द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की 24 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) और महाराष्ट्र कांग्रेस के बीच प्रस्तावित जनसभाओं के आयोजन पर बातचीत चल रही है। मुंबई और नागपुर को संभावित स्थानों के रूप में चुना गया है। हालांकि कार्यक्रम की तारीखों और आयोजन संबंधी अंतिम आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
मुंबई और नागपुर में बड़ी जनसभाओं की योजना
कांग्रेस सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि राहुल गांधी की प्रस्तावित रैलियों में पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा सामाजिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जा सकता है।इन सभाओं का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का पुनरीक्षण, बड़ी संख्या में नामों का प्रारूप सूची से बाहर होना और चुनाव आयोग की जवाबदेही होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को भी राजनीतिक अभियान का हिस्सा बना सकती है। मुंबई और नागपुर जैसे महत्वपूर्ण शहरों में कार्यक्रम आयोजित करने का उद्देश्य इस मुद्दे पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा शुरू करना हो सकता है। हालांकि कांग्रेस के विस्तृत कार्यक्रम और आंदोलन की रूपरेखा का आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है।
महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं के नामों पर विवाद
महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया के दौरान जारी प्रारूप मतदाता सूची ने राजनीतिक विवाद को बढ़ाया है। 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित प्रारूप सूची के अनुसार, पुनरीक्षण से पहले राज्य में लगभग 9.78 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से करीब 7.72 करोड़ नाम प्रारूप सूची में शामिल किए गए, जबकि लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं के गणना फॉर्म एकत्र नहीं हो पाए।
इन नामों को प्रारूप सूची में शामिल नहीं किए जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए। राहुल गांधी ने सितंबर में आरोप लगाया था कि मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने स्पष्ट किया था कि 2.07 करोड़ की संख्या को स्थायी रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या नहीं समझना चाहिए। इसमें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित, दोहरे पंजीकरण वाले और अन्य श्रेणियों के मतदाता शामिल हैं। पात्र नागरिकों को अपना नाम दोबारा शामिल कराने का अवसर दिया गया है।
13 करोड़ नामों का मुद्दा क्या है?
कांग्रेस देशभर में SIR के दौरान लगभग 13 करोड़ नाम प्रारूप मतदाता सूचियों से बाहर होने का मुद्दा भी उठा रही है। अक्टूबर की शुरुआत में प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की प्रारूप सूचियों से लगभग 13 करोड़ नाम बाहर हुए थे। लेकिन इस संख्या को 13 करोड़ पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार स्थायी रूप से समाप्त हो जाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। नाम हटाए जाने के कारणों, दोहरे पंजीकरण, मृत्यु, स्थानांतरण और बाद में प्राप्त दावों की जांच किए बिना वास्तविक रूप से प्रभावित पात्र मतदाताओं की संख्या निर्धारित नहीं की जा सकती। इसी बीच चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए थे।
राहुल गांधी पहले भी उठा चुके हैं वोट चोरी का मुद्दा
राहुल गांधी पिछले कुछ समय से मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की आलोचना कर रहे हैं। सितंबर में उन्होंने महाराष्ट्र की मतदाता संख्या में बदलाव का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया था कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच करीब 39 लाख मतदाताओं की वृद्धि कैसे हुई और अब इतनी बड़ी संख्या प्रारूप सूची से बाहर क्यों है।
कांग्रेस ने इन आंकड़ों को चुनावी पारदर्शिता से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। दूसरी ओर, भाजपा और चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात तथा जानबूझकर गड़बड़ी करने के आरोपों से इनकार किया है। ऐसी स्थिति में राजनीतिक आरोपों और प्रमाणित चुनावी अनियमितताओं के बीच अंतर करना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा SIR का विवाद
SIR से संबंधित विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया का भी हिस्सा बन चुका है। 15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और विपक्षी INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित संबंधित चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया।
याचिका में मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दे उठाए गए हैं। हालांकि अदालत द्वारा नोटिस जारी करने का अर्थ आरोपों को सही ठहराना नहीं है। मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और आगे की न्यायिक सुनवाई महत्वपूर्ण होंगे। इस प्रकार कांग्रेस की प्रस्तावित जनसभाओं का राजनीतिक मुद्दा न्यायालय में विचाराधीन सवालों से भी जुड़ा हुआ है।
महाराष्ट्र में 26 अक्टूबर तक दावा और आपत्ति दर्ज करने का मौका
राज्य में SIR प्रक्रिया से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम भी सामने आया है। चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र की प्रारूप मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 26 अक्टूबर 2026 कर दी है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, दावों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 10 नवंबर तक चलेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।
जिन पात्र नागरिकों का नाम प्रारूप सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form 6 का इस्तेमाल कर सकते हैं। विवरण में सुधार के लिए Form 8 और किसी प्रविष्टि पर आपत्ति के लिए Form 7 का प्रावधान है। मतदाता चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर अपना नाम भी जांच सकते हैं।
कांग्रेस के सामने संगठनात्मक चुनौती
महाराष्ट्र में कांग्रेस के लिए SIR विवाद एक राजनीतिक मुद्दा होने के साथ संगठनात्मक चुनौती भी है। पार्टी को सार्वजनिक सभाओं के जरिए अपने सवाल उठाने के अलावा यह सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा कि जिन पात्र नागरिकों के नाम छूटे हैं, उन्हें वैधानिक प्रक्रिया की जानकारी मिल सके।
इस काम में बूथ स्तर के कार्यकर्ता और स्थानीय प्रतिनिधि महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राज्य में अन्य विपक्षी दल भी मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर आपत्तियां व्यक्त कर चुके हैं। सितंबर में शिवसेना (UBT) के नेता उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने भी इस मुद्दे पर संयुक्त विरोध मार्च आयोजित करने की घोषणा की थी। हालांकि इन दलों की अपनी अलग राजनीतिक प्राथमिकताएं और रणनीतियां हैं।
क्या होगा राहुल गांधी की प्रस्तावित रैलियों का असर?
यदि मुंबई और नागपुर में राहुल गांधी की जनसभाएं आयोजित होती हैं, तो मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर सार्वजनिक बहस और तेज हो सकती है। लेकिन इस अभियान का वास्तविक राजनीतिक प्रभाव जनसभाओं की संख्या से नहीं, बल्कि उठाए गए सवालों, प्रशासनिक जवाबों और मतदाता सूची में होने वाले अंतिम सुधारों से भी निर्धारित होगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर पात्र नागरिक का नाम अंतिम मतदाता सूची में सही ढंग से दर्ज हो और किसी भी शिकायत के समाधान के लिए स्पष्ट प्रक्रिया उपलब्ध हो। राहुल गांधी की महाराष्ट्र में प्रस्तावित रैलियां चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों को लेकर कांग्रेस के जारी अभियान का अगला चरण बन सकती हैं। फिलहाल मुंबई और नागपुर संभावित स्थान हैं, लेकिन आयोजन की आधिकारिक तारीखें घोषित नहीं हुई हैं। आने वाले दिनों में कांग्रेस की घोषणा, चुनाव आयोग की कार्रवाई और 16 नवंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची इस विवाद की आगे की दिशा स्पष्ट करेंगी।
