

उन्होंने लिखा:

“The BJP and the ‘Vote Theft Commission’ keep changing their tactics, and they will continue to do so.”

राहुल गांधी ने आगे दावा किया कि लक्ष्य BJP की किसी भी कीमत पर जीत और भारतीय लोकतंत्र का अंत है।

यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है और इसे Election Commission या BJP द्वारा स्वीकार किया गया तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

पश्चिम बंगाल को लेकर क्या दावा किया?

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के साथ पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में SIR के बाद voter list से हटाए गए नामों में से 91% नाम appeals के बाद वापस शामिल करने पड़े।

उनके अनुसार इसका अर्थ है कि हटाए गए प्रत्येक 10 नामों में से करीब 9 बाद में वापस आए।

राहुल गांधी ने इसे भी अपनी ‘vote theft’ की शिकायत के समर्थन में पेश किया।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े अनुपात में नामों की वापसी शुरुआती exclusions की accuracy पर गंभीर सवाल उठाती है।

हालांकि ‘91%’ आंकड़े के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि सभी संबंधित नाम जानबूझकर गलत तरीके से हटाए गए थे, एक अलग दावा है। राहुल गांधी ने इसे राजनीतिक रूप से ‘vote theft’ कहा है।

Election Commission का महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

महाराष्ट्र के मामले में Election Commission का पक्ष इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

Commission ने स्पष्ट किया कि draft electoral roll में शामिल नहीं हुए 2.07 करोड़ नामों को अंतिम deletion figure नहीं समझा जाना चाहिए।

Draft list जारी होने के बाद claims और objections की अवधि होती है।

इस दौरान ऐसे eligible voters जिनका नाम draft roll में नहीं आया है, inclusion के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसलिए final electoral roll आने तक वास्तविक रूप से कितने मतदाता बाहर रहेंगे, यह तय नहीं है।

यही कारण है कि ‘2.07 करोड़ वोट काट दिए गए’ और ‘2.07 करोड़ नाम draft list में शामिल नहीं हुए’—इन दोनों वाक्यों के बीच महत्वपूर्ण अंतर है।

Draft List और Final List में क्या अंतर है?

पूरे विवाद को समझने के लिए यह distinction बेहद जरूरी है।

Draft Electoral Roll अंतिम मतदाता सूची नहीं होती।

Draft publication का उद्देश्य ही यह है कि नागरिक और राजनीतिक दल सूची की जांच कर सकें और missing names, गलत entries या दूसरी समस्याओं को challenge कर सकें।

इसके बाद claims और objections पर विचार किया जाता है और योग्य नाम वापस जोड़े जा सकते हैं।

इसलिए महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ electors का draft roll में न होना निश्चित रूप से बहुत बड़ा आंकड़ा है और scrutiny की मांग करता है, लेकिन final roll प्रकाशित होने से पहले इसे permanent deletion के बराबर मानना जल्दबाजी होगी।

राहुल गांधी के पुराने आरोपों से कैसे जुड़ता है नया विवाद?

महाराष्ट्र voter list को लेकर राहुल गांधी की आपत्ति नई नहीं है।

उन्होंने पहले भी 2024 महाराष्ट्र चुनाव को लेकर electoral rolls और voter additions पर सवाल उठाए थे।

Election Commission ने राहुल गांधी के पिछले ‘match-fixing’ जैसे आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें “completely absurd” कहा था।

इसलिए मौजूदा विवाद एक लंबे राजनीतिक टकराव का हिस्सा है, जिसमें कांग्रेस electoral-roll changes को चुनावी निष्पक्षता के सवाल से जोड़ रही है, जबकि Election Commission पहले ऐसे व्यापक manipulation के आरोपों से इनकार करता रहा है।

आंकड़े सवाल जरूर उठाते हैं, लेकिन क्या ‘Vote Theft’ साबित करते हैं?

यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।

महाराष्ट्र की draft list में करीब 2.07 करोड़ पुराने electors का शामिल नहीं होना एक बड़ा administrative और electoral development है।

इसी तरह 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच voter count में करीब 39 लाख की बढ़ोतरी पर राजनीतिक सवाल उठना भी स्वाभाविक है।

लेकिन केवल इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष अपने आप नहीं निकलता कि चुनाव चोरी हुआ था।

इसके लिए यह स्थापित करना जरूरी होगा कि voter additions या exclusions गलत थे, वे किस कारण हुए और क्या उनमें जानबूझकर किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने वाला systematic pattern मौजूद था।

राहुल गांधी का दावा है कि ये बदलाव manipulation की ओर इशारा करते हैं। Election Commission का कहना है कि महाराष्ट्र की मौजूदा सूची अभी draft stage में है और exclusions अंतिम नहीं हैं।

इसलिए फिलहाल verified numbers और राजनीतिक interpretation को अलग-अलग रखना जरूरी है।

मतदाताओं के लिए इसका क्या मतलब है?

महाराष्ट्र में जिन लोगों का नाम draft electoral roll में दिखाई नहीं दे रहा है, उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि draft list अंतिम सूची नहीं है।

Election Commission ने claims और objections के लिए प्रक्रिया उपलब्ध कराई है।

इसका मतलब है कि eligible voter अपना नाम missing मिलने पर inclusion के लिए आवेदन कर सकता है।

महाराष्ट्र में इस प्रक्रिया की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 बताई गई है।

इसलिए राजनीतिक आरोपों से अलग, मतदाताओं के लिए व्यावहारिक प्राथमिकता अपनी voter-list entry की जांच करना और जरूरत होने पर निर्धारित समय में correction या inclusion के लिए आवेदन करना है।

निष्कर्ष

राहुल गांधी के ताजा आरोपों ने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की electoral rolls को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ पुराने electors का draft list में शामिल न होना, 2024 में लोकसभा से विधानसभा चुनाव के बीच करीब 39 लाख voters की बढ़ोतरी और पश्चिम बंगाल में exclusions के बाद बड़ी संख्या में नामों की कथित बहाली—ये वे आंकड़े हैं जिनके आधार पर राहुल गांधी ‘vote theft’ का आरोप लगा रहे हैं।

लेकिन इन आंकड़ों और उनसे निकाले जा रहे राजनीतिक निष्कर्षों को अलग रखना आवश्यक है।

महाराष्ट्र की सूची अभी draft stage में है और Election Commission ने साफ किया है कि 2.07 करोड़ का आंकड़ा final deletion नहीं है।

इस विवाद का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव claims-and-objections प्रक्रिया पूरी होने के बाद आने वाली final voter list होगी। उससे यह स्पष्ट होगा कि draft में बाहर रहे मतदाताओं में से कितने नाम सत्यापन और दावों के बाद वापस शामिल किए जाते हैं।

तब तक ‘vote theft’ का दावा एक गंभीर राजनीतिक आरोप है—सिद्ध तथ्य नहीं।


साझा करें
विज्ञापन - मध्य लेख
विज्ञापन - नीचे